जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार को हुए आतंकवादी हमले में घायल दूसरे मजदूर की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। दक्षिण कश्मीर के केलम क्षेत्र स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे श्रमिकों पर आतंकवादियों ने अचानक अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी। इस हमले में घायल एक मजदूर ने शुक्रवार को ही अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था, जबकि दूसरे मजदूर की हालत गंभीर बनी हुई थी। शनिवार को उसकी मौत के साथ ही इस वारदात में जान गंवाने वाले मजदूरों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। मारे गए दोनों श्रमिक छत्तीसगढ़ राज्य के रहने वाले थे।
अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने शुक्रवार देर शाम केलम इलाके में स्थित ईंट-भट्ठे को अपना निशाना बनाया। आतंकवादियों की गोलीबारी में दो मजदूर गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इनमें से एक पीड़ित दीपक रात्रे की हालत बेहद नाजुक थी और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। दूसरे घायल मजदूर बोपिंदर को तुरंत राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अनंतनाग ले जाया गया। वहां उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें सौरा स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल रेफर कर दिया। शनिवार को डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद बोपिंदर की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
पहचान पूछकर की गई गोलीबारी
सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हमले के शिकार हुए दोनों मजदूरों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी और वे अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए छत्तीसगढ़ से घाटी आए थे। जांच में यह बात सामने आई है कि आतंकवादी ने हमला करने से पहले मजदूरों का धर्म पूछा और उन्हें अलग करने के बाद गोलियां मारीं। इस जघन्य घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और सुरक्षा बलों ने हमलावरों को पकड़ने के लिए क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है।
लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी लतीफ हमले में शामिल
शुरुआती छानबीन के बाद अधिकारियों ने बताया है कि इस आतंकी वारदात के पीछे प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है। लश्कर के ही आतंकवादी लतीफ ने इस घटना को अंजाम दिया है। जम्मू-कश्मीर में बीते 10 दिनों के भीतर आतंकवादियों द्वारा आम नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाए जाने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इस हमले से लगभग 10 दिन पहले अनंतनाग शहर में भी आतंकवादियों ने एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पिछले दस दिनों में घाटी में आतंकियों की गोलियों से तीन लोगों की जान जा चुकी है।
घाटी में पहले भी निशाना बने हैं प्रवासी मजदूर
कश्मीर घाटी में बाहरी राज्यों से आए निर्दोष मजदूरों को निशाना बनाए जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले साल 2024 में भी ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में आतंकवादियों ने दो प्रवासी मजदूरों की हत्या कर दी थी। 7 फरवरी 2024 को पंजाब के रहने वाले दो मजदूरों, अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह को श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में एक आतंकवादी ने बेहद करीब से गोली मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी। लगातार हो रहे ऐसे लक्षित हमलों ने घाटी में काम कर रहे गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



















