हवाई सफर के दौरान कॉकपिट के भीतर होने वाली अप्रत्याशित घटनाएं पूरी दुनिया के विमानन क्षेत्र को हिलाकर रख देती हैं। हाल ही में फ्लाईदुबई के एक विमान में कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए जानलेवा हमले ने अंतरराष्ट्रीय एविएशन प्रोटोकॉल और एयरलाइन सुरक्षा की पोल खोल दी है। विमान के भीतर यह हमला किसी चाकू या आम हथियार से नहीं, बल्कि कॉकपिट में आपातकालीन स्थिति के लिए रखी जाने वाली क्रैश कुल्हाड़ी यानी क्रैश एक्स से किया गया था। इस औजार को विमान के केबिन या कॉकपिट में आपात स्थिति के दौरान खिड़कियां तोड़ने अथवा बाधाएं हटाने के लिए रखा जाता है। हमले को अंजाम देने वाला कोई बाहरी व्यक्ति या यात्री नहीं, बल्कि खुद विमान का को-पायलट हम्माम अल-हमामी था। उसके इस हिंसक कदम के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि जिस पायलट को पूर्व में उसकी संदिग्ध गतिविधियों की वजह से उड़ान भरने से रोका गया था, वह आखिर इज़राइल जाने वाले संवेदनशील विमान के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा और क्या ऐसी कोई सुरक्षा खामी भारत के विमानन क्षेत्र में भी संभव हो सकती है।
कट्टरपंथी विचारधारा और ओमान एयर से निष्कासन का सफर
जांच और मीडिया हलकों में सामने आई जानकारियों के अनुसार 29 वर्षीय हम्माम अल-हमामी ओमान का नागरिक है। उसके पिता ओमानी मूल के हैं जबकि उसकी मां सीरियाई मूल की हैं, हालांकि ओमान प्रशासन की तरफ से अभी उसकी नागरिकता की औपचारिक पुष्टि होना बाकी है। हमामी ने अपने जीवन का अधिकांश समय संयुक्त अरब अमीरात में गुजारा था। उसके अतीत के तार सीरिया से भी जुड़े रहे हैं, जहां रहने के दौरान वह उग्र और कट्टरपंथी विचारों के प्रभाव में आया था।
हमामी के लिंक्डइन प्रोफाइल के ब्योरे के मुताबिक उसने इंग्लैंड की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से साल 2023 में डिस्टेंस-लर्निंग कोर्स के जरिए एविएशन मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की थी। वह साल 2017 से ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन ओमान एयर के साथ जुड़ा हुआ था और वहां काम कर रहा था। साल 2024 में पायलट ट्रेनिंग सेशन के दौरान उसे कट्टरपंथी वेबसाइटों को ब्राउज करते और सामग्री खंगालते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। इस गंभीर सुरक्षा अनुशासनहीनता के बाद ओमान एयर ने तुरंत सख्त कदम उठाते हुए उसे फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया और ग्राउंड आधारित डेस्क जॉब पर ट्रांसफर कर दिया। हमामी को दफ्तर में बैठकर डेस्क का काम करना पसंद नहीं आया, जिसके चलते उसने जून 2025 में ओमान एयर से इस्तीफा दे दिया।
ओमान एयर छोड़ने के तुरंत बाद हमामी मोरक्को की राष्ट्रीय एयरलाइन 'एयर मारोक' में शामिल हो गया, जहां उसने जून 2025 से जनवरी 2026 तक सेवाएं दीं। वहां से भी इस्तीफा देने के बाद उसने फरवरी 2026 में, यानी इस घटना से लगभग आठ महीने पहले, को-पायलट के तौर पर फ्लाईदुबई ज्वाइन कर ली।
घटना के नौ घंटे बाद सोशल मीडिया प्रोफाइल से रहस्यमयी पोस्ट
फ्लाईदुबई के बोइंग 737 मैक्स 8 विमान में घटी इस खौफनाक वारदात के ठीक नौ घंटे बाद बुधवार को हमामी के लिंक्डइन खाते से दो बेहद चौंकाने वाली पोस्ट साझा की गईं। फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है कि उन पोस्टों को किसने और कहां से अपलोड किया था।
पहली पोस्ट में बोइंग 737 मैक्स विमान के कॉकपिट के भीतर रिकॉर्ड किए गए वीडियो क्लिप शामिल थे। इस वीडियो में दुबई एयरपोर्ट पर खड़ी इज़राइली एयरलाइन 'एल अल' के विमान का जूम किया गया दृश्य दिखाई दे रहा था। कॉकपिट की स्क्रीन पर फ्लाइट नंबर OMA624 और तारीख 11 अक्टूबर 2023 दर्ज थी। यह दुबई से मस्कट की उड़ान थी और यह तारीख हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए हमलों के ठीक चार दिन बाद की थी, जब हमामी ओमान एयर में तैनात था।
उसी वीडियो के अन्य क्लिपों में एक अन्य इज़राइली एयरलाइन अरकिया के विमानों के साथ-साथ एल अल के अन्य विमानों को भी दिखाया गया था। क्लिप के अंतिम हिस्से में अल-कायदा कमांडर अयमान अल-जवाहिरी और 2009 में अमेरिकी सीआईए के सात अधिकारियों सहित नौ लोगों की आत्मघाती हमले में जान लेने वाले अल-कायदा आतंकी हुमाम खलील अबू-मुलाल अल-बलावी की तस्वीरें लगाई गई थीं।
दूसरी पोस्ट में एक एआई जनरेटेड तस्वीर थी, जिसमें इस्लाम के तीन पवित्र स्थलों मक्का, मदीना और यरुशलम को एक चमकती हुई रेखा से आपस में जुड़ा दिखाया गया था। इसके बैकग्राउंड में एक गाना बज रहा था, जिसके बोल अपमान को खारिज करने और मौत के खौफ से परे रहने के संदेश दे रहे थे। इसी तरह के दोनों वीडियो हमामी के नाम से बने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी उसी वक्त डाले गए थे, जिसे बाद में सोशल मीडिया से हटा दिया गया।
महिलाओं के कामकाज के खिलाफ नफरत और कट्टरपंथी सोच
हमामी के एक्स प्रोफाइल पर मौजूद पुराने ब्योरे से यह बात भी पुख्ता हुई है कि वह धार्मिक रूप से बेहद कट्टर था और कामकाजी महिलाओं के प्रति गहरी नफरत रखता था। यद्यपि अब उसके अकाउंट से ये पोस्ट हटाई जा चुकी हैं, लेकिन 2021 और 2022 के बीच साझा किए गए करीब 3,000 ट्वीट्स के विश्लेषण से उसकी मानसिकता का खुलासा हुआ।
फरवरी 2022 की एक पोस्ट में हमामी ने लिखा था कि उसकी मां को उसके लिए एक ऐसी लड़की खोजने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जो शादी के बाद नौकरी न करे और हिजाब पहने। उसने को-वर्किंग ऑफिसों में महिलाओं के काम करने को लेकर बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी थीं और दावा किया था कि साझा दफ्तरों में काम करने से धार्मिक और संस्कारी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद होती है और उनका शोषण होता है।
फ्लाईदुबई के एक अन्य पायलट ने भी इस बात की पुष्टि की कि हमामी अत्यधिक कट्टर था, दिन में कई बार नमाज पढ़ता था और किसी भी महिला से हाथ मिलाने से पूरी तरह परहेज करता था।
ओमान एयर के प्रतिबंध के बावजूद इज़राइल की उड़ान तक कैसे पहुंचा हमामी?
इस पूरे मामले पर इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि जिन देशों के इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां के पायलट इज़राइल जाने वाले विमानों को नहीं उड़ा सकते। उन्होंने कहा कि हमामी किसी तरह इस नियम को चकमा देकर कॉकपिट में घुसने में कामयाब रहा, जो एक बहुत बड़ी सुरक्षा खामी है। दरअसल ओमान फिलिस्तीन का समर्थक है और उसने इज़राइल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक रिश्ते नहीं हैं।
हमामी के इज़राइल की उड़ान संचालित करने के पीछे मुख्य रूप से तीन सिद्धांत सामने आ रहे हैं
1. विमानन समझौतों में विसंगति और नियमों का अभाव
एयरलाइंस विभिन्न देशों के साथ हवाई परिचालन समझौते करती हैं, जो यह तय करते हैं कि किन राष्ट्रीयताओं के पायलटों को उन उड़ानों पर भेजा जा सकता है। इज़राइली रिपोर्ट्स के अनुसार फ्लाईदुबई के परिचालन समझौते में यह स्पष्ट शर्त थी कि ओमानी पायलटों को इज़राइल नहीं भेजा जाएगा। परंतु सितंबर 2020 में हस्ताक्षरित अब्राहम एकॉर्ड्स के तहत संयुक्त अरब अमीरात और इज़राइल के बीच एक द्विपक्षीय विमानन सेवा समझौता हुआ था। इसके अनुच्छेद 13 के अनुसार दोनों देशों की एयरलाइंस अपने किसी भी विमानन स्टाफ को बिना किसी राष्ट्रीयता के प्रतिबंध के एक-दूसरे के यहां भेज सकती हैं। इस द्विपक्षीय समझौते में पायलटों की नागरिकता को लेकर कोई अलग पाबंदी नहीं थी, जिससे फ्लाईदुबई के मूल परिचालन समझौते में भारी भ्रम और चूक पैदा हो गई।
2. पृष्ठभूमि जांच और खुफिया निगरानी की विफलता
इज़राइली खुफिया एजेंसी शिन बेट संवेदनशील देशों से आने वाली उड़ानों और उनके क्रू मेंबर्स की निगरानी करती है। लेकिन कई रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि शिन बेट ने खुद हमामी की कोई स्वतंत्र बैकग्राउंड जांच नहीं की, बल्कि उसने पूरी तरह फ्लाईदुबई पर भरोसा किया कि वह प्रतिबंधित देशों के पायलटों को इज़राइल नहीं भेजेगी। इसके अलावा ओमान और इज़राइल के बीच हाल के वर्षों में आवाजाही आसान हुई थी और कई ओमानी पायलट इज़राइल आ-जा चुके थे। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि ओमान एयर ने हमामी पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों को दी थी या नहीं। फ्लाईदुबई ने भी यह स्पष्ट नहीं किया है कि नियुक्ति से पहले हमामी का कोई बैकग्राउंड वेरिफिकेशन ओमान सरकार या उसकी पिछली एयरलाइन से कराया गया था या नहीं। घटना के बाद इज़राइल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव की मांग पर फ्लाईदुबई की इज़राइल उड़ानों को पूरी तरह निलंबित कर दिया गया है।
3. दोहरी नागरिकता अथवा जाली दस्तावेजों की आशंका
शुरुआत में यह कयास लगाए जा रहे थे कि हमामी ने किसी ऐसे देश की नागरिकता हासिल कर ली होगी जिसके नागरिकों को इज़राइल जाने की अनुमति है, और उसी के आधार पर वह फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 तक पहुंचा। हालांकि 2 अक्टूबर को आई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि उसके पास दोहरी नागरिकता नहीं थी और वह केवल ओमानी पायलट के रूप में विमान उड़ा रहा था। एविएशन विशेषज्ञ अनंत सेठी का कहना है कि फ्लाईदुबई एक बजट एयरलाइन है जो पायलट ट्रेनिंग और सुरक्षा प्रक्रियाओं पर कम खर्च करती है, जबकि सुरक्षा का असल जिम्मा एयरलाइन से ज्यादा संबंधित सरकारों का होता है। उनके अनुसार इस बात की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि किसी बड़ी साजिश के तहत हमामी के लिए जाली दस्तावेजों से किसी तीसरे देश की नागरिकता तैयार कराई गई हो ताकि उसे फ्लाईदुबई में भर्ती कराया जा सके।
क्या कोई पाकिस्तानी पायलट भारत के लिए विमान उड़ाकर आ सकता है?
अप्रैल 2025 से भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के लिए अपना हवाई क्षेत्र यानी एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर रखा है। इसका सीधा मतलब यह है कि दोनों मुल्कों के बीच न तो कोई सीधी उड़ान संचालित होती है और न ही दोनों देशों की एयरलाइंस एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र से होकर किसी तीसरे देश जा सकती हैं। इसके अलावा पाकिस्तान में पंजीकृत कोई भी विमान भारत में प्रवेश नहीं कर सकता, भले ही उसे किसी विदेशी एयरलाइन द्वारा ही क्यों न संचालित किया जा रहा हो।
एविएशन विशेषज्ञ अनंत सेठी के मुताबिक, कड़े प्रतिबंधों के बावजूद दो सैद्धांतिक रास्ते ऐसे हो सकते हैं जिनसे पाकिस्तानी मूल का पायलट किसी विदेशी उड़ान से भारत आ सकता है
1. दोहरी नागरिकता का सहारा
पाकिस्तान अपने नागरिकों को दोहरी नागरिकता रखने की कानूनी इजाजत देता है। इस वजह से बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक अमेरिका सहित कई पश्चिमी मुल्कों की नागरिकता ले लेते हैं। अमेरिका जैसे देशों में विदेशी मूल का व्यक्ति नागरिकता लेकर वहां की एयरलाइंस में कमर्शियल पायलट बन सकता है। ऐसे में यह संभव है कि पाकिस्तानी मूल का कोई व्यक्ति अमेरिकी या किसी अन्य विदेशी पासपोर्ट के आधार पर किसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन का पायलट बनकर भारत की उड़ान पर आ जाए।
2. जनरल डिक्लेरेशन और विदेशी एयरलाइन भर्ती
दुनियाभर की कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस विदेशी नागरिकों को पायलट के तौर पर नौकरी देती हैं। भारत ने विदेशी एयरलाइंस पर ऐसी कोई सीधी पाबंदी नहीं लगाई है जैसी इज़राइल ने फ्लाईदुबई पर ओमानी पायलटों को लेकर लगाई थी। यद्यपि भारत ने अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों और पायलटों के वीजा जारी करने पर रोक लगा रखी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत बिना पूर्व वीजा वाले पायलट भी 'जनरल डिक्लेरेशन' दस्तावेज के जरिए विमान के साथ किसी देश में प्रवेश कर सकते हैं। यह जनरल डिक्लेरेशन उड़ान शुरू होने पर और वापसी की उड़ान के वक्त जमा किया जाता है।
हालांकि भारत का नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो यानी बीसीएएस संवेदनशील उड़ानों और क्रू सदस्यों की बेहद कड़ी निगरानी करता है। बीसीएएस की इस चाक-चौबंद सुरक्षा प्रणाली के चलते किसी पाकिस्तानी नागरिक का क्रू मेंबर के रूप में भारत में प्रवेश कर पाना लगभग असंभव है, क्योंकि पायलटों के दस्तावेजों और बैकग्राउंड की गहन जांच की जाती है। अनंत सेठी का कहना है कि यह पूरा मसला अंततः पायलट के पेशे पर टिके बुनियादी भरोसे का है, ठीक वैसे ही जैसे कोई यह उम्मीद नहीं करता कि एक डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में मरीज की जान ले लेगा, फिर भी ऐसे अपराध सामने आ जाते हैं।
विमान हाइजैक की मंशा और जांच के मुख्य बिंदु
वारदात के बाद शुरुआती इलाज पूरा होने पर हमामी को सऊदी अरब से संयुक्त अरब अमीरात भेज दिया गया है, जहां सुरक्षा और जांच एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं। जांचकर्ताओं के हवाले से यह दावा सामने आया है कि हमामी ने पूछताछ में कबूल किया कि उसका असली इरादा विमान को अगवा कर इज़राइल की धरती पर क्रैश कराने का था। तलाशी के दौरान उसके निजी सामान से 'फ्री फिलिस्तीन' लिखे पर्चे और फिलिस्तीन समर्थक प्रचार सामग्री भी बरामद हुई है।
फिलहाल जांच एजेंसियां तीन सबसे अहम सवालों की तह तक जाने की कोशिश में जुटी हैं: पहला यह कि हमामी किस समय और किन परिस्थितियों में कट्टरपंथ की गिरफ्त में आया, क्योंकि जांच में उसके कुछ धार्मिक हस्तियों से मिलने की बात भी सामने आई है; दूसरा यह कि क्या उसने इस पूरे खौफनाक मंसूबे को अकेले तैयार किया था या उसके साथ कोई अन्य सिंडिकेट भी शामिल था; और तीसरा यह कि उड़ान के दौरान कैप्टन स्मित पर किए गए इस जानलेवा हमले के पीछे क्या कोई संगठित आतंकी साजिश सक्रिय थी।



















