इन दिनों देश भर में अल नीनो की चर्चाओं के बीच मौसम ने एक नया रुख अख्तियार कर लिया है। जानकारों के अनुसार प्रशांत महासागर में सक्रिय यह मौसमी परिघटना मानसूनी गतिविधियों को कमजोर करने के लिए जानी जाती है, जिसके कारण सूखे और जलसंकट की आशंकाएं जताई जा रही थीं। हालांकि बंगाल की खाड़ी से उठ रहे लगातार नए सिस्टम इस प्रभाव को काफी हद तक बेअसर कर रहे हैं, जिससे देश के बड़े हिस्से में बादलों का डेरा बना हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 7 दिनों तक देश के विभिन्न इलाकों में बारिश का दौर बदस्तूर जारी रहने की उम्मीद है, जिससे कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात और गंभीर हो सकते हैं।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार दक्षिण-प्रश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र का असर साफ दिखाई दे रहा है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम इलाकों में भारी से बहुत भारी मानसूनी बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है। विशेष तौर पर उत्तराखंड में लगातार कई दिनों तक तेज बारिश का अनुमान जताया गया है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा मैदानी इलाकों में भी जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
मध्य और पूर्वी भारत में झमाझम का दौर
मध्य प्रदेश के दोनों हिस्सों यानी पश्चिमी और पूर्वी भागों में भी आने वाले दिनों में झमाझम बारिश होने के संकेत दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में भी समय-समय पर बादलों की गर्जना के साथ तेज मानसूनी गतिविधियां दर्ज की जाएंगी। पूर्वी भारत की बात करें तो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में आगामी 12 सितंबर तक लगातार बारिश का अनुमान है। खासकर बिहार और गंगीय पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी व्यक्त की गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।
पूर्वोत्तर और पश्चिमी तटों का हाल
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी आने वाले एक सप्ताह तक मानसूनी मेहरबानी बनी रहने की उम्मीद है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय समेत अन्य पूर्वोत्तर क्षेत्रों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है। दूसरी ओर पश्चिमी तटों की बात करें तो कोंकण और गोवा के इलाकों में लगातार बारिश का अनुमान है, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं। इसके विपरीत दक्षिण भारत के अधिकांश areas में अगले कुछ दिनों तक मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर बनी रहने की संभावना जताई गई है।


















