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कश्मीर मुद्दे पर ओआईसी के बयानों को भारत ने नकारा, नई दिल्ली ने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की दी चेतावनीभारत
23 सित॰ 2026, 5:24 pm (37 दिन पहले)· 0

कश्मीर मुद्दे पर ओआईसी के बयानों को भारत ने नकारा, नई दिल्ली ने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की दी चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने इस्लामिक सहयोग संगठन को कड़ी फटकार लगाई है। नई दिल्ली ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और बाहरी मंचों को इन पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान इस्लामिक सहयोग संगठन द्वारा कश्मीर से जुड़े दावों को दोहराने पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने इस रुख को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की टिप्पणियां पूरी तरह अनुचित और सच्चाई से परे हैं। भारत सरकार ने दोहराया कि पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के किसी भी हिस्से से संबंधित आंतरिक मामलों पर हस्तक्षेप करने का ओआईसी के पास कोई वैध या कानूनी आधार नहीं है। राजनीतिक प्रेरणा से संचालित कोई भी दुर्भावनापूर्ण अभियान जमीनी हकीकत को तनिक भी प्रभावित नहीं कर सकता।

साख और अधिकार क्षेत्र पर सवाल

विदेश मंत्रालय ने ओआईसी के तथाकथित संपर्क समूह के वक्तव्यों पर ऐतराज जताते हुए कहा कि भारत के संप्रभु क्षेत्र पर किसी भी तीसरे पक्ष का अधिकार क्षेत्र स्वीकार नहीं किया जा सकता। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सदैव भारत के अविभाज्य हिस्से रहे हैं और आगे भी रहेंगे। नई दिल्ली ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान द्वारा गढ़े गए झूठे आख्यानों को बार-बार अपने मंच से प्रसारित कर संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। किसी भी बाहरी समूह को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।

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मंच के दुरुपयोग और सीमा पार हिंसा पर सख्त रुख

भारत ने कड़े लहजे में कहा कि इस वैश्विक निकाय को एक खास देश के गलत प्रचार का माध्यम बनने से बचना चाहिए। संगठन को अपने मंच के अनुचित इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए और इसके बजाय पाकिस्तान को अपने गिरेबान में झांकने की स्पष्ट सीख देनी चाहिए। दशकों से सीमा पार हिंसा को बढ़ावा देने और आतंक को प्रश्रय देने का पाकिस्तान का एक लंबा रिकॉर्ड रहा है।

क्षेत्रीय शांति और आतंकी ढांचे का मुद्दा

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह पक्ष भी रखा कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों से संचालित आतंकी नेटवर्क आज भी पूरे क्षेत्र की शांति के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। जब तक आतंकी शिविरों का संचालन और वित्तीय मदद पूरी तरह बंद नहीं होती, तब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर गढ़े गए बयानों के जरिए इस कड़वी हकीकत को छिपाया नहीं जा सकता।

सवाल-जवाब

भारत ने ओआईसी के किस बयान का विरोध किया है?
भारत ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान ओआईसी द्वारा कश्मीर को लेकर दिए गए बयानों का कड़ा विरोध किया है।
ओआईसी के अधिकार क्षेत्र पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर या लद्दाख से जुड़े किसी भी मामले पर बोलने का ओआईसी के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
भारत ने ओआईसी को क्या सलाह दी है?
भारत ने कहा कि ओआईसी को अपने मंच का दुरुपयोग रोकना चाहिए और पाकिस्तान को आतंकवाद तथा सीमा पार हिंसा पर आत्ममंथन करने की सलाह देनी चाहिए।
क्षेत्रीय शांति के लिए भारत ने सबसे बड़ी चुनौती किसे बताया?
भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी नेटवर्क और उसके नियंत्रण वाले इलाकों में सक्रिय आतंकी शिविरों को क्षेत्रीय शांति के लिए मुख्य चुनौती बताया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·36 दिन पहले

ओआईसी को अपने काम से काम रखना चाहिए। पाकिस्तान के इशारे पर बार-बार कश्मीर का राग अलापने से उनकी अपनी साख ही खत्म हो रही है, जबकि भारत अपनी संप्रभुता पर किसी का दखल बर्दाश्त नहीं करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 दिन पहले

ओआईसी को हर बार मुंह की खानी पड़ती है, फिर भी वो पाकिस्तान के इशारे पर बार-बार कश्मीर का राग क्यों अलापता रहता है?

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·36 दिन पहले

अर्जुन जी, आप ठीक कह रहे हैं पर मुझे लगता है कि इन्हें बार-बार बोलने से रोकना शायद अब मुमकिन नहीं है, जब तक वो खुद नहीं समझेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 दिन पहले

भारत के आंतरिक मामलों में बार-बार दखल देने की कोशिश करने वाले संगठनों को अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़ा संदेश मिलना ही चाहिए। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट भी बताती है कि जब तक सीमा पार से आतंक की फंडिंग बंद नहीं होती, तब तक ऐसे बयानों का कोई मतलब नहीं है।

Rohan Verma@rohan-verma·36 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही बात कही आपने। पाकिस्तान जब तक अपनी ज़मीन से आतंकवाद चलाना बंद नहीं करता, ओआईसी के ऐसे बयानों की कोई अहमियत नहीं है।

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