पश्चिम एशिया के अशांत माहौल और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन पर पड़े गंभीर असर के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक उत्साहजनक स्थिति बनी है। ईरान संकट और अमेरिका के साथ जारी टकराव के कारण जिस समुद्री रास्ते को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा था, वहां से आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं हुई है। खाड़ी क्षेत्र के उत्पादक देशों ने वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स तंत्र तैयार करके कच्चे तेल की दैनिक निकासी को संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर पर पहुंचा दिया है। 1 से 28 सितंबर के दौरान ईरान को छोड़कर बाकी खाड़ी देशों से रोजाना औसतन 1.65 करोड़ बैरल कच्चा तेल वैश्विक बाजार में भेजा गया। भारत अपनी जरूरत की ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से ही खरीदता है, ऐसे में आपूर्ति सामान्य होने से देश की ऊर्जा सुरक्षा को ठोस संबल मिला है।
संकट के चरम पर मार्च में गिर गया था निर्यात
युद्ध की शुरुआत से पहले खाड़ी इलाके से निकलने वाले समूचे कच्चे तेल का लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से ही होकर गुजरता था। जब मार्च के दौरान क्षेत्रीय संघर्ष अपने चरम पर पहुंचा, तब जहाजों की आवाजाही बाधित होने से खाड़ी देशों का कुल कच्चा तेल निर्यात लुढ़ककर 1.05 करोड़ बैरल प्रतिदिन पर आ गया था। उस गिरावट ने तेल, एलएनजी और एलपीजी की वैश्विक श्रृंखला को बुरी तरह हिला दिया था। समुद्री विश्लेषण और खुफिया जानकारी जुटाने वाली संस्था केप्लर के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि बाद के महीनों में जमीनी पाइपलाइन नेटवर्क और समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में कार्गो ट्रांसफर करने की तरकीबों ने व्यापार में नई जान फूंक दी।
सऊदी अरब और यूएई की पाइपलाइनों ने बदली दिशा
सितंबर में दर्ज किए गए कुल निर्यात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की बाईपास पाइपलाइनों के जरिए भेजा गया। इन पाइपलाइनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनके रास्ते तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश कराए बिना सीधे खुले समुद्र के बंदरगाहों तक पहुंचाया जा सकता है। सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का पूरा इस्तेमाल करते हुए लाल सागर के किनारे स्थित यानबू टर्मिनल तक तेल प्रवाह को कई गुना बढ़ा दिया। जंग शुरू होने से पूर्व यानबू मार्ग से रोजाना केवल 8 लाख बैरल तेल की लोडिंग होती थी, जो जून में बढ़कर 43 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर तक पहुंच गई।
इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपनी रणनीतिक अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन की क्षमता का भरपूर दोहन किया। इस पाइपलाइन के जरिए तेल को सीधे फुजैरा बंदरगाह पहुंचाया जाता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित है। फुजैरा टर्मिनल पर कच्चे तेल की दैनिक लोडिंग युद्ध से पहले 11 लाख बैरल थी, जिसे संकट के दौर में बढ़ाकर 27 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया गया। इन दोनों देशों के जमीनी पाइपलाइन बुनियादी ढांचे ने समुद्री नाकेबंदी के प्रभाव को लगभग आधा कर दिया।
शटल टैंकरों और समुद्र में कार्गो ट्रांसफर से हुआ समाधान
सितंबर में निर्यात किए गए बाकी 60 प्रतिशत कच्चे तेल को हालांकि पारंपरिक जलमार्ग यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से ही निकालना पड़ा, लेकिन वहां भी रणनीति में भारी बदलाव किया गया। जोखिम भरे संकरे जलमार्ग में बड़े टैंकरों को सीधे भेजने के बजाय शटल टैंकरों के जरिए तेल की ढुलाई की गई। अगस्त के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने वाले 70 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल को ओमान की खाड़ी में खुले समुद्र के भीतर ही एक पोत से दूसरे पोत में सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया गया। इस शिप-टू-शिप ट्रांसफर पद्धति से मुख्य समुद्री गलियारे पर विशाल जहाजों का जमावड़ा नहीं लगा और तेल को गंतव्य देशों के बड़े जहाजों में भरकर आगे रवाना कर दिया गया।
मुख्य जलमार्ग पर दबाव बरकरार, रणनीतिक भंडारों का सहारा
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल की वास्तविक आवाजाही का आंकड़ा अब भी जंग से पहले के सामान्य स्तर की तुलना में एक चौथाई से अधिक कम बना हुआ है। इसके बावजूद वैकल्पिक पाइपलाइन मार्गों की क्षमता में दोगुने से ज्यादा की बढ़ोतरी ने मुख्य मार्ग की इस 25 प्रतिशत से अधिक की कमी को पूरी तरह संतुलित कर दिया है।
बाजार में स्थिरता कायम रखने के लिए वैश्विक स्तर पर भी ठोस प्रयास किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार उसके सदस्य राष्ट्रों ने रणनीतिक आपातकालीन भंडारों से अब तक 32.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और संबंधित पेट्रोलियम उत्पाद बाजार में जारी किए हैं। मार्च में जब आपूर्ति संकट गहराया था, तब सदस्य देशों ने सामूहिक रूप से 40 करोड़ बैरल जारी करने की प्रतिबद्धता जताई थी। रणनीतिक भंडारों की इस निकासी और खाड़ी क्षेत्र के नए सप्लाई मार्गों ने मिलकर कच्चे तेल, एलपीजी और ईंधन की किल्लत की आशंकाओं को दूर कर दिया है।



















