मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में आनंद नगर क्षेत्र अपनी पुरानी औपनिवेशिक इमारतों और ब्रिटिश शासन काल के स्थापत्य के लिए पहचाना जाता है। इसी इलाके में स्थित एक विशेष ऐतिहासिक भवन समय के साथ अपने स्वरूप में कई बदलावों से गुजर चुका है। करीब 1861 के दौरान निर्मित यह परिसर शुरुआती दिनों में ब्रिटिश सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के ठहरने का मुख्य केंद्र हुआ करता था। समय बीतने के साथ इस जगह ने न केवल अपना अस्तित्व बचाए रखा, बल्कि शहर के सामाजिक जीवन में एक नई और महत्वपूर्ण भूमिका भी हासिल की।
1861 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था निर्माण
इस इमारत का इतिहास 1861 के आसपास का है, जब भारत में ब्रिटिश शासन का दौर था। उस समय खंडवा का आनंद नगर क्षेत्र गोरे सैनिकों की बैरकों और अंग्रेज अधिकारियों की आवाजाही से भरा रहता था। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में खंडवा में यात्रियों और अधिकारियों के रुकने के लिए कोई आधुनिक लॉज या होटल सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसी आवश्यकता को देखते हुए ब्रिटिश प्रशासन ने इस विशाल परिसर का निर्माण कराया था। इस इमारत को खास औपनिवेशिक स्थापत्य शैली में बनाया गया था, जिसमें ऊंची छतें, हवादार बड़े कमरे और चारों तरफ खुला विशाल परिसर शामिल था। यह विशेषता इसे आसपास की अन्य ब्रिटिश इमारतों से अलग पहचान देती थी।
1961 का रिनोवेशन और हंसकुमार कैप्रीन की पहल
आजादी के बाद कई दशकों तक यह परिसर अपनी पुरानी बनावट में खड़ा रहा। स्थानीय जानकार लव जोशी के अनुसार, साल 1961 में इस इमारत के इतिहास में एक नया मोड़ आया। इस संपत्ति को एक पूर्ण होटल के रूप में नया रूप दिया गया। हंसकुमार कैप्रीन ने इस पुरानी औपनिवेशिक इमारत का नवीनीकरण कराकर इसे कमर्शियल होटल के रूप में शुरू किया। लव जोशी बताते हैं कि उस दौर में खंडवा शहर के भीतर आधुनिक सुविधाओं वाला कोई अन्य बड़ा होटल मौजूद नहीं था। इस वजह से हंसकुमार कैप्रीन की यह शुरुआत जल्द ही पूरे खंडवा में चर्चा का विषय बन गई और यह जगह शहर का एक प्रमुख लैंडमार्क बन गई। आज भी यह इमारत निजी संपत्ति के रूप में अपनी पुरानी गरिमा बनाए हुए है।
ब्रिटिश साहबों के ठिकाने से लेकर जनता की खुशियों तक
समय के साथ होटल की आंतरिक संरचना में कई जरूरी बदलाव किए गए, लेकिन इसके बाहरी ऐतिहासिक स्वरूप को आज भी सुरक्षित रखा गया है। इमारत के भीतर कई बड़े कमरे मौजूद हैं और इसके चारों ओर फैला विशाल बगीचा इसकी सबसे बड़ी खूबी है। जहां ब्रिटिश काल में यहां केवल उच्च अंग्रेज अधिकारी और साहब ठहरा करते थे, वहीं आज इस परिसर का उपयोग खंडवा के स्थानीय नागरिक अपने निजी और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए करते हैं। विवाह समारोह, सगाई और जन्मदिन की पार्टियों के लिए यह गार्डन एक लोकप्रिय विकल्प बन चुका है। इतिहास की यह पुरानी विरासत आज शहर के लोगों की खुशियों और यादगार लम्हों का हिस्सा बनी हुई है।
खंडवा की जीवंत ऐतिहासिक धरोहर
खंडवा की यह पुरानी इमारत केवल एक व्यावसायिक ठहरने की जगह नहीं है, बल्कि यह इस शहर के सामाजिक और भौतिक इतिहास की एक जीवित कड़ी है। 1861 से शुरू होकर 1961 के कायाकल्प और फिर वर्तमान समय तक, इस इमारत ने तीन अलग-अलग सदियों के दौर को देखा है। औपनिवेशिक सत्ता का प्रतीक रही यह इमारत अब आम जनता के मांगलिक कार्यों का गवाह बनती है। समय के थपेड़ों के बावजूद इसकी पुरानी भव्यता और पहचान आज भी पहले की तरह कायम है।



















