झारखंड की राजधानी रांची में कारीगर एक ऐसा सलवार सूट और साड़ी बना रहे हैं, जिसका वजन महज 100 ग्राम तक होता है, फिर भी बाजार में इसकी कीमत ₹10,000 तक पहुंच जाती है. यह कपड़ा बांस के रेशे से हाथ से बुने गए धागों से तैयार होता है और इसकी सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह सर्दी में शरीर को गर्माहट देता है और गर्मी में ठंडक का अहसास कराता है. रांची में इसे खास तरीके से तैयार करने वाले कारीगर का नाम है मोहम्मद सिराज.
बांस के धागे से बनी गर्माहट, हल्केपन की मिसाल
ठंड के मौसम में इस बांस के कपड़े की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि यह प्राकृतिक तरीके से शरीर को गर्म रखता है. देखने में भी यह काफी खूबसूरत, बेहतरीन क्वालिटी का और बाजार में मिलने वाले आम कपड़ों से बिल्कुल अलग नजर आता है. मोहम्मद सिराज बताते हैं कि रांची में उनका अपना कारखाना है, जहां वे खुद अपनी टीम के साथ इसे तैयार करते हैं, और इस कारोबार से उन्हें अच्छी खासी कमाई भी हो जाती है. उनका कहना है कि जो ग्राहक एक बार यह कपड़ा खरीद लेता है, वह उसका दीवाना हो जाता है और दोबारा इसे ही खोजते हुए वापस आता है. इसकी सबसे बड़ी वजह इसका जबरदस्त हल्कापन है, इसे पहनने पर एहसास होता है मानो शरीर पर कुछ है ही नहीं, फिर भी यह रुई जितना मुलायम और आरामदायक लगता है. सिराज के मुताबिक, यह खासियत बांस के धागे की प्राकृतिक बुनावट से ही आती है, जिसे किसी और रेशे से हासिल करना मुश्किल है.
कुर्ती और सलवार सूट पर सोहराय-वर्ली पेंटिंग
इन सलवार सूट और साड़ियों की एक और बड़ी खासियत यह है कि इन पर हाथ से सोहराय और वर्ली शैली की पारंपरिक पेंटिंग बनाई जाती है. यह पेंटिंग कुर्ती और सलवार सूट की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है और इन्हें बाजार में मिलने वाले आम परिधानों से बिल्कुल अलग पहचान देती है. झारखंड की इन दोनों पारंपरिक कला शैलियों को कपड़ों पर उकेरकर कारीगर स्थानीय संस्कृति को भी आगे बढ़ा रहे हैं.
तैयार होने में 3 से 4 दिन, कीमत ₹1,200 से ₹10,000 तक
एक सलवार सूट या साड़ी को तैयार करने में 4 से 5 कारीगरों को तीन से चार दिन का समय लगता है. इसकी वजह यह है कि पूरा काम बेहद बारीकी से किया जाता है और इसमें मशीन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता. चाहे कपड़े पर पेंटिंग बनानी हो या फिर पूरा सलवार सूट सिलना हो, हर काम पूरी तरह हाथ से ही किया जाता है. इसी वजह से इसे तैयार करने में समय भी ज्यादा लगता है और सामान्य कपड़ों के मुकाबले इसका दाम भी अधिक हो जाता है. इसकी कीमत ₹1,200 से शुरू होकर ₹10,000 तक पहुंच जाती है, जो कि डिजाइन, मेहनत और पेंटिंग की बारीकी पर निर्भर करती है.
पुरुषों के लिए भी कपड़े, देशभर से आती है मांग
मोहम्मद सिराज बताते हैं कि उनके यहां सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी बांस के धागे से कपड़े सिलवाए जाते हैं, जिसमें फुल पैंट और शर्ट शामिल हैं. उनके मुताबिक बांस से बने इन कपड़ों के ग्राहक पूरे भारत में मौजूद हैं, और कई बार मांग इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि यह कलेक्शन स्टॉक में ही नहीं बचता. यही वजह है कि रांची का यह छोटा-सा कारखाना अब देशभर के ग्राहकों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुका है.


















