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कर्नाटक विधानमंडल में वंदे मातरम् के दो अंतरों पर बवाल, भाजपा सदस्यों ने पूरा राष्ट्रगीत गाकर जताया विरोधकर्नाटक
21 सित॰ 2026, 4:39 pm (10 दिन पहले)· 1

कर्नाटक विधानमंडल में वंदे मातरम् के दो अंतरों पर बवाल, भाजपा सदस्यों ने पूरा राष्ट्रगीत गाकर जताया विरोध

कर्नाटक विधानमंडल के विशेष सत्र में राष्ट्रगीत के केवल दो अंतरे बजाए जाने पर भाजपा सदस्यों ने सदन के भीतर ही पूरा वंदे मातरम् गाकर विरोध दर्ज कराया.

कर्नाटक विधानमंडल के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन सोमवार को राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर दोनों सदनों में भारी हंगामा देखने को मिला. विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होने पर आधिकारिक रूप से राष्ट्रगीत के केवल दो अंतरे बजाकर ऑडियो बंद कर दिया गया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने सदन में ही पूरा राष्ट्रगीत गाकर अपना कड़ा विरोध जताया.

विधानसभा में श्रद्धांजलि के दौरान गूंजा पूरा राष्ट्रगीत

विधानसभा की कार्यवाही राष्ट्रगीत से शुरू हुई, मगर उसका ऑडियो दो अंतरों के बाद ही रोक दिया गया. इसके तत्काल बाद विधानसभा अध्यक्ष जी. एस. पाटिल ने दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि देने की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति प्रदान की. इसी क्रम में मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने पूर्व विधायक आर. बी. शिरियन्नावर को श्रद्धांजलि देना आरंभ किया, जिनका निधन 27 अगस्त को हो गया था. वंदे मातरम् का पूरा संस्करण नहीं बजाए जाने से नाराज भाजपा विधायकों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी और स्वयं ही राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाना जारी रखा.

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विधान परिषद में भी प्रस्तावना पठन के बीच हुआ विरोध

ऐसा ही दृश्य विधान परिषद में भी देखने को मिला. वहां सभापति सलीम अहमद ने तय परंपरा के मुताबिक संविधान की प्रस्तावना पढ़ना शुरू किया, जबकि भाजपा सदस्य उस समय भी राष्ट्रगीत के शेष अंतरे गाते रहे. राष्ट्रगीत पूरा होने के बाद भाजपा सदस्यों ने पूरा संस्करण न बजाए जाने के फैसले के खिलाफ सरकार विरोधी नारेबाजी की.

विशेष सत्र का एजेंडा और सरकारी आदेश

कर्नाटक सरकार ने राज्य में गंभीर सूखे के हालात तथा पश्चिमी घाट पर डॉ. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के प्रभावों पर गहन चर्चा करने के उद्देश्य से यह तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है. उल्लेखनीय है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के मौजूदा आदेश के तहत केवल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को छोड़कर बाकी सभी सरकारी आयोजनों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे ही गाने या बजाने का नियम तय किया गया है.

सवाल-जवाब

कर्नाटक विधानमंडल में विवाद की मुख्य वजह क्या थी?
सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे बजाकर ऑडियो बंद कर दिया गया था, जिस पर भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताई.
भाजपा सदस्यों ने विरोध किस प्रकार दर्ज कराया?
भाजपा सदस्यों ने सदन के भीतर खुद ही वंदे मातरम् के बाकी अंतरे गाकर पूरा राष्ट्रगीत गाया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
कर्नाटक सरकार का वंदे मातरम् को लेकर क्या आधिकारिक आदेश है?
सरकारी आदेश के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की उपस्थिति को छोड़कर अन्य सभी कार्यक्रमों में केवल पहले दो अंतरे ही बजाए या गाए जाएंगे.
यह विशेष सत्र किन मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया गया है?
यह तीन दिवसीय विशेष सत्र राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट पर डॉ. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के प्रभावों पर चर्चा के लिए बुलाया गया है.
विधानसभा में राष्ट्रगीत बंद होने के बाद किस पूर्व विधायक को श्रद्धांजलि दी जा रही थी?
मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार पूर्व विधायक आर. बी. शिरियन्नावर को श्रद्धांजलि दे रहे थे, जिनका निधन 27 अगस्त को हुआ था.
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टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·9 दिन पहले

कर्नाटक विधानमंडल सत्र में वंदे मातरम् के दो अंतरों को सीमित करने का यह विवाद गंभीर सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे अहम मुद्दों पर से ध्यान भटका सकता है। जब राज्य आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे वैचारिक और सांस्कृतिक टकराव विधाई प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं और आगे चलकर नीतिगत चर्चाओं में गतिरोध पैदा कर सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

कर्नाटक में राष्ट्रगीत के केवल दो अंतरे बजाने के सरकारी आदेश पर हुआ यह विवाद प्रतीकात्मक राजनीति और विधायी प्राथमिकताओं के टकराव को रेखांकित करता है। राज्य सरकार ने यह सत्र गंभीर सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे संवेदनशील नीतिगत मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया था, लेकिन ऐसे मामलों में प्रोटोकॉल विवाद कार्यवाही के मूल एजेंडे से ध्यान भटका देते हैं। आगे चलकर यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मुद्दा राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और अधिक तेज कर सकता है।

Amit Patel@amit-patel·9 दिन पहले

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य गंभीर सूखे और पर्यावरणीय चिंताओं जैसी बड़ी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। इस तरह के वैचारिक टकराव प्रशासनिक दक्षता को प्रभावित करते हैं और नीतिगत फैसलों से निवेशकों का ध्यान भटकाते हैं, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

कर्नाटक विधानमंडल के इस विशेष सत्र में राष्ट्रगीत के ऑडियो प्रोटोकॉल को लेकर हुआ यह विवाद विधाई कार्यवाही और प्रशासनिक नियमों के टकराव को उजागर करता है। सरकार के मौजूदा आदेश और विपक्ष के विरोध के बीच यह साफ है कि आने वाले सत्र के दिनों में सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर भी सदन के भीतर सियासी तकरार और आक्रामक होने की पूरी संभावना है।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रशासनिक गतिरोध ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य गंभीर सूखे और पर्यावरण से जुड़े कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे संवेदनशील नीतिगत विषयों पर चर्चा करने के लिए जुटा है। ऐसे नीतिगत और प्रतीकात्मक मुद्दों पर उपजा यह वैचारिक टकराव वास्तविक विधाई एजेंडे से ध्यान भटका सकता है, जिससे वित्तीय आवंटन, ग्रामीण संकट प्रबंधन और महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णयों पर तार्किक चर्चा प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

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