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मेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में जहरीली गैस से असम के चार निर्माण श्रमिकों की दर्दनाक मौतत्रिपुरा
28 सित॰ 2026, 12:03 pm (3 दिन पहले)· 1

मेघालय के दक्षिण गारो हिल्स में जहरीली गैस से असम के चार निर्माण श्रमिकों की दर्दनाक मौत

मेघालय के दक्षिण गारो हिल्स जिले में एक नवनिर्मित सेप्टिक टैंक का ढक्कन खोलते समय जहरीली गैस की चपेट में आने से असम के चार निर्माण मजदूरों की मौत हो गई।

मेघालय के दक्षिण गारो हिल्स जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक से निकलने वाली जहरीली गैस की चपेट में आने से असम के चार मजदूरों की मौत हो गई। यह दुर्घटना रविवार दोपहर को रंगदोकराम गांव में घटित हुई, जिससे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

कैसे हुआ यह हादसा

यह पूरी घटना रंगदोकराम गांव के रहने वाले सेबेस्टियन सीएच संगमा के घर पर हुई, जहां ये मजदूर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। दोपहर करीब 3 बजे, काम के दौरान दो मजदूरों ने नए बने सेप्टिक टैंक का ढक्कन खोलने की कोशिश की। ढक्कन खुलते ही वहां भारी मात्रा में जमा जहरीली गैस बाहर निकली और वे दोनों तुरंत बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें बचाने के लिए बाकी के दो मजदूर भी टैंक के पास पहुंचे, लेकिन वे भी जहरीले धुएं का शिकार हो गए और बेहोश हो गए।

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बचाव कार्य में आईं मुश्किलें

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के कर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया, लेकिन सेप्टिक टैंक जमीन के नीचे होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आईं। राहत कर्मियों को बेहोश मजदूरों तक पहुंचने के लिए टैंक के आसपास की मिट्टी खोदनी पड़ी। इस अभियान के दौरान जहरीली गैस का असर इतना तेज था कि दो दमकलकर्मी भी बेहोश हो गए, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया।

मृतकों की पहचान

रेस्क्यू टीम की तमाम कोशिशों के बावजूद चारों मजदूरों की जान नहीं बचाई जा सकी और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मृतकों की पहचान कर ली है, जो सभी असम के दक्षिण सालमारा-मंकाचार जिले के रहने वाले थे। मृतकों में मंकाचार के दीआरा, पुरनदीआरा निवासी मोफिदुर रहमान (34), चेंगुरचार, पुरनदीआरा निवासी अजियर रहमान (41), चोमराशली, कालापानी निवासी इस्माइल हुसैन (20) और बोआलिया, राधामाधव हाट निवासी रकीब हुसैन (22) शामिल हैं।

गैस निकासी की व्यवस्था न होना बड़ी वजह

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस नए बने सेप्टिक टैंक में गैस निकासी (गैस आउटलेट) या सोखता गड्ढा (सोक पिट) नहीं बनाया गया था। इसके कारण टैंक के अंदर मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी खतरनाक गैसें जमा हो गईं, जो बंद जगहों पर जानलेवा साबित होती हैं। हालांकि, मौत के असली कारणों की पुष्टि के लिए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सवाल-जवाब

यह दुर्घटना किस स्थान पर हुई?
यह दुर्घटना मेघालय के दक्षिण गारो हिल्स जिले के रंगदोकराम गांव में हुई।
सेप्टिक टैंक का निर्माण किसके घर पर किया जा रहा था?
यह निर्माण कार्य सेबेस्टियन सीएच संगमा के आवास पर किया जा रहा था।
इस हादसे में जान गंवाने वाले लोग कौन थे?
मरने वाले चार मजदूर मफीजुर रहमान, अजियर रहमान, इस्माइल हुसैन और रकीब हुसैन थे, जो असम के दक्षिण सालमारा-मंकाचार जिले के निवासी थे।
मजदूरों की मौत का मुख्य कारण क्या था?
मजदूरों की मौत सेप्टिक टैंक के अंदर जमा जहरीली गैसों (जैसे मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड) के कारण दम घुटने से हुई।
अन्य दो मजदूर कैसे इस हादसे का शिकार हुए?
वे पहले बेहोश हुए दो मजदूरों को बचाने के प्रयास में टैंक के पास गए थे, लेकिन जहरीले धुएं के कारण वे भी बेहोश हो गए।
क्या बचाव दल का कोई सदस्य भी इस जहरीली गैस की चपेट में आया?
हां, बचाव कार्य के दौरान जहरीली गैस के कारण दमकल विभाग के दो कर्मी भी बेहोश हो गए थे, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·2 दिन पहले

सेप्टिक टैंक जैसी खतरनाक जगहों पर काम करते वक्त सुरक्षा नियमों की इतनी अनदेखी क्यों की जाती है? क्या इन मजदूरों को कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे?

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

सेप्टिक टैंक में गैस आउटलेट न होना ही वजह है, यह बात मुझे थोड़ी असमंजस में डाल रही है। बिना पूरी जांच के कैसे कह सकते हैं?

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·2 दिन पहले

रविकेश, बिना जांच के गैस आउटलेट न होने को मुख्य वजह मानना थोड़ा जल्दबाजी लग सकता है, क्योंकि जब तक फोरेंसिक रिपोर्ट न आए, पुख्ता तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

सेप्टिक टैंक में गैस आउटलेट न होने की बात तो ठीक है, पर बिना सुरक्षा उपकरणों के एक के बाद एक चारों का अंदर उतर जाना थोड़ा अजीब लगता है। इतनी बड़ी लापरवाही एक साथ चार लोग कैसे कर सकते हैं?

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

करण भाई, चार जिंदगियां चली गईं और आप कह रहे हैं कि लापरवाही अजीब लगती है। हादसे के वक्त डर और हड़बड़ी में कोई नहीं सोचता।

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