हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ग्रामीण इलाकों से दो अत्यंत दुखद घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें पांच लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई। पहली दुर्घटना घणाहट्टी के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई, जहां हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) की एक बस और एक निजी ऑल्टो कार के बीच जोरदार टक्कर हो गई। इस सड़क हादसे में कार में सवार एक ही परिवार के तीन लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि वाहन चला रहा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।
अस्पताल से घर लौटते समय घंडल-सोलह मील के पास हुआ हादसा
मिली जानकारी के मुताबिक, फांजी गांव का यह परिवार गुरुवार की सुबह स्वास्थ्य जांच और दवा लेने के लिए शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) आया हुआ था। अस्पताल में डॉक्टरों से परामर्श लेने और दवाइयां प्राप्त करने के बाद, परिवार के चारों सदस्य अपनी कार से वापस अपने घर घणागुघाट की ओर लौट रहे थे। वाहन में दो पुरुष और दो महिलाएं सवार थीं।
जैसे ही उनकी कार घंडल और सोलह मील के बीच स्थित तीखे मोड़ के पास पहुंची, सामने से आ रही एचआरटीसी बस के साथ उसकी भीषण टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कार चला रहे युवक के माता, पिता और दादी की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। गंभीर रूप से जख्मी युवक को स्थानीय राहगीरों और पुलिस की मदद से तुरंत आईजीएमसी अस्पताल शिमला पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। एक ही झटके में माता-पिता और दादी को खो देने से युवक पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त है।
ओवरस्पीड और ओवरटेकिंग को माना जा रहा प्रारंभिक कारण
दुर्घटना के कारणों को लेकर जुटाए गए प्राथमिक विवरण के अनुसार, यह हादसा दोनों वाहनों में से किसी एक की तेज रफ्तार और आगे निकलने के दौरान नियंत्रण खोने के चलते हुआ। हालांकि, मोड़ पर हुई इस टक्कर में वास्तविक लापरवाही किस चालक की थी, इसकी पूरी तस्वीर पुलिस की विस्तृत तकनीकी जांच और गवाहों के बयानों के बाद ही साफ हो पाएगी। पुलिस टीम ने दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
चोपाल के टेलर गांव में दो सगी बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
जिले से जुड़ी दूसरी हृदयविदारक घटना शिमला के चोपाल उपमंडल अंतर्गत आने वाले टेलर गांव की है। यहां जितेंद्र चौहान की दो मासूम बेटियां, जिनकी उम्र 11 वर्ष और 8 वर्ष थी, 20 सितंबर को अपने घर के कमरे में अचानक अचेत अवस्था में पाई गईं। परिजनों ने जब दोनों बच्चियों को बेसुध देखा तो हड़कंप मच गया और उन्हें फौरन नजदीकी ट्यूनी अस्पताल ले जाया गया।
दोनों बहनों की नाजुक स्थिति को देखते हुए ट्यूनी के चिकित्सकों ने उन्हें रोहरू अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी स्वास्थ्य में सुधार न होने पर दोनों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए शिमला के आईजीएमसी अस्पताल भेजा गया। मेडिकल कॉलेज में गहन चिकित्सा के बावजूद दोनों बच्चियों ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन द्वारा पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों बहनों के पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिए गए हैं।
सर्पदंश की आशंका, विसरा रिपोर्ट का इंतजार
नेरवा के नायब तहसीलदार कुश कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक परिस्थितियों और लक्षणों को देखते हुए अंदेशा जताया जा रहा है कि दोनों बहनों की मृत्यु जहरीले सांप के डसने के कारण हुई है। प्रशासन का कहना है कि मौत की सटीक और आधिकारिक वजह पोस्टमार्टम और विसरा जांच की विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। एक साथ दो बेटियों की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।



















