सनातन परंपरा में शिखा बांधने के पीछे क्या हैं आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और मानसिक रहस्यजयपुर में कैश लोड करते समय बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से 42 लाख रुपये लूटे, पूरे शहर में नाकेबंदीराजस्थान में ब्यावर से भरतपुर तक बनेगा नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली से अजमेर का सफर घटकर पांच घंटे होगाउत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी जहाज की टक्कर से उपजा तनाव, कराची नाकेबंदी का पुराना डर फिर हुआ ताजासाउंडबॉक्स राइडर पार्टी स्पीकर रिव्यू: बेहतरीन मजबूती और दमदार आवाज के साथ क्या 600 डॉलर खर्च करना सही फैसला हैदिल्ली हवाई अड्डे पर दुबई की फ्लाइट से उतरे दो यात्रियों की संदिग्ध फुसफुसाहट ने खोला 3.38 करोड़ रुपये के सोने की तस्करी का राजहोर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमला, 2 नाविक लापता और 23 को बचाया गयाबिग बॉस 20 में आम्रपाली दुबे के करियर पर तंज से रो पड़ीं अरिश्फा खान, काजी तौकीर ने संभाला1.80 करोड़ की लागत से बनी हनुमान अंश ने 41 दिनों में बटोरे 300 करोड़, 3 महिला निर्माताओं का चमका सितारारे रेजिडेंट ईविल रिव्यू (2026): जैक क्रेगर का नया खूनी और कॉमिक अंदाज
मुरैना में बीमारी का इलाज कराने के बहाने गहने उड़ाने वाला फर्जी संत पकड़ा गया, चार साल से तलाश रही थी पुलिसभारत
19 सित॰ 2026, 5:34 pm (54 मिनट पहले)· 0

मुरैना में बीमारी का इलाज कराने के बहाने गहने उड़ाने वाला फर्जी संत पकड़ा गया, चार साल से तलाश रही थी पुलिस

मुरैना की दुर्गापुरी कॉलोनी में महिलाओं को नशीला पानी पिलाकर छह लाख रुपये के गहने ठगने वाले आरोपी को ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब गहने खरीदने वालों और उसके फरार साथी की तलाश कर रही है।

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में गंभीर बीमारी और पेट की गांठ ठीक करने का झूठा दावा कर महिलाओं को ठगने वाले एक शातिर बदमाश को पुलिस ने धर दबोचा है। खुद को सूफी संत बताकर घर में दाखिल हुए इस शख्स ने सास और बहू को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में उलझाया, फिर नशीला पानी पिलाकर बेहोश कर दिया और लगभग 6 लाख रुपये कीमत के सोने के जेवरात लेकर चंपत हो गया। चार वर्षों की लंबी भागदौड़ और लगातार प्रयास के बाद आखिरकार कानून के हाथ उस तक पहुंच गए हैं।

दुर्गापुरी कॉलोनी में बीमारी ठीक करने के नाम पर रची गई साजिश

यह पूरी घटना मुरैना स्थित दुर्गापुरी कॉलोनी में घटित हुई थी। वर्ष 2022 में पीड़ित हबीब खान ने स्थानीय कोतवाली थाने में लिखित तहरीर देकर ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। वारदात के दिन हबीब खान अपने बड़े भाई के देहांत के चलते जौरा गए हुए थे। घर पर केवल उनकी पत्नी अकीला बेगम और उनकी पुत्रवधू अकेली थीं। पुरुषों की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर दो अज्ञात लोग खुद को सूफी संत बताते हुए उनके दरवाजे पर आ धमके।

ये भी पढ़ें

इन ठगों ने अकीला बेगम को बातों में फंसाते हुए दावा किया कि वे उनकी पुरानी बीमारी और पेट में मौजूद गांठ को अपनी आध्यात्मिक शक्ति से पूरी तरह ठीक कर देंगे। इलाज की एक कथित रस्म का बहाना बनाकर उन्होंने दोनों महिलाओं से उनके शरीर पर मौजूद सारे जेवर उतरवा लिए। महिलाओं ने झांसे में आकर आठ बालियां, चार बाला, चार अंगूठियां और दो मंगलसूत्र उतारकर उन्हें सौंप दिए। ठगों ने इन सभी गहनों को महिलाओं के सामने ही एक छोटी मटकी में रखवा दिया और साथ ही 10 हजार रुपये नकद भी ले लिए।

नशीला पानी पिलाकर लूटा, मटकी में मिले कंकड़

इलाज की प्रक्रिया पूरी करने का झांसा देकर आरोपियों ने सास और बहू दोनों को पीने के लिए पानी दिया। इस पानी में नशीला पदार्थ मिला हुआ था, जिसे पीते ही दोनों महिलाएं सुधबुध खो बैठीं और बेहोश हो गईं। उनके अचेत होते ही दोनों जालसाज सोने के गहने और नकदी समेटकर वहां से भाग निकले। करीब दो घंटे बाद जब महिलाओं की बेहोशी टूटी और उन्होंने होश संभालकर उस मटकी की जांच की, तो उनके होश उड़ गए। मटकी के भीतर सोने का एक भी जेवर मौजूद नहीं था, बल्कि उसमें सिर्फ साधारण पत्थर और कंकड़ भरे हुए थे।

फर्जी सिम और बंद होने की कगार पर पहुंचा मामला

पीड़ित परिवार की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन आरोपियों का कोई भी सीधा सुराग हाथ नहीं लग पा रहा था। आरोपी जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल बातचीत के लिए कर रहा था, उसकी सिम भी मध्य प्रदेश के दतिया से किसी अन्य व्यक्ति के फर्जी नाम और पते पर खरीदी गई थी। तकनीकी जांच में कोई ठोस आधार न मिलने और चार साल तक आरोपियों का पता न चलने पर मामले की जांच लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी।

जांच अधिकारियों ने इस मामले में खात्मा डायरी तैयार करने का फैसला किया और फाइल दो बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय भेजी गई। हालांकि, जांच में कुछ कमियां पाए जाने के कारण एसपी कार्यालय से यह फाइल दोनों बार वापस लौटा दी गई, जिससे केस की फाइल बंद नहीं हुई और जांच की उम्मीदें जीवित रहीं।

ग्वालियर में रत्न बेचते समय पहचान और गिरफ्तारी

इस अनसुलझे मामले में उस समय अप्रत्याशित मोड़ आया जब ग्वालियर के गोल पहाड़िया इलाके में हबीब खान के एक परिचित आजाद खान पहुंच गए। वहां बाजार में आरोपी राशि वाले ज्योतिषीय नग और पत्थर बेचने की कोशिश कर रहा था। आजाद खान की नजर उस पर पड़ गई और उन्होंने चार साल पुराने धोखेबाज को तुरंत पहचान लिया। उन्होंने बिना देर किए पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पकड़े गए आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के अंतर्गत आने वाले भोपा थाना क्षेत्र के मोरना गांव निवासी समीर पठान के रूप में की गई है। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने आरोपी के पास से 28 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।

गहनों के खरीदारों और फरार साथी की तलाश

पुलिस हिरासत में हुई पूछताछ के दौरान समीर पठान ने स्वीकार किया कि सास और बहू से ठगे गए सभी सोने के जेवर वह पहले ही बेच चुका है। अब पुलिस की टीमें उन सराफा व्यापारियों और खरीदारों का पता लगाने में जुट गई हैं, जिन्हें यह चोरी का सोना बेचा गया था, ताकि 6 लाख रुपये के जेवरात की बरामदगी की जा सके। इसके अलावा वारदात में शामिल उसके साथी मेहबूब खान की तलाश में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

सवाल-जवाब

मुरैना में ठगी का आरोपी समीर पठान किस तरह पकड़ा गया?
पीड़ित हबीब खान के परिचित आजाद खान ने आरोपी को ग्वालियर के गोल पहाड़िया में रत्न बेचते हुए पहचान लिया और पुलिस को सूचना देकर गिरफ्तार करवा दिया।
आरोपी ने महिलाओं से किस बहाने गहने उतरवाए थे?
उसने खुद को सूफी संत बताकर अकीला बेगम की बीमारी और पेट की गांठ को आध्यात्मिक उपचार से ठीक करने का झांसा दिया था।
पीड़ित महिलाओं से कुल कितने गहने और नकदी की ठगी हुई थी?
महिलाओं से आठ बालियां, चार बाला, चार अंगूठियां, दो मंगलसूत्र और 10 हजार रुपये नकद ठगे गए थे, जिनकी कुल कीमत करीब 6 लाख रुपये थी।
चार साल तक पुलिस आरोपी को क्यों नहीं पकड़ पाई थी?
आरोपी दतिया से फर्जी नाम और पते पर जारी कराई गई मोबाइल सिम का इस्तेमाल कर रहा था, जिससे उसका कोई सटीक सुराग नहीं मिल पा रहा था।
गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने आरोपी समीर पठान के पास से 28 हजार रुपये की नकदी बरामद की है।
वारदात में शामिल दूसरा आरोपी कौन है और उसकी क्या स्थिति है?
वारदात में समीर का साथी मेहबूब खान भी शामिल था, जो फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·6 मिनट पहले

यह मामला घरेलू स्तर पर होने वाले अपराधों में तकनीकी जांच और डिजिटल पदचिह्न की कमजोरियों को उजागर करता है। जब अपराधी फर्जी दस्तावेजों से सिम कार्ड लेते हैं और पुलिस तकनीकी रूप से फंस जाती है, तो ऐसे मामलों में वित्तीय और व्यक्तिगत सुरक्षा के स्तर पर सतर्कता की बहुत आवश्यकता होती है। यह घटना दर्शाती है कि पारंपरिक अपराधों में भी डिजिटल धोखाधड़ी के तरीके कैसे जोड़े जा रहे हैं, जिससे जांच लंबी और जटिल हो जाती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 मिनट पहले

यह प्रकरण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने खड़ी तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का स्पष्ट उदाहरण है। जब मामले में दो बार खात्मा डायरी तैयार होने की स्थिति आ जाए, तो यह पुलिस की जमीनी खुफिया तंत्र और डिजिटल सर्विलांस के समन्वय में कमी को दर्शाता है। फर्जी दस्तावेजों पर आधारित सिम कार्ड्स का उपयोग संगठित अपराध की ओर इशारा करता है, जिसके लिए गृह विभाग को दूरसंचार कंपनियों के साथ मिलकर कड़े सत्यापन नियम लागू करने होंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·28 मिनट पहले

यह मामला पारंपरिक अपराध और आधुनिक तकनीक के अंतर को उजागर करता है। जहां एक ओर फर्जी सिम कार्ड और तकनीकी बाधाओं के कारण चार साल तक फाइल बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में जमीनी स्तर की खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी ही सफलता तय करती है। अब पुलिस के लिए यह आवश्यक है कि वह इस नेटवर्क के गहने खरीदार को जल्द बेनकाब करे और फरार साथी को पकड़े ताकि इस तरह के संगठित गिरोहों पर लगाम लग सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 मिनट पहले

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि कई बार फाइलें बंद होने की कगार पर पहुंचने के बावजूद पुलिस की निरंतर पड़ताल और जमीनी खुफिया तंत्र के सहारे अपराधियों तक पहुंचा जा सकता है। चार साल बाद हुई यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि फर्जी सिम और पहचान छिपाने के हथकंडे अंततः कानून की पकड़ से नहीं बच सकते। अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए उन सुनारों और खरीदारों तक पहुंचना सबसे अहम चुनौती है, जिन्होंने इन ठगों का साथ दिया, ताकि ऐसे संगठित अपराधों की जड़ों को पूरी तरह काटा जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp