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हरियाणा के यमुनानगर में ढही 250 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत, हादसे की चपेट में आया दंपत्तिहरियाणा
13 अग॰ 2026, 7:54 am (4 घंटे पहले)· 0

हरियाणा के यमुनानगर में ढही 250 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत, हादसे की चपेट में आया दंपत्ति

यमुनानगर के बुढ़िया इलाके में 250 साल पुराने राजा जी महल का बड़ा हिस्सा बुधवार को अचानक गिर गया। हादसे में सामने बने मकान में मौजूद दंपत्ति मलबे की चपेट में आकर घायल हो गए।

हरियाणा के यमुनानगर स्थित बुढ़िया क्षेत्र की राजाजी गली में बुधवार को एक बड़ा हादसा सामने आया। यहां मौजूद लगभग 250 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत राजा जी महल का एक बड़ा भाग अचानक ढह गया। महल की विशालकाय दीवार भरभराकर गली में गिरी और सीधे सामने बने एक रिहाइशी मकान पर जा पहुंची। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय मकान के अंदर एक दंपत्ति मौजूद था। दीवार का मलबा गिरते ही दोनों लोग उसकी चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाके और मलबा गिरने की आवाज सुनकर आसपास के स्थानीय निवासी तुरंत मौके पर एकत्र हुए और अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया। लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए मलबे को हटाया, दबे हुए दंपत्ति को बाहर निकाला और बिना किसी देरी के उन्हें उपचार के लिए निकटतम अस्पताल पहुंचाया।

CCTV कैमरे में कैद हुआ पूरा हादसा

यह पूरी घटना पास में ही लगे एक CCTV कैमरे में दर्ज हो गई। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि लंबे समय से जर्जर स्थिति में खड़ी महल की ऊंची दीवार बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक नीचे आ गिरी। दीवार गिरते ही वहां धूल का गुबार उठ गया और मलबा सामने वाले मकान को क्षतिग्रस्त करते हुए अंदर चला गया। इस घटना के तुरंत बाद पूरी गली में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के घरों से लोग बाहर निकल आए और तुरंत राहत कार्य शुरू किया गया। स्थानीय निवासियों के त्वरित प्रयास से दोनों घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका, जहां उनका इलाज जारी है।

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पुराने ढांचों का सर्वे और सुरक्षा इंतजाम की मांग

इलाके के निवासियों का कहना है कि राजा जी महल एक सदियों पुरानी ऐतिहासिक संरचना है, जिसका बड़ा हिस्सा लंबे समय से अत्यंत जर्जर हालत में था। इस दुर्घटना ने एक बार फिर पुरानी और कमजोर ऐतिहासिक इमारतों की देखरेख और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि क्षेत्र में मौजूद सभी पुरानी तथा जर्जर इमारतों का तत्काल तकनीकी सर्वे कराया जाए। इसके साथ ही आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की किसी बड़ी जनहानि या दुर्घटना से बचा जा सके।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में भी हुआ था बड़ा हादसा

जर्जर इमारतों के गिरने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में भी ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा देखने को मिला था। जिले के महुली इलाके में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण लगभग 100 साल पुराना एक जर्जर मकान गिर गया था। इस हादसे के वक्त घर के अंदर परिवार के सदस्य सो रहे थे। मकान का ढांचा गिरने से मलबे में दबकर एक ही परिवार के 6 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में खाई में गिरा मकान, दो महिलाओं की मौत

इसी तरह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से भी मकान ढहने की गंभीर खबर सामने आई है। सिरमौर के राजगढ़ विकास खंड के अंतर्गत आने वाले छिछड़ियां गांव में एक रिहाइशी मकान अचानक संतुलन खोकर गहरी खाई में जा गिरा। दुर्घटना के समय मकान के अंदर कुल 4 लोग मौजूद थे। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत करके चारों पीड़ितों को मलबे से बाहर निकाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल में इलाज के दौरान 2 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 2 बच्चों का गंभीर अवस्था में उपचार चल रहा है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया है और प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान करने में जुटा है।

सवाल-जवाब

यमुनानगर में कौन सी ऐतिहासिक इमारत ढही है?
यमुनानगर के बुढ़िया क्षेत्र स्थित राजाजी गली में लगभग 250 साल पुराना ऐतिहासिक 'राजा जी महल' का बड़ा हिस्सा ढह गया।
हादसे में कितने लोग घायल हुए और उनका बचाव कैसे हुआ?
सामने बने मकान में मौजूद एक दंपत्ति मलबे की चपेट में आकर घायल हो गया, जिन्हें स्थानीय लोगों ने मलबा हटाकर बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
क्या इस घटना का वीडियो उपलब्ध है?
हाँ, पूरी घटना पास में लगे एक CCTV कैमरे में दर्ज हुई है, जिसमें दीवार को अचानक गिरते हुए देखा जा सकता है।
प्रतापगढ़ में हुए हादसे में कितने लोगों की जान गई थी?
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के महुली में 100 साल पुराना मकान गिरने से एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई थी।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में क्या हादसा हुआ था?
सिरमौर के छिछड़ियां गांव में एक मकान खाई में गिर गया था, जिसमें 4 लोग दबे थे। इलाज के दौरान 2 महिलाओं की मौत हो गई और 2 बच्चों का इलाज जारी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 मिनट पहले

यमुनानगर की यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जर्जर इमारतों के मामले में प्रशासनिक लापरवाही किस हद तक घातक साबित हो सकती है। हालांकि स्थानीय लोगों की मुस्तैदी से एक बड़ा जीवन बचाने में सफलता मिली, लेकिन ऐतिहासिक और कमजोर ढांचों की नियमित देखरेख के अभाव में नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इस मामले में अब प्रशासन को केवल सर्वे तक सीमित न रहकर कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा कसा जा सके और भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·41 मिनट पहले

यह हादसा केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि नगरीय निकायों की उस गहरी उदासीनता का परिणाम है जो पुरानी बस्तियों में हर मानसून और मौसम बदलाव के दौरान भारी जनहानि का कारण बनती है। स्थानीय निवासियों द्वारा लगातार मांग के बावजूद जर्जर हो चुके ऐतिहासिक ढांचों का समयबद्ध तकनीकी ऑडिट न होना और आपातकालीन सुरक्षा उपायों की कमी सीधे तौर पर जीवन के अधिकार का हनन है। यदि अब भी प्रशासन ने जवाबदेही तय कर इन इमारतों को गिराने या संरक्षित करने की स्पष्ट कार्ययोजना नहीं बनाई, तो प्रतापगढ़ जैसी त्रासदियाँ अन्य क्षेत्रों में भी दोहराई जा सकती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यमुनानगर की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की बड़ी प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। 250 साल पुरानी जर्जर इमारत के संबंध में पहले से कोई सुरक्षात्मक कदम न उठाया जाना कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा के प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते जर्जर ऐतिहासिक ढांचों का तकनीकी सर्वे कराकर नोटिस या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की गई, तो उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसी अन्य दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना असंभव होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यमुनानगर की यह घटना इस बात की गंभीर चेतावनी है कि हमारे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ऐतिहासिक व पुरानी संपत्तियों का प्रबंधन बेहद कमजोर है। सहकर्मी द्वारा उठाए गए प्रशासनिक लापरवाही के मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए यह स्पष्ट है कि यदि स्थानीय निकायों ने समय रहते जर्जर भवनों का तकनीकी सर्वे करवाकर आवश्यक सुदृढ़ीकरण या निकासी के कड़े कदम नहीं उठाए, तो इस प्रकार के हादसे मानवीय भूल के कारण होने वाली त्रासदियों का रूप लेते रहेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·2 घंटे पहले

यमुनानगर की यह घटना केवल एक हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्राचीन और ऐतिहासिक इमारतों के रख-रखाव में प्रशासनिक लापरवाही का सीधा परिणाम है। जिस तरह से जर्जर ढांचों के गिरने से लगातार हादसे हो रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि नगर निकायों को मानसून या भारी बारिश से पहले पुरानी संपत्तियों का अनिवार्य तकनीकी सर्वे कराना चाहिए। यदि समय रहते इन ऐतिहासिक स्मारकों और मकानों की संरचनात्मक ऑडिट नहीं की गई, तो उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में इस तरह के हादसे और भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।

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