राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दीवाली का त्योहार इस बार गहरे प्रदूषण के साये के बीच मनाया जा रहा है। रविवार की शाम जैसे-जैसे आसमान में पटाखों की गूंज और रोशनी तेज हुई, ठीक उसी तरह शहर की हवा भी तेजी से जहरीली होती चली गई। उत्सव के इस उल्लास के बीच राजधानी की आबोहवा बेहद चिंताजनक स्थिति में जा पहुंची है। शाम के सात बजते-बजते दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 371 के आंकड़े को छू गया, जिसे पर्यावरण मानकों के हिसाब से बहुत खराब श्रेणी में गिना जाता है।
पटाखों से निकलने वाले घने धुएं और प्रदूषण के भारी गुबार ने शहर के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे चहुंओर धुंध की एक मोटी परत छा गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शहर के तमाम हिस्सों से लोगों ने हवा में लगातार आ रही धुएं की तीखी गंध और कम होती दृश्यता को लेकर अपनी चिंताएं और शिकायतें खुलकर साझा कीं। दीवाली की जगमगाहट और उमंग के बीच इस विकराल होते प्रदूषण ने आम जनता की मुश्किलें और बेचैनी दोनों को काफी बढ़ा दिया है।
जहांगीरपुरी में AQI 460 तक पहुंचा, 19 केंद्रों पर हालात बेहद गंभीर
राजधानी भर में हवा की सेहत पर नजर रखने वाले कुल 59 निगरानी केंद्रों से सामने आए आंकड़े बेहद डरावने हैं। शाम के सात बजने तक शहर के 19 अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सीधे तौर पर गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। इसके अलावा, शहर के सात केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता खराब आंकी गई, जबकि शेष 33 केंद्रों पर यह बहुत खराब स्थिति में बनी रही। प्रदूषण के इस तांडव में जहांगीरपुरी का इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां AQI का स्तर सर्वोच्च यानी 460 तक जा पहुंचा।
बीते रविवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 376 दर्ज किया गया था, जबकि इसके ठीक एक दिन पहले यानी शनिवार को यह आंकड़ा 369 पर था। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि महज चौबीस घंटों के भीतर प्रदूषण के स्तर में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है, जिससे स्थिति सुधरने के बजाय लगातार बदतर होती जा रही है।
सोमवार को हवा के और ज्यादा जहरीले होने की आशंका
दिल्ली के पर्यावरण हालात का आकलन करने वाली वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने आने वाले दिनों को लेकर चेतावनी जारी की है। इसके अनुसार, 9 नवंबर से शुरू होकर अगले कुछ दिनों तक राष्ट्रीय राजधानी में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में ही बनी रहने की पूरी आशंका है। पर्यावरण जानकारों का मानना है कि इस भयंकर प्रदूषण के पीछे केवल दीवाली के पटाखे ही नहीं, बल्कि सड़कों पर दौड़ते वाहनों का धुआं और पड़ोसी राज्यों में खेतों में जलाई जा रही पराली का चरम दौर भी मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
इसके अलावा, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां भी इस जहर को हवा में छंटने से रोक रही हैं, क्योंकि हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषित कण वातावरण के निचले हिस्से में ही फंसे रहते हैं। ऐसे में दीवाली का यह जश्न बीत जाने के बाद भी दिल्ली के बाशिंदों को लंबे समय तक प्रदूषण की एक बेहद गंभीर और कठिन चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, जिससे राहत के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।



















