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महासमुंद के झालखम्हरिया में 9 ग्रामीण किडनी बीमारी की चपेट में, स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चाछत्तीसगढ़
1 सित॰ 2026, 10:35 pm (23 दिन पहले)· 2

महासमुंद के झालखम्हरिया में 9 ग्रामीण किडनी बीमारी की चपेट में, स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चा

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 9 ग्रामीणों में किडनी की समस्या मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। गांव में दो दिवसीय जांच शिविर लगाने के साथ 16 पानी के सैंपल लैब भेजे गए हैं।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित ग्राम पंचायत झालखम्हरिया से स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क करने वाली खबर आई है, जहां अचानक 9 ग्रामीण किडनी से संबंधित बीमारियों से पीड़ित पाए गए हैं। एक साथ इतने मरीजों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित ग्रामीण क्षेत्र में तुरंत विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने के साथ ही बीमारी के पीछे के सटीक कारणों की पड़ताल के लिए बहुकोणीय जांच अभियान शुरू कर दिया गया है।

डोर टू डोर मेडिकल सर्वे और दो दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का संचालन

क्षेत्र में बीमारी के फैलाव को समझने और नए मरीजों की पहचान करने के उद्देश्य से झालखम्हरिया के ग्राम पंचायत भवन में दो दिवसीय विशेष मेडिकल कैंप का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ग्रामीणों का शारीरिक परीक्षण कर रही है। चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर मरीजों के खून और पेशाब के सैंपल जांच के लिए एकत्रित किए जा रहे हैं। शिविर के साथ ही स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का एक दल गांव के हर घर में जाकर डोर टू डोर अभियान चला रहा है। इस सर्वे के माध्यम से प्रत्येक परिवार के सदस्यों की पिछली बीमारियों, जीवनशैली और नियमित दवाओं की विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री जुटाई जा रही है।

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बीमारी के पीछे के संभावित चिकित्सीय और वातावरणीय कारणों की जांच

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि गुर्दे की कार्यप्रणाली प्रभावित होने के पीछे कई मुख्य कारण हो सकते हैं। बिना किसी डॉक्टरी परामर्श के लंबे समय तक या अधिक मात्रा में दर्द निवारक (पेनकिलर) गोलियों का सेवन करना किडनी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), मधुमेह (डायबिटीज या शुगर) और पीने का दूषित पानी भी किडनी खराब होने के बड़े कारक माने जाते हैं। इसी वजह से जांच टीम ग्रामीणों द्वारा पूर्व में इस्तेमाल की गई दवाओं, उनकी पुरानी बीमारियों और दैनिक खान-पान के पैटर्न का गहरा अध्ययन कर रही है।

पीएचई विभाग द्वारा 16 जल नमूनों का परीक्षण और आपात सेवाएं

पेयजल में किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायन या प्रदूषण की संभावना को परखने के लिए पीएचई (PHE) विभाग की टीम ने गांव के 16 अलग-अलग जल स्रोतों से पानी के सैंपल एकत्र किए हैं। इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने पर जल गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जांच रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर ही मरीजों के लिए सटीक उपचार योजना तैयार की जाएगी और जिन मरीजों की स्थिति गंभीर होगी, उन्हें उच्च स्तर के विशेषज्ञ अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। ग्रामीणों को तात्कालिक चिकित्सा सहायता देने के लिए गांव में एक पीएम जनमन वाहन भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने क्षेत्र के सभी निवासियों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य शिविर में पहुंचकर अपनी नि:शुल्क जांच कराएं और किसी भी प्रकार की शारीरिक अस्वस्थता महसूस होने पर तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

सवाल-जवाब

महासमुंद के झालखम्हरिया गांव में क्या मामला सामने आया है?
झालखम्हरिया गांव में अचानक 9 ग्रामीणों में किडनी से जुड़ी बीमारी के लक्षण मिले हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच और इलाज का अभियान शुरू किया है।
स्वास्थ्य विभाग ने गांव में क्या कदम उठाए हैं?
ग्राम पंचायत भवन में दो दिवसीय स्वास्थ्य शिविर लगाया गया है और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम डोर टू डोर जाकर मेडिकल हिस्ट्री जुटा रही है।
पानी की जांच के लिए क्या किया गया है?
पीएचई विभाग ने पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए गांव के विभिन्न स्रोतों से 16 नए पानी के सैंपल लिए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार किडनी की समस्या के संभावित कारण क्या हैं?
डॉक्टरों का कहना है कि दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक सेवन, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दूषित पानी इसके संभावित कारण हो सकते हैं।
गांव में आपातकालीन चिकित्सा के लिए क्या सुविधा दी गई है?
ग्रामीणों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं और चिकित्सा सहायता देने के लिए गांव में पीएम जनमन वाहन तैनात किया गया है।
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