देश के अधिकांश हिस्सों से मानसूनी हवाओं की रवानगी के बावजूद वातावरण पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। 11 अक्टूबर को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर पूर्वी और मध्य भारत तक मौसम के अचानक पलटने के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। दक्षिण में मन्नार की खाड़ी के पास चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव की स्थिति निर्मित होने से मौसम में व्यापक फेरबदल दर्ज किया जा रहा है। इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के विस्तृत तटीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश तथा तूफानी हवाओं का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है। दूसरी ओर, उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के 21 राज्यों में तेज हवाओं, मेघ गर्जना और वर्षा को लेकर मौसम संबंधी चेतावनी जारी की गई है। कई इलाकों में वायु प्रवाह की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की जा सकती है, जबकि कुछ तटीय व खुले भूभागों में 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक के झोंके चलने के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर हवा की यह तीव्रता अलग-अलग रहने का अनुमान है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बादलों का डेरा और तापमान में गिरावट
दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 11 अक्टूबर को मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा। राजधानी के साथ-साथ गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम में आसमान में घने बादलों की आवाजाही बनी रहेगी तथा मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। इस दौरान 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चल सकते हैं। मौसमी बदलाव के चलते पारे में भी नरमी देखने को मिलेगी। दिल्ली में दिन का अधिकतम तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किए जाने का अनुमान है। दिन में बारिश और तेज हवाओं के संगम से उमस भरे मौसम से राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि कार्यदिवस के दौरान सड़कों पर जलभराव और यातायात की धीमी रफ्तार लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है।
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और तराई इलाकों में आंधी-पानी का संकट
उत्तर प्रदेश के एक विस्तृत भूभाग में 11 अक्टूबर को बादलों की तेज गर्जना के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। राज्य के पश्चिमी हिस्से में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज, इटावा, गाजियाबाद और मेरठ में बादलों का कड़ा पहरा रहने का पूर्वानुमान है। इसके साथ ही मध्य और पूर्वी क्षेत्र के कानपुर, उन्नाव, आजमगढ़ और सोनभद्र में भी मौसमी उथल-पुथल देखने को मिलेगी। नेपाल सीमा से सटे तराई क्षेत्रों जैसे लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर और महाराजगंज में हवाओं के साथ वर्षा की प्रबल संभावना जताई गई है। इन सभी जिलों में हवा की चाल 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। राज्य की राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर रहने का आकलन किया गया है।
बिहार में भारी बारिश और आकाशीय बिजली को लेकर सतर्कता
बिहार के कई प्रमंडलों में 11 अक्टूबर को मौसमी दशाएं काफी बिगड़ने की आशंका है। राज्य के दक्षिणी और मध्यवर्ती जिलों में पटना, गया, जहानाबाद, बक्सर, भोजपुर, मुंगेर और भागलपुर में भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा उत्तर बिहार के सिवान, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी में भी बादलों की तेज गड़गड़ाहट और बारिश का अनुमान है। पूर्वी सीमांचल के पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार में भी प्रतिकूल मौसमी गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इन सभी क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं पेड़ों और कमजोर संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। राजधानी पटना में अधिकतम पारा 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम पारा 23 डिग्री सेल्सियस तक रहने की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम भी बना रहेगा।
झारखंड में दो दिनों तक जोरदार बारिश और फिसलन का खतरा
झारखंड में मौसमी हलचल केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि 11 और 12 अक्टूबर को लगातार दो दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में मध्यम से भारी दर्जे की बारिश का सिलसिला चल सकता है। दक्षिणी क्षेत्र के जमशेदपुर, सिमडेगा और गुमला में बादलों का भारी जमावड़ा रहने की संभावना है। वहीं मध्य व उत्तरी छोटानागपुर के रांची, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद और गिरिडीह में भी बादलों के बरसने के पूरे आसार हैं। पलामू, गढ़वा और संथाल परगना के साहिबगंज में भी मौसम बिगड़ने की चेतावनी दी गई है। इन इलाकों में 30 से 35 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवाएं चलेंगी। राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। लगातार वर्षा से सड़कों पर फिसलन बढ़ेगी और निचले मोहल्लों में पानी भरने से आवागमन बाधित हो सकता है।
पश्चिम बंगाल के मैदानी और पर्वतीय जिलों में तेज हवाओं का प्रकोप
पश्चिम बंगाल में दक्षिण से लेकर उत्तर तक मौसम के विविध रूप देखने को मिलेंगे। कोलकाता, नादिया और बीरभूम के मैदानी इलाकों के साथ-साथ उत्तर के पर्वतीय और तराई जिलों अलीपुरद्वार और दार्जिलिंग में बारिश के साथ उग्र हवाओं की आशंका व्यक्त की गई है। राज्य के कुछ चुनिंदा पॉकेट्स में तेज हवा के झोंके 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार छू सकते हैं, जिससे समुद्री और तटीय क्षेत्रों में हलचल तेज हो जाएगी। महानगर कोलकाता में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और दृश्यता में कमी का जोखिम बना रहेगा, जबकि मैदानी भागों में तेज आंधी से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में चक्रवाती प्रभाव से बौछारें
मध्य प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी अंचलों में 11 अक्टूबर को आंधी और बारिश का प्रभाव देखा जाएगा। मालवा और निमाड़ अंचल के इंदौर, देवास, धार और नीमच में तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मध्य भाग के भोपाल, विदिशा, नर्मदापुरम और अशोकनगर के साथ-साथ चंबल और विंध्य-महाकौशल के मुरैना, उमरिया, मंडला और अनूपपुर में भी मौसम करवट लेगा। यहां हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। भोपाल में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। राजस्थान के मौसम की बात करें तो भरतपुर, कोटा, बूंदी, जयपुर, अजमेर, उदयपुर और बीकानेर में हल्की वर्षा दर्ज हो सकती है। वहां 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से हवाएं चलेंगी। राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
उत्तर-पश्चिमी मैदानी राज्य और उच्च पर्वतीय शिखरों पर मौसमी गतिविधि
पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी बादलों की आमद से मौसम में ठंडक घुलने के आसार हैं। पंजाब के जालंधर, लुधियाना, पटियाला, बरनाला, पठानकोट और गुरदासपुर जैसे जिलों में तेज हवाओं के साथ छिटपुट बारिश लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। कटी हुई फसलों और मंडियों में खुले में रखे अनाज के लिए यह मौसमी बदलाव संवेदनशील साबित हो सकता है। दूसरी तरफ, हिमालयी राज्यों के मैदानी हिस्सों में वर्षा के साथ ऊंचाई वाले पर्वतीय शिखरों पर हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात शुरू होने से उत्तर भारत के मैदानी भागों में आगामी दिनों में रात के तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज की जा सकती है।





















