कानपुर और लखनऊ के बीच सफर करने वाले हजारों दैनिक यात्रियों को एक बड़ा झटका लगा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने हाल ही में चालू हुए कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स की दरों में अचानक बढ़ोतरी कर दी है। सबसे हैरानी की बात यह है कि टोल की कीमतों में यह इजाफा एक्सप्रेसवे के शानदार उद्घाटन के महज आठ दिन बाद ही लागू कर दिया गया है। जो यात्री उत्तर प्रदेश के इन दो सबसे बड़े शहरों के बीच जाम-मुक्त और तेज सफर का आनंद लेने लगे थे, उन्हें अब इस सुविधा के लिए अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी।
उद्घाटन के तुरंत बाद यात्रा हुई महंगी
बहुप्रतीक्षित कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का 13 जुलाई को बेहद भव्य तरीके से लोकार्पण किया गया था। इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। इस नए एलिवेटेड रास्ते के शुरू होने से कानपुर और लखनऊ के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आई है और लोगों को पुराने रास्ते पर लगने वाले भयंकर ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है। लोगों ने इस तेज और सुगम सफर का भारी उत्साह के साथ स्वागत किया था, लेकिन शुरू होने के एक हफ्ते के भीतर ही एनएचएआई द्वारा टोल दरें बढ़ाने के फैसले ने यात्रियों की इस खुशी को थोड़ा फीका कर दिया है।
जानें किस वाहन के लिए कितना बढ़ा टोल
एनएचएआई द्वारा जारी की गई नई और संशोधित सूची के अनुसार, टोल प्लाजा से गुजरने वाले विभिन्न वाहनों की श्रेणी के आधार पर दरों में 5 रुपये से लेकर 80 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगर निजी हल्के वाहनों की बात करें, जिनमें कार, जीप और वैन शामिल हैं, तो इनके लिए एक तरफ के सफर का टोल 5 रुपये बढ़ा दिया गया है। कार चालकों को अब एक तरफ के लिए 285 रुपये की जगह 290 रुपये चुकाने होंगे। वहीं, अगर आप दोनों तरफ (आने-जाने) की यात्रा एक साथ करते हैं, तो यह खर्च 425 रुपये से बढ़कर 440 रुपये हो गया है।
हल्के व्यावसायिक वाहनों और मिनी बसों को भी इस महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। इन वाहनों के लिए एक तरफ का टोल 460 रुपये से बढ़ाकर 470 रुपये कर दिया गया है, जबकि आने-जाने का कुल टोल 685 रुपये से बढ़ाकर 710 रुपये तय किया गया है। इसके अलावा, बड़े व्यावसायिक वाहनों और भारी ट्रकों के लिए भी उनकी श्रेणी और एक्सल के हिसाब से टोल दरों में आनुपातिक रूप से वृद्धि की गई है, जिससे इस अहम रूट पर माल ढुलाई का खर्च भी काफी बढ़ जाएगा।
दैनिक यात्रियों और व्यापारियों की जेब पर भारी असर
टोल दरों में हुए इस अचानक संशोधन का सीधा और सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो हर दिन काम के सिलसिले में कानपुर और लखनऊ के बीच अप-डाउन करते हैं। बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, निजी कंपनियों के नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, उद्योगपति और छात्र इस नए एक्सप्रेसवे को अपनी दैनिक दिनचर्या का अहम हिस्सा बना चुके हैं। यात्रियों का स्पष्ट रूप से मानना है कि एक्सप्रेसवे निश्चित रूप से उनके कीमती समय की बचत करता है और ईंधन भी बचाता है, लेकिन शुरुआत के कुछ ही दिनों के भीतर इस तरह टोल बढ़ाना एक अनावश्यक आर्थिक बोझ की तरह लगता है। कई दैनिक यात्रियों का कहना है कि इतने कम समय में मासिक यात्रा खर्च का बढ़ जाना उन्हें निराश कर रहा है।
एनएचएआई का तर्क और हरदोई रूट पर भी असर
इस अचानक हुई बढ़ोतरी पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया है कि दरों में यह बदलाव पूरी तरह से एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, टोल दरों को संशोधित करने का प्रस्ताव एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से काफी पहले ही मुख्यालय को भेजा जा चुका था। उनका कहना है कि नई दरें तय नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं के तहत ही लागू की गई हैं और यह कोई अचानक लिया गया मनमाना फैसला नहीं है। सिर्फ कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे ही नहीं, बल्कि एनएचएआई ने लखनऊ-हरदोई हाईवे पर भी टोल की नई और बढ़ी हुई दरें लागू कर दी हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि राजधानी से जुड़े कई प्रमुख मार्गों पर अब बेहतरीन सड़कों का सफर यात्रियों को पहले से ज्यादा महंगा पड़ने वाला है।



















