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माजुली में नए हवाई अड्डे के निर्माण की तैयारी तेज, AAI विशेषज्ञ टीम ने पूरा किया पहला सर्वेअसम
18 अग॰ 2026, 11:41 pm (43 दिन पहले)· 1

माजुली में नए हवाई अड्डे के निर्माण की तैयारी तेज, AAI विशेषज्ञ टीम ने पूरा किया पहला सर्वे

असम के नदी द्वीप माजुली में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए एएआई की छह सदस्यीय टीम ने जेंगराईमुख से कमलाबारी दरबार चापोरी तक जमीन और कनेक्टिविटी का शुरुआती सर्वे पूरा किया है।

असम के प्रसिद्ध नदी द्वीप माजुली को हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हो गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के विशेषज्ञों के एक विशेष दल ने द्वीप पर प्रस्तावित नए हवाई अड्डे के लिए शुरुआती सर्वेक्षण और जमीन की समीक्षा का काम पूरा कर लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीपों में शामिल माजुली को देश के विमानन मानचित्र पर लाना है।

सर्वेक्षण दल और निरीक्षण किए गए क्षेत्र

विमानन प्राधिकरण की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने माजुली के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और संभावित निर्माण स्थलों का बारकी से जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान टीम ने जेंगराईमुख से लेकर कमलाबारी दरबार चापोरी तक के विस्तृत क्षेत्रों को कवर किया। दल ने इन इलाकों में जमीन की बनावट, आसपास के भौगोलिक माहौल और रनवे निर्माण के लिए उपयुक्त परिस्थितियों की गहराई से पड़ताल की।

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तकनीकी पहलू और स्थानीय प्रशासन का सहयोग

सर्वेक्षण के दौरान केवल जमीन ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं का भी आकलन किया गया। इसमें इलाके की मौजूदा कनेक्टिविटी, पहुंच मार्ग, मौसम संबंधी स्थितियां और परिचालन से जुड़ी लॉजिस्टिक जरूरतों का विस्तृत विश्लेषण शामिल रहा। इस पूरी प्रक्रिया में माजुली के जिला आयुक्त रतुल चंद्र पाठक (ACS) के साथ-साथ जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी AAI टीम के साथ मौजूद रहे।

प्रशासनिक राय और स्थल चयन की प्रक्रिया

जिला आयुक्त रतुल चंद्र पाठक ने इस शुरुआती सर्वे को माजुली के विकास के लिए एक बेहद उत्साहजनक कदम करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक अभ्यास के दौरान कई अलग-अलग स्थानों की जांच की गई है। हालांकि, किसी एक अंतिम स्थान का चयन तुरंत नहीं किया जाएगा। आगे के तकनीकी मूल्यांकन और विस्तृत प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही सबसे उपयुक्त जगह पर मुहर लगाई जाएगी।

राज्य की विमानन योजना और आर्थिक प्रभाव

यह प्रस्तावित हवाई अड्डा उन चार नए एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिनकी घोषणा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फरवरी के महीने में की थी। राज्य सरकार का उद्देश्य असम के दूर-दराज के इलाकों में हवाई संपर्क को मजबूत करना है। यदि यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है, तो इससे न केवल द्वीप के निवासियों और आने-जाने वाले यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल निर्माण कार्य शुरू होने से पहले अभी कुछ और प्रशासनिक मंजूरी और तकनीकी जांच होना बाकी है।

सवाल-जवाब

माजुली में AAI सर्वेक्षण का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य माजुली नदी द्वीप पर प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण की व्यवहार्यता और जमीन की उपयुक्तता की जांच करना है।
सर्वेक्षण के दौरान किन-किन क्षेत्रों की जांच की गई?
AAI की टीम ने जेंगराईमुख से लेकर कमलाबारी दरबार चापोरी तक के विस्तृत क्षेत्रों का दौरा कर जमीन और परिस्थितियों का जायजा लिया।
सर्वेक्षण प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल थे?
सर्वेक्षण में AAI की छह सदस्यीय टीम के साथ जिला आयुक्त रतुल चंद्र पाठक और पुलिस, परिवहन तथा वन विभाग के अधिकारी शामिल थे।
क्या हवाई अड्डे का अंतिम स्थान तय कर लिया गया है?
नहीं, अभी कई स्थानों की केवल शुरुआती जांच हुई है। अंतिम स्थान का चयन आगे के तकनीकी मूल्यांकन के बाद किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·43 दिन पहले

एक मनोरंजन रिपोर्टर के तौर पर मैं मानती हूँ कि माजुली में हवाई अड्डे के बनने से इस ऐतिहासिक नदी द्वीप पर फिल्म शूटिंग, सेलिब्रिटी टूरिज्म और सांस्कृतिक उत्सवों का दायरा अभूतपूर्व रूप से बढ़ेगा। बेहतर एयर कनेक्टिविटी मिलने से देश-विदेश के फिल्ममेकर्स और पर्यटक आसानी से यहाँ पहुँच सकेंगे, जिससे असमिया पॉप कल्चर और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान व भारी आर्थिक गति मिलेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·43 दिन पहले

माजुली में एयरपोर्ट का यह शुरुआती सर्वे असम की रणनीतिक और क्षेत्रीय संपर्क नीति का अहम हिस्सा है, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने फरवरी में की थी। भौगोलिक चुनौतियों से घिरे इस दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप पर विमानन ढांचा खड़ा करने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। हालांकि, किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पर्यावरण और तकनीकी मानकों पर मुहर लगना अनिवार्य होगा।

Divya Reddy@divya-reddy·43 दिन पहले

माजुली जैसे नदी द्वीप पर हवाई अड्डे के विकास से इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों पर भी गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बेहतर हवाई संपर्क स्थापित होने से देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों की पहुंच इस सांस्कृतिक रूप से समृद्ध द्वीप तक आसान होगी, जिससे छात्रों के लिए अकादमिक आदान-प्रदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नए द्वार खुलेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 दिन पहले

माजुली जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील नदी द्वीप पर हवाई अड्डे के निर्माण के दौरान पर्यावरण, कानून-व्यवस्था और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनी पहलुओं की कड़ी जाँच अनिवार्य होगी। जिला प्रशासन और वन विभाग की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सुरक्षा, ज़मीन के मालिकाना हक और पर्यावरण मंजूरी के मोर्चे पर आने वाले दिनों में कई जटिल कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, जो इस परियोजना की वास्तविक गति तय करेंगी।

Ravikash Gupta@ravikash·43 दिन पहले

माजुली का यह विमानन प्रोजेक्ट केवल परिवहन को सुगम नहीं बनाएगा, बल्कि पूर्वोत्तर के इस सांस्कृतिक और भौगोलिक रूप से अद्वितीय क्षेत्र में आर्थिक व पर्यटन निवेश के नए द्वार खोलेगा। हालांकि, किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कड़े वित्तीय और तकनीकी मानदंडों को पूरा करना आवश्यक होता है। निवेशकों और कॉरपोरेट जगत की नज़र इस बात पर होगी कि प्रशासनिक मंजूरियां मिलने के बाद इस परियोजना के लिए बजट आवंटन और क्रियान्वयन की रूपरेखा किस प्रकार तैयार की जाती है, जो अंततः क्षेत्रीय व्यापारिक गतिविधियों को गति देगी।

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