हवाई सफर के दौरान सुरक्षा नियमों की अनदेखी किस हद तक खतरनाक साबित हो सकती है, इसका एक डरावना मामला कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सामने आया है। कुआलालंपुर से आ रही मलेशिया एयरलाइंस की एक उड़ान जब अपनी मंजिल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार थी, तब अचानक एक गंभीर संकट पैदा हो गया। विमान को रनवे पर उतारने वाले मुख्य पायलट की आंखों के सामने अचानक अंधेरा छा गया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के चलते विमान में सवार सभी 159 यात्रियों की सांसें हलक में अटक गईं और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि पायलट की सूझबूझ और तत्परता से किसी बड़े हादसे को टाल लिया गया और बाद में विमान को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
लैंडिंग रोककर दोबारा हवा में उठानी पड़ी फ्लाइट
कुआलालंपुर से उड़ान भरकर कोलकाता पहुंचने वाली मलेशिया एयरलाइंस की इस फ्लाइट एमएच-184 ने जब अपनी तय ऊंचाई कम करते हुए रनवे की ओर बढ़ना शुरू किया, तभी कॉकपिट को निशाना बनाया गया। बाहरी हिस्से से एक बेहद तेज लेजर लाइट सीधे पायलट के केबिन के शीशे पर आकर पड़ी। यह रोशनी इतनी तीव्र थी कि पलक झपकते ही दोनों पायलट पूरी तरह डिसाइंट हो गए और उन्हें कुछ भी नजर आना बंद हो गया। ऐसे खतरनाक हालात में विमान को जमीन पर उतारना सैकड़ों यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान को सीधे तौर पर जोखिम में डालना होता। इसे भांपते हुए पायलट ने बिना एक पल गंवाए अपनी लैंडिंग को बीच में ही अबॉर्ट करने का समझदारी भरा फैसला लिया और विमान को एक बार फिर आसमान की तरफ खींच लिया।
लेजर लाइट के पीछे की वजह और जांच का दायरा
यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पायलट ने फौरन एयर ट्रैफिक कंट्रोल को स्थिति से अवगत कराया और आसमान में ही कुछ चक्कर लगाने का निर्णय लिया। कुछ देर बाद जब वह तेज लेजर बीम आनी बंद हुई, तब विमान को रात करीब 11:20 बजे पूरी सावधानी के साथ सुरक्षित लैंड कराया गया। जमीन पर उतरने के बाद एयरलाइंस के अधिकारियों और एयरपोर्ट पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों ने इस गंभीर सुरक्षा चूक की सूचना कोलकाता पुलिस को दी। तकनीकी जांच के दौरान यह बात सामने निकलकर आई कि पायलट को यह खतरनाक लेजर इंटरफेरेंस रनवे से लगभग आठ नॉटिकल मील दूर स्थित मध्यमग्राम-बारासात इलाके की तरफ से मिला था। एयरपोर्ट अधिकारियों की औपचारिक शिकायत के आधार पर कोलकाता एयरपोर्ट पुलिस ने इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली है और अब पुलिस उन अज्ञात लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने विमान पर यह लेजर बीम डाली थी।
एयरपोर्ट के आसपास लेजर लाइट का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित
कोलकाता एयरपोर्ट के डायरेक्टर विक्रम सिंह ने इस प्रकार की घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए बताया कि तेज लेजर लाइटों के कारण पायलटों को विजन ब्लर होने, भारी डिस्ट्रैक्शन और डिसाइंटेशन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि किसी भी विमान के सुरक्षित संचालन को ध्यान में रखते हुए हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्रों में लेजर लाइटों के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है। विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के संवेदनशील चरणों में इस तरह की हरकतें किसी बड़े विमान हादसे को न्योता दे सकती हैं। कोलकाता में इस तरह का यह कोई पहला वाकया नहीं है, क्योंकि इससे पहले साल 2025 की दुर्गा पूजा के दौरान भी श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब के पंडाल के पास इस्तेमाल की जा रही लेजर लाइटों के कारण विमानों की लैंडिंग में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद आयोजकों को वह लेजर शो बंद करना पड़ा था।



















