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मध्य प्रदेश के रहली क्षेत्र में ₹60 करोड़ की टू-लेन सड़क मंजूर, 12 गांवों के लिए रानगिर तीर्थ की राह होगी सुगममध्य प्रदेश
14 अग॰ 2026, 6:53 pm (75 दिन पहले)· 3

मध्य प्रदेश के रहली क्षेत्र में ₹60 करोड़ की टू-लेन सड़क मंजूर, 12 गांवों के लिए रानगिर तीर्थ की राह होगी सुगम

सागर जिले की रहली विधानसभा में 60 करोड़ रुपये की लागत से 22 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़क का निर्माण होगा। इससे करीब 10 से 12 ग्रामीण इलाकों में आवागमन सुगम होगा और रानगिर तीर्थ पहुंचना आसान हो जाएगा।

मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहली विधानसभा में ग्रामीण अवसंरचना को मजबूती देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। क्षेत्र में 60 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से लगभग 22 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह मार्ग रहली से शुरू होकर रामखिरिया, सिमरिया नायक और बहेरिया मढ़ी तक बनेगा। इस निर्माण कार्य से न केवल एक दर्जन के करीब गांवों को निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रसिद्ध रानगिर तीर्थ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी सफर काफी सहज हो जाएगा। डीपीआर तैयार होने और प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद अब टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर अग्रसर है।

दुर्गम ग्रामीण इलाकों में मानसून की चुनौतियां और स्वास्थ्य संकट

भौगोलिक दृष्टिकोण से सागर मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला माना जाता है, जिसके अंतर्गत 2000 से अधिक गांव आते हैं। इसके बावजूद कई दूरस्थ, वनांचल और पहाड़ी इलाकों से सटे ग्रामीण क्षेत्र लंबे समय से मूलभूत इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी झेल रहे हैं। मानसून के दिनों में स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है, जब बारिश के कारण कच्चे रास्ते बह जाते हैं और ये गांव मुख्य शहरी केंद्रों से पूरी तरह कट जाते हैं।

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सड़क संपर्क ठप होने से ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित होता है। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक उनकी पहुंच सीमित हो जाती है। कई आपातकालीन स्थितियों में एम्बुलेंस का गांवों तक पहुंचना असंभव हो जाता है, जिसके चलते परिजनों को मरीजों को खाट पर लादकर कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में सड़क संजाल का योजनाबद्ध विस्तार

बुंदेलखंड के प्रमुख केंद्र सागर में इस बुनियादी समस्या के समाधान के लिए व्यापक स्तर पर सड़कों का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को तहसील मुख्यालयों, जिला मुख्यालय और राज्य व राष्ट्रीय राजमार्गों से सीधे जोड़ना है। वर्तमान में जिले भर में दर्जनों सड़कों पर काम चल रहा है।

स्थानीय जन प्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से वंचित क्षेत्रों की समस्याओं को जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा रहा है। प्रशासनिक तालमेल के जरिए नई परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार कर निर्माण कार्यों को गति दी जा रही है ताकि दूरदराज के लोग भी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।

रहली सड़क परियोजना की मुख्य विशेषताएं और मार्ग योजना

स्वीकृत 22 किलोमीटर लंबी टू-लेन सड़क निर्माण पर 60 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह मार्ग रहली से प्रारंभ होकर रामखिरिया, सिमरिया नायक और बहेरिया मढ़ी तक पहुंचेगा। इस रूट के दायरे में लगभग 10 से 12 गांव आएंगे, जो सीधे तौर पर रहली तहसील मुख्यालय से जुड़ जाएंगे।

रानगिर तीर्थ स्थल तक जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह मार्ग एक प्रमुख विकल्प बनेगा। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है और सक्षम प्राधिकारी से प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल गई है। वर्तमान में जारी टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

सामाजिक और आर्थिक समृद्धि का नया मार्ग

इस टू-लेन सड़क के बन जाने से प्रभावित गांवों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई बयार बहने की उम्मीद है। आल-वेदर रोड मिलने से कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे किसानों की आय में सुधार होगा। इसके अलावा, छात्रों के लिए शिक्षण संस्थानों तक पहुंचना और ग्रामीणों के लिए समय पर चिकित्सा सेवाएं प्राप्त करना संभव हो सकेगा। ऑल-वेदर कनेक्टिविटी मिलने से यह पूरा क्षेत्र समृद्धि और विकास की ओर तेजी से कदम बढ़ाएगा।

सवाल-जवाब

रहली में बनने वाली इस नई सड़क की कुल लागत कितनी है?
इस टू-लेन सड़क परियोजना की कुल अनुमानित निर्माण लागत 60 करोड़ रुपये तय की गई है।
सड़क की लंबाई कितनी होगी और यह किन प्रमुख स्थानों को जोड़ेगी?
यह सड़क लगभग 22 किलोमीटर लंबी होगी, जो रहली से शुरू होकर रामखिरिया, सिमरिया नायक और बहेरिया मढ़ी तक जाएगी।
इस निर्माण कार्य से कितने गांवों को सीधा फायदा मिलेगा?
इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र के लगभग 10 से 12 गांवों को सीधी सड़क कनेक्टिविटी मिलेगी।
परियोजना की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति क्या है?
सड़क की डीपीआर (DPR) तैयार हो चुकी है, प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है और फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है।
बारिश के दौरान इस क्षेत्र के लोगों को क्या परेशानियां आती थीं?
सड़क न होने के कारण बारिश में गांव शहरों से कट जाते थे, जिससे मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता था।
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