पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी और इमारतों में किए गए अनधिकृत बदलावों की पोल खोलकर रख दी है। इस भयानक अग्निकांड में कुल नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिनमें पांच बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं। हादसे के बाद जब आसपास के व्यापारिक क्षेत्र और गेस्ट हाउस परिसरों की पड़ताल की गई, तो कम किराए में कमरे देने के दबाव और सुरक्षा मानकों के साथ किए जा रहे खतरनाक समझौतों की भयावह तस्वीर सामने आई। इस त्रासदी ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि महज थोड़े से व्यावसायिक लाभ के लिए आगंतुकों की जीवन सुरक्षा को किस हद तक दांव पर लगाया जा रहा था।
सस्ते कमरों की मांग और व्यावसायिक दबाव
कोलकाता का फ्री स्कूल स्ट्रीट और मिर्जा गालिब स्ट्रीट क्षेत्र बांग्लादेश से आने वाले पर्यटकों, इलाज कराने आए मरीजों और व्यापारियों के बीच काफी समय से बेहद लोकप्रिय रहा है। इस पूरे इलाके में केवल होटल और गेस्ट हाउस ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा विनिमय केंद्र, सिम कार्ड की दुकानें, यात्रा टिकट बुकिंग काउंटर और खान-पान के अनेक व्यावसायिक प्रतिष्ठान केंद्रित हैं। स्थानीय गेस्ट हाउस प्रबंधन के अनुसार बांग्लादेश से आने वाले मेहमान कमरों के किराए को लेकर काफी मोलभाव करते हैं। कई बार आगंतुक 250 से 300 टका, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 150 से 200-250 रुपये के बराबर होता है, उतने कम बजट में रहने की जगह मांगते हैं। इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और कम बजट में कमरे उपलब्ध कराने की होड़ के कारण होटल संचालक उपलब्ध जगह का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के दबाव में आ जाते हैं।
प्लाईवुड विभाजन और खतरनाक ढांचागत खामियां
हादसे के बाद हुई शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि इस इलाके की कई पुरानी रिहायशी इमारतों और फ्लैटों को बिना किसी उचित योजना के कमर्शियल होटलों में बदल दिया गया। कम जगह में ज्यादा से ज्यादा कमरे निकालने के लिए प्लाईवुड की पतली दीवारों का इस्तेमाल करके बड़े कमरों को विभाजित कर दिया गया। इसके चलते माचिस के डिब्बे जैसे छोटे-छोटे केबिन तैयार कर दिए गए, जिनमें हवा के आवागमन और आपातकालीन निकास की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। जिस इमारत में शिखा इन नामक होटल चल रहा था, उसकी बनावट में भी कई गंभीर कमियां पाई गईं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इमारत का एक हिस्सा साल 2013 में बना था, लेकिन इसके निर्माण के दौरान बगल की पड़ोसी इमारत से जरूरी सुरक्षित दूरी नहीं छोड़ी गई थी। आग लगने की स्थिति में यह ढांचागत कमी दमकल की गाड़ियों और राहत कार्य में लगे कर्मियों के लिए बड़ी रुकावट साबित हुई।
सुरक्षा व्यवस्था में विसंगतियां और लाइसेंस का मामला
क्षेत्र के विभिन्न ठहरने के ठिकानों की जांच के दौरान सुरक्षा इंतजामों में भारी अंतर देखने को मिला। पास में ही स्थित सोनाली गेस्ट हाउस में हर मंजिल पर पानी की पाइपलाइन, कार्यशील फायर अलार्म, आपातकालीन निकास और लोहे की बाहरी सीढ़ियां बनी पाई गईं, जिसके पास वैध अग्निशमन प्रमाण पत्र भी उपलब्ध थे। इसके विपरीत, आग प्रभावित इमारत से जुड़े होटल मालिक ने माना कि वहां फायर सेफ्टी और नगर निगम की जरूरी मंजूरियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। होटल मालिक का कहना था कि लाइसेंस के लिए आधिकारिक आवेदन जमा कराया गया था, लेकिन संबंधित विभागों से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद बिना वैध क्लीयरेंस के होटल का नियमित संचालन जारी रखा गया।
नौ मौतों के बाद एसआईटी की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई
अग्निकांड में नौ लोगों की मृत्यु होने के बाद, जिनमें पांच बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं, कोलकाता पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया है। इस टीम की कमान डिटेक्टिव विभाग के इंस्पेक्टर पृथ्वीराज भट्टाचार्य को सौंपी गई है। इस एसआईटी में एंटी राउडी स्क्वॉड, होमिसाइड स्क्वॉड, एंटी चीटिंग सेक्शन और न्यू मार्केट थाने के अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच टीम अब होटल की आधिकारिक मंजूरियों, फायर सेफ्टी एनओसी, इमारत के मूल डिजाइन में किए गए बदलावों और आग लगने के मूल कारणों की गहन जांच कर रही है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सस्ते किराए की अंधी दौड़ में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया था।



















