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मेघालय हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत, 3 हफ्ते में सरेंडर का अल्टीमेटममध्य प्रदेश
23 जुल॰ 2026, 12:57 pm (98 दिन पहले)· 1

मेघालय हनीमून मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत, 3 हफ्ते में सरेंडर का अल्टीमेटम

इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हत्या के मामले में मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश देते हुए कहा है कि ट्रायल में देरी होने पर वह 6 महीने बाद दोबारा जमानत मांग सकती हैं।

मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। सर्वोच्च अदालत ने मेघालय में हनीमून के दौरान हुई इस सनसनीखेज हत्या के मामले में सोनम को मिली जमानत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। अदालत ने आरोपी को कानून के समक्ष सरेंडर (आत्मसमर्पण) करने के लिए तीन सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

मेघालय सरकार ने दी थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

यह अहम फैसला मेघालय सरकार द्वारा दायर की गई एक विशेष याचिका पर सुनवाई करते हुए आया है। राज्य सरकार ने आरोपी पत्नी को दी गई जमानत का कड़ा विरोध करते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मेघालय सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोपी के वकील की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें गिरफ्तारी के तरीके पर सवाल उठाए गए थे। तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि पुलिस की चार्जशीट में यह बात साफ तौर पर दर्ज है कि आरोपी ने खुद सरेंडर किया था, इसलिए गिरफ्तारी के आधार को लेकर बचाव पक्ष की दलील पूरी तरह से बेबुनियाद है।

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बचाव पक्ष की दलील: सुनवाई में हो रही है भारी देरी

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने मामले की धीमी गति का मुद्दा उठाया। उन्होंने पीठ को बताया कि अभियोजन पक्ष ने इस हत्याकांड में कुल 94 लोगों को गवाह बनाया है। हालांकि, इतने बड़े गवाहों के समूह में से अब तक केवल 4 गवाहों के ही बयान अदालत में दर्ज किए जा सके हैं। वकील ने यह भी जानकारी दी कि मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट (पूरक आरोप पत्र) पहले ही दाखिल की जा चुकी है। बचाव पक्ष का तर्क था कि सोनम को बेहद सख्त शर्तों के साथ जमानत दी गई थी और वह उन सभी शर्तों का पूरी ईमानदारी से पालन कर रही हैं।

सरेंडर बनाम गिरफ्तारी पर गहराया विवाद

अदालत के कक्ष में गिरफ्तारी की जगह और तरीके को लेकर भी काफी बहस हुई। सोनम के वकील ने दावा किया कि उनकी मुवक्किल ने कभी सरेंडर नहीं किया, बल्कि पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर इलाके से गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी को जानबूझकर सरेंडर का नाम दिया जा रहा है। वकील ने अदालत को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि आरोपी के भागने का कोई खतरा नहीं है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए अपने लिखित जवाब में सोनम रघुवंशी ने खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। उनका कहना है कि पुलिस की पूरी कहानी केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर बुनी गई है और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है, इसलिए केवल आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और आगे का रास्ता

इस मामले की पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बचाव पक्ष के वकील को दो सीधे विकल्प दिए थे। अदालत ने पूछा था कि क्या आरोपी सोनम रघुवंशी खुद अपनी मर्जी से सरेंडर करेंगी, या फिर अदालत जमानत रद्द करने का औपचारिक आदेश पारित करे। अंततः अदालत ने कड़ा कदम उठाते हुए जमानत खारिज कर दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए एक राहत भी दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि निचली अदालत में मामले के ट्रायल (सुनवाई) में अनुचित देरी होती है, तो सोनम रघुवंशी 6 महीने की अवधि बीत जाने के बाद दोबारा अपनी जमानत याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगी।

सवाल-जवाब

सोनम रघुवंशी पर क्या गंभीर आरोप हैं?
सोनम रघुवंशी पर मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति और इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या करने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को कितने समय में सरेंडर करने को कहा है?
अदालत ने जमानत रद्द करते हुए उन्हें अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करने के लिए तीन सप्ताह (3 हफ्ते) का समय दिया है।
सोनम की जमानत का विरोध किसने किया था?
मेघालय सरकार ने सोनम को मिली जमानत का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी पैरवी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की।
बचाव पक्ष ने अपनी दलील में क्या कहा?
बचाव पक्ष ने कहा कि मामले में 94 गवाह हैं लेकिन अब तक सिर्फ 4 के बयान दर्ज हुए हैं, और पूरा केस केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।
सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत कब मांग सकती हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर मामले के ट्रायल में देरी होती है, तो वह 6 महीने की अवधि के बाद दोबारा जमानत याचिका दायर कर सकती हैं।
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