मणिपुर में निर्दोष नागरिकों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर राज्य प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सुरक्षा तंत्र को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि हालिया हिंसक घटनाओं में संलिप्त पाए जाने वाले सक्रिय सशस्त्र गुटों की फौरन पहचान की जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में आगाह किया कि आम जनता के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले किसी भी समूह को गैरकानूनी घोषित किया जा सकता है और उनके विरुद्ध कड़े गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत कठोर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मंत्रिपोखरी में उच्च स्तरीय सुरक्षा समन्वय बैठक
यह महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान सामने आए। यह बैठक मंगलवार को मंत्रिपोखरी स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के कैबिनेट हॉल में संपन्न हुई, जिसमें राज्य की मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया गया। बैठक का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा प्रबंधों को पहले से अधिक मजबूत बनाना और हिंसा की घटनाओं पर प्रभावी रूप से रोक लगाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था।
बैठक की समाप्ति के उपरांत मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि सुरक्षा बलों को उन सभी सक्रिय सशस्त्र समूहों की पहचान करने का दायित्व सौंपा गया है, जिन पर हाल के दिनों में हुई हिंसक वारदातों में शामिल होने का संदेह है। इस निर्देश के तहत उन संगठनों को अलग रखा गया है जो वर्तमान समय में सरकार के साथ शांति वार्ता प्रक्रिया में शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों से कहा गया है कि वे इन समूहों की गतिविधियों की पड़ताल कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करें।
हिंसा में संलिप्त समूहों को गैरकानूनी घोषित करने की तैयारी
सशस्त्र संगठनों की भूमिका को लेकर युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर राज्य मंत्रिमंडल सख्त फैसले लेने के लिए बाध्य होगा। यदि किसी भी समूह की संलिप्तता निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा में सिद्ध होती है, तो राज्य कैबिनेट उस संगठन को औपचारिक रूप से गैरकानूनी घोषित करने पर विचार करेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी तत्व को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "नागरिक आबादी के खिलाफ हिंसा जारी रखने वाले किसी भी समूह के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।" उन्होंने साफ किया कि ऐसे संगठनों से निपटने के लिए यूएपीए के कड़े कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि शांति व्यवस्था भंग करने वालों पर नकेल कसी जा सके।
सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारी रहे मौजूद
मंत्रिपोखरी में हुई इस व्यापक सुरक्षा समन्वय बैठक में नागरिक प्रशासन, राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम, मुख्य सचिव राजीव सिंह ठाकुर, सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह तथा मणिपुर के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा राज्य के गृह आयुक्त और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) ने भी विचार-विमर्श में हिस्सा लिया।
सैन्य नेतृत्व की ओर से 3 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा में शामिल हुए। बैठक में असम राइफल्स के आईजीएआर (दक्षिण) और आईजीएआर (पूर्व), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के आईजी, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के डीआईजी तथा खुफिया ब्यूरो (आईबी) के संयुक्त निदेशक मौजूद थे। साथ ही सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और गृह विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों ने भी सुरक्षा खाके को सुदृढ़ करने पर अपनी राय रखी।
























