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महाराष्ट्र के जलगांव में दर्दनाक सड़क हादसा, कंटेनर की टक्कर से कार सवार तीन युवकों की गई जानमहाराष्ट्र
19 अक्तू॰ 2026, 10:34 am (8 दिन पहले)· 0

महाराष्ट्र के जलगांव में दर्दनाक सड़क हादसा, कंटेनर की टक्कर से कार सवार तीन युवकों की गई जान

जलगांव के बंभोरी फ्लाईओवर पर सामने से आ रहे कंटेनर ने एक कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में झुरखेड़े गांव निवासी तीन चचेरे भाइयों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

महाराष्ट्र के जलगांव जिले में बंभोरी फ्लाईओवर पर रविवार देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना उस वक्त हुई जब तेज रफ्तार से आ रहे एक भारी कंटेनर ने सामने से एक कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार पूरी तरह से चकनाचूर हो गई, जबकि कंटेनर भी फ्लाईओवर की रेलिंग तोड़कर नीचे गिरने से बाल-बाल बचा। इस हादसे ने तीन परिवारों के इकलौते और मुख्य सहारा छीन लिए हैं।

मेले से लौटते समय हुआ हादसा

दुर्घटना का शिकार हुए युवक भुसावल के पास स्थित वनोली गांव में चल रही देवी यात्रा में अपने एक रिश्तेदार को पहुंचाने गए थे। वहां से लौटने के बाद वे जलगांव शहर की तरफ आए और फिर धरणगांव तालुका में स्थित अपने पैतृक गांव झुरखेड़े के लिए रवाना हुए। रात लगभग 9:30 बजे जैसे ही उनकी कार बंभोरी पुल पर पहुंची, विपरीत दिशा से आ रहे तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें सीधी टक्कर मार दी। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन कार के अंदर मौजूद तीनों युवकों की सांसें तब तक थम चुकी थीं।

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मृतक आपस में थे रिश्तेदार

इस हादसे में जान गंवाने वाले युवकों की पहचान पंकज प्रकाश चौधरी, हरीश हिम्मत चौधरी और रवींद्र अरुण चौधरी के रूप में हुई है। इन तीनों युवकों की उम्र 28 से 32 वर्ष के बीच थी। ये तीनों आपस में करीबी रिश्तेदार थे और अपने-अपने परिवारों में आजीविका चलाने वाले मुख्य सदस्य थे। एक साथ तीन नौजवान बेटों के चले जाने से उनके पैतृक गांव झुरखेड़े में मातम छा गया है। हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

अस्पताल में परिजनों का विलाप

हादसे के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से तीनों शवों को जलगांव स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। दुर्घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और मृतकों के रिश्तेदार अस्पताल परिसर में जमा हो गए। अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। रिश्तेदारों के लिए इस भयावह सच को स्वीकार करना बेहद मुश्किल हो रहा था कि कुछ घंटे पहले हंसते-खेलते घर से निकले युवक अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।

हाईवे पर लगातार बढ़ रहे हैं हादसे

इस दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग और बाईपास पर वाहनों की बेलगाम रफ्तार तथा सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पलाधी और तरसोद बाईपास पर चल रहे मरम्मत और निर्माण कार्यों के कारण मार्ग पर यातायात लगातार प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार मरम्मत कार्य के चलते अक्सर डायवर्जन और संकरी सड़कों की स्थिति बन जाती है, जहां भारी वाहन अत्यधिक गति से दौड़ते हैं। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान इस क्षेत्र में कई बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

सवाल-जवाब

जलगांव में यह भीषण सड़क हादसा कहां और कब हुआ?
यह दुर्घटना महाराष्ट्र के जलगांव जिले में बंभोरी फ्लाईओवर पर रविवार रात करीब 9:30 बजे हुई।
हादसे में जान गंवाने वाले युवक कौन थे?
मृतकों की पहचान पंकज प्रकाश चौधरी, हरीश हिम्मत चौधरी और रवींद्र अरुण चौधरी के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 28 से 32 वर्ष के बीच थी।
दुर्घटना के समय युवक कहां से आ रहे थे?
वे भुसावल के वनोली में देवी मेले के लिए एक रिश्तेदार को छोड़कर अपने गांव झुरखेड़े (धरणगांव तालुका) वापस लौट रहे थे।
क्या इस इलाके में पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं हुई हैं?
हां, पलाधी-तरसोद बाईपास पर चल रहे मरम्मत कार्य और तेज रफ्तार वाहनों के कारण पिछले कुछ दिनों में कई लोगों की जान जा चुकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·7 दिन पहले

तीन घरों के इकलौते कमाने वाले इस तरह चले गए, परिवार कैसे संभलेगा? हाईवे पर इन लापरवाह भारी वाहनों पर लगाम कब लगेगी?

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

हादसों का यह सिलसिला अब बहुत डराने लगा है। मेला देखकर लौट रहे तीन परिवारों के इकलौतेसहारे इस तरह चले गए, सोचकर ही कलेजा कांप उठता है। हाईवे पर तेज रफ्तार और लापरवाही कब तक यूं ही घरों के चिराग बुझाती रहेगी?

Priya Sharma@priya-sharma·7 दिन पहले

रवि जी, सच में कलेजा कांप उठता है। क्या इन फ्लाईओवर्स पर तेज रफ्तार भारी वाहनों की गति रोकने के लिए कोई कैमरे या चेकिंग नहीं होती?

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

इन तीनों चचेरे भाइयों की मौत की खबर देखकर सचमुच दिल बैठ गया। कुछ साल पहले जब मैं अपने पैतृक गांव जा रहा था, तब रात के वक्त ऐसे ही एक तेज रफ्तार ट्रक को देखकर रूह कांप गई थी। मेले से खुशी-खुशी लौट रहे घरों के चिराग इस तरह बुझ जाना वाकई बहुत दर्दनाक है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। रात के वक्त हाईवे पर ये अनियंत्रित ट्रक किसी काल से कम नहीं लगते, और भुगतना हमेशा बेकसूर परिवारों को ही पड़ता है।

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