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कुकी विधायकों की इंफाल वापसी से मणिपुर विधानसभा सत्र की शुरुआत, शांति वार्ता की नई उम्मीद जगीमणिपुर
3 सित॰ 2026, 11:20 am (28 दिन पहले)· 2

कुकी विधायकों की इंफाल वापसी से मणिपुर विधानसभा सत्र की शुरुआत, शांति वार्ता की नई उम्मीद जगी

मणिपुर में तीन साल से जारी जातीय हिंसा के बाद पहली बार कुकी समुदाय के विधायकों ने इंफाल पहुँचकर विधानसभा की कार्यवाही में भाग लिया। मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने इस घटनाक्रम को राज्य में शांति और एकता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।

मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्य में हिंसा शुरू होने के तीन साल से भी अधिक समय बाद, कुकी समुदाय के जनप्रतिनिधियों ने इंफाल स्थित विधानसभा में व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति दर्ज कराई। बुधवार को शुरू हुए विधानसभा सत्र में कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) की ओर से सैकुल विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली विधायक किमनेओ हाओकिप हांगशिंग और सैतु सीट से निर्दलीय विधायक हाओखोलेट किपगेन सदन की कार्यवाही में शामिल हुए। कांगपोकपी जिले से आने वाले इन दोनों नेताओं का घाटी वाले इलाके में पहुँचना राज्य के मौजूदा हालात में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

डिजिटल उपस्थिति और सरकार का सकारात्मक दृष्टिकोण

इसी सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने वर्चुअल माध्यम से विधानसभा की बैठक में अपनी भागीदारी निभाई। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने सदन में विधायकों की मौजूदगी को राज्य में भाईचारे और शांति बहाली के लिए बेहद सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की यह पहल सराहनीय है और इसका व्यापक स्वागत होना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, सभी पक्षों के सामूहिक प्रयासों के जरिए ही मणिपुर को दोबारा शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न समुदायों के मध्य बने अविश्वास के माहौल को दूर करने के लिए राज्य सरकार लगातार कोशिशें कर रही है और संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में प्रतिबद्ध है।

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शीर्ष कुकी संगठन का बहिष्कार निर्देश और प्रशासनिक मांगें

यह कदम इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि कुकी समुदाय की शीर्ष संस्था कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) ने सत्र शुरू होने से ठीक पहले एक सख्त निर्देश जारी किया था। संगठन ने कुकी-जो समुदाय के सभी विधायकों को मेइती बाहुल्य वाले इंफाल शहर की यात्रा न करने की सलाह दी थी। इस बहिष्कार के पीछे संगठन का तर्क था कि कुकी-जो समाज के लिए एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग पर अब तक कोई ठोस राजनीतिक समझौता नहीं हो सका है। इसके बावजूद दोनों विधायकों का व्यक्तिगत रूप से विधानसभा पहुँचना एक नया मोड़ संकेत करता है। इससे पहले इसी वर्ष फरवरी माह में आयोजित मणिपुर विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कुकी-जो समुदाय के छह विधायकों ने डिजिटल माध्यम से कार्यवाही में भाग लिया था।

तीन वर्षों का संकट और जारी जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि

मणिपुर में जातीय संघर्ष की शुरुआत मई 2023 में हुई थी, जिसके बाद से ही राज्य दो मुख्य भौगोलिक एवं सामाजिक हिस्सों में विभाजित नजर आने लगा। इंफाल घाटी क्षेत्र में मेइती समुदाय की बहुलता है, जबकि आसपास के पहाड़ी जिलों में कुकी समुदाय की आबादी अधिक है। इन तीन वर्षों के दौरान भड़की हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों नागरिक अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर होकर विस्थापित हुए हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में विधायकों की यह उपस्थिति राज्य में सामान्य स्थिति की ओर लौटने की संभावनाओं को बल देती है।

सवाल-जवाब

मणिपुर विधानसभा सत्र में किस समुदाय के विधायक शामिल हुए?
मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के तीन साल बाद कुकी समुदाय के विधायकों ने इंफाल में विधानसभा सत्र की कार्यवाही में हिस्सा लिया।
विधानसभा में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने वाले विधायक कौन हैं?
केपीए की सैकुल विधायक किमनेओ हाओकिप हांगशिंग और सैतु सीट से निर्दलीय विधायक हाओखोलेट किपगेन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
किस संगठन ने विधायकों को इंफाल न जाने का निर्देश दिया था?
कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) संगठन ने कुकी-जो समुदाय के विधायकों को इंफाल की यात्रा न करने का निर्देश दिया था।
मणिपुर में जातीय हिंसा की शुरुआत कब हुई थी?
मणिपुर में मई 2023 में इंफाल घाटी के मेइती और पहाड़ी इलाकों के कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा की शुरुआत हुई थी।
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