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मनिहारी से बरारी तक नाव पर पहुंची बारात, बाढ़ में भी नहीं टली शफीक और फरहद की शादीबिहार
8 सित॰ 2026, 10:25 pm (16 दिन पहले)· 3

मनिहारी से बरारी तक नाव पर पहुंची बारात, बाढ़ में भी नहीं टली शफीक और फरहद की शादी

कटिहार जिले के मनिहारी और बरारी प्रखंडों में बाढ़ के पानी ने सड़कें डुबो दीं, लेकिन शफीक ने नाव से बारात लेकर फरहद से निकाह किया और नई दुल्हन को भी उसी नाव से विदा कराकर घर ले गए।

बिहार के कई इलाकों में बाढ़ ने आम जिंदगी को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है, और कटिहार जिला भी इससे अछूता नहीं है। कहीं घरों के भीतर तक पानी घुस आया है तो कहीं सड़कें और रास्ते पूरी तरह डूब चुके हैं। लेकिन इसी संकट के बीच जिले से एक ऐसा नजारा सामने आया, जिसने साबित कर दिया कि बढ़ता हुआ बाढ़ का पानी भी किसी परिवार की खुशियों का रास्ता नहीं रोक सकता। मनिहारी प्रखंड से बरारी प्रखंड तक बाढ़ के पानी को चीरते हुए एक दूल्हे की बारात नाव पर सवार होकर दुल्हन के गांव पहुंची और उसे विदा कराकर लाई।

चार प्रखंड जलमग्न, सड़कें बनीं नदी जैसी

कटिहार जिले के चार प्रखंड इन दिनों बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों के अंदर तक घुस आया है, जिससे परिवारों को अपना जरूरी सामान ऊंची जगहों पर पहुंचाना पड़ रहा है। कई अन्य जगहों पर गांवों को जोड़ने वाली सड़कें और मुख्य रास्ते पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, जिससे आम आवागमन ठप हो गया है। लोग अब घर से निकलने के लिए भी नाव का सहारा ले रहे हैं, चाहे वह राशन लाना हो, अस्पताल जाना हो या किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होना हो। इन्हीं मुश्किल हालात के बीच मनिहारी प्रखंड के कालीगंज गांव में एक शादी की तारीख पहले से तय थी, और परिवार ने बाढ़ के आगे शादी टालने के बजाय रास्ता निकालने का फैसला किया।

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सड़क डूबी तो नाव बनी बाराती वाहन

कालीगंज गांव के रहने वाले मोहम्मद शफीक की शादी बरारी प्रखंड की सुखासन पंचायत के ठोठीबाग गांव की फरहद के साथ तय हुई थी। जब शादी का दिन नजदीक आया, तब तक रास्ते में इतना पानी भर चुका था कि सड़क के जरिए बारात ले जाना नामुमकिन हो गया था। इस पर शफीक और उनके परिवार ने बिना देर किए एक नाव का इंतजाम किया, और बाकी बाराती भी उन्हीं के साथ नाव में सवार हो गए। सजे-धजे दूल्हे और बारातियों को पानी के बीच नाव पर देखकर रास्ते में मौजूद लोग कुछ पल के लिए ठिठक गए, और यह नजारा जल्द ही पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। शफीक ने कहा कि बाढ़ की वजह से परेशानी तो जरूर हुई, लेकिन शादी की तारीख टाली नहीं जा सकती थी। वहीं दूल्हे के पिता जहांगीर आलम ने कहा कि हालात मुश्किल जरूर हैं, लेकिन निकाह अच्छे से संपन्न होने की खुशी है।

निकाह के बाद उसी नाव से हुई दुल्हन की विदाई

चारों तरफ फैले बाढ़ के पानी के बीच जब बारात आखिरकार दुल्हन के गांव पहुंची, तो रीति-रिवाज के मुताबिक निकाह की रस्में पूरी की गईं। समारोह खत्म होते ही नई-नवेली दुल्हन फरहद भी उसी नाव पर सवार हुईं, जो बारात को उनके दरवाजे तक लेकर आई थी। इसके बाद शफीक अपनी दुल्हन को साथ लेकर उसी जलमग्न रास्ते से अपने नए घर के लिए रवाना हो गए। इतने मुश्किल हालात में हुई यह शादी और नाव पर सवार दुल्हन की विदाई देखने वाले हर किसी के लिए हैरान करने वाला नजारा थी। इलाके के लोगों का कहना है कि यह शादी अपने आप में एक संदेश दे गई, रास्ते भले ही बाढ़ में डूब जाएं, लेकिन जिंदगी और उसकी खुशियां कभी थमनी नहीं चाहिए।

सवाल-जवाब

दूल्हे और दुल्हन का नाम क्या है?
दूल्हे का नाम मोहम्मद शफीक और दुल्हन का नाम फरहद है।
दोनों किन गांवों के रहने वाले हैं?
शफीक कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कालीगंज गांव के हैं और फरहद बरारी प्रखंड की सुखासन पंचायत के ठोठीबाग गांव की हैं।
बारात नाव पर क्यों निकली?
शादी के रास्ते में बाढ़ का पानी भर जाने से सड़क के जरिए बारात ले जाना मुमकिन नहीं था, इसलिए नाव का सहारा लिया गया।
निकाह के बाद दुल्हन अपने नए घर कैसे पहुंचीं?
निकाह के बाद दुल्हन फरहद भी उसी नाव पर सवार हुईं जिस पर बारात आई थी, और शफीक के साथ उसी नाव से अपने नए घर गईं।
कटिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति क्या है?
कटिहार जिले के चार प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं, कई गांवों में घरों में पानी घुसा है और सड़कें डूबी हुई हैं।
दूल्हे और उनके पिता ने क्या कहा?
शफीक ने कहा कि बाढ़ से परेशानी हुई लेकिन शादी की तारीख टाली नहीं जा सकती थी, वहीं पिता जहांगीर आलम ने निकाह अच्छे से होने पर खुशी जताई।
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