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राजस्थान में लंपी बीमारी से बचाव के लिए कड़े कदम, सीकर-झुंझुनूं के पशु मेले स्थगित और अंतरराज्यीय परिवहन पर रोकराजस्थान
17 सित॰ 2026, 1:18 pm (5 घंटे पहले)· 0

राजस्थान में लंपी बीमारी से बचाव के लिए कड़े कदम, सीकर-झुंझुनूं के पशु मेले स्थगित और अंतरराज्यीय परिवहन पर रोक

लंपी स्किन डिजीज के बढ़ते खतरे को देखते हुए राजस्थान सरकार ने पशु मेलों पर रोक लगा दी है और अंतरराज्यीय गोवंश परिवहन को नियंत्रित करने के निर्देश जारी किए हैं।

राजस्थान के पशुपालन विभाग ने गोवंश में फैल रही लंपी स्किन डिजीज के संक्रमण को रोकने के लिए राज्यभर में कड़े कदम उठाए हैं। बीमारी की ट्रांसमिशन श्रृंखला को तोड़ने के उद्देश्य से अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय गोवंश आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके साथ ही प्रदेशभर में आयोजित होने वाले छोटे-बड़े पशु मेलों और हाट बाजारों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। सरकार का मुख्य मकसद पशुओं की एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवाजाही रोककर संक्रमण को और अधिक फैलने से बचाना है।

शेखावाटी अंचल के दो बड़े पशु मेले रद्द

इस फैसले का व्यापक असर शेखावाटी क्षेत्र में आयोजित होने वाले पारंपरिक मेलों पर पड़ा है। सीकर और झुंझुनूं जिलों में भादवा के महीने में लगने वाले प्रसिद्ध बेरी और टोडपुरा के वार्षिक पशु मेले इस वर्ष रद्द कर दिए गए हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इन दोनों आयोजनों में हर साल 20 हजार से अधिक पशु लाए जाते हैं। इन मेलों में केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में पशुपालक और व्यापारी पहुंचते थे। संक्रमण के व्यापक प्रसार की संभावना को समाप्त करने के लिए इस साल इन मेलों का आयोजन नहीं करने का फैसला लिया गया है।

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गांव और ब्लॉक स्तर पर दो-स्तरीय रणनीति

बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पशुपालन विभाग ने गांव और ब्लॉक स्तर पर दो-स्तरीय सुरक्षा रणनीति बनाई है। इस योजना के तहत बीमार पशुओं को तुरंत स्वस्थ गोवंश से अलग थलग रखने की व्यवस्था की जा रही है। लंपी वायरस को फैलाने में मक्खियों और मच्छरों की बड़ी भूमिका होती है, इसलिए कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी गोशालाओं और पशु बाड़ों में नियमित रूप से कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, सैनिटाइजेशन और फॉगिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त संक्रमित गोवंश की उचित देखभाल के लिए अलग आइसोलेशन केंद्र भी बनाए जा रहे हैं।

घर-घर सर्वे और रैपिड रेस्पॉन्स टीमों का गठन

संक्रमण का शुरुआती चरण में ही पता लगाने के लिए विभागीय टीमें घर-घर जाकर पशुओं का सर्वे करेंगी। पशु चिकित्सा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे बीमार पशुओं का पता लगाकर उनका एक व्यापक डेटाबेस तैयार करें। किसी भी क्षेत्र में लंपी के लक्षण मिलने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराने के लिए ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पॉन्स टीमें गठित की जा रही हैं। राज्य स्तर और सभी जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे काम करने वाले नियंत्रण कक्ष शुरू कर दिए गए हैं ताकि हर स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा सके।

सीकर जिले में हेल्पलाइन सेवा और त्वरित सहायता

सीकर जिले में पशुपालकों की मदद के लिए एक समर्पित नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है और दो हेल्पलाइन नंबर 9829531178 तथा 9460836035 जारी किए गए हैं। यदि किसी पशुपालक को अपने गोवंश में लंपी बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो वे इन नंबरों पर संपर्क करके सूचना दे सकते हैं। विभाग का लक्ष्य सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करना, संक्रमित पशु को अलग करना और उसे तत्काल आवश्यक औषधीय इलाज मुहैया कराना है।

2.50 करोड़ रुपये का विशेष बजट आवंटित

लंपी वायरस से निपटने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक दवाओं की खरीद और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय सहायता मंजूर की है। पशुपालन विभाग को राज्य स्तर पर कुल 2.50 करोड़ रुपये का विशेष बजट दिया गया है। इसके अलावा प्रत्येक जिले को स्थानीय स्तर पर दवाइयां खरीदने और आपात स्थितियों से निपटने के लिए पांच-पांच लाख रुपये जारी किए गए हैं। दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य मुख्यालय से दैनिक आधार पर स्टॉक और वितरण की समीक्षा की जाएगी ताकि कहीं भी दवाइयों की कमी न होने पाए।

पशुपालकों के लिए स्वास्थ्य सलाह और देशी उपाय

पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे बीमार पशुओं में लक्षण दिखते ही उन्हें अलग कर दें और पास के पशु चिकित्सा केंद्र या हेल्पलाइन को सूचित करें। पशुओं के शरीर पर गांठें बनना, तेज बुखार आना और नाक से लगातार पानी बहना लंपी के प्रमुख लक्षण हैं। विभाग ने पशुओं को सार्वजनिक चरागाहों में ले जाने, नए पशु खरीदने या बाहर से पशु लाने से परहेज करने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त गोवंश की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भोजन में हल्दी, गिलोय, काली मिर्च और आंवला जैसी प्राकृतिक चीजों को शामिल करने का सुझाव भी दिया गया है।

सवाल-जवाब

राजस्थान में कौन-कौन से पशु मेले रद्द किए गए हैं?
सीकर और झुंझुनूं जिले में भादवा महीने में आयोजित होने वाले बेरी और टोडपुरा के वार्षिक पशु मेले रद्द कर दिए गए हैं।
सीकर जिले में लंपी वायरस की सूचना देने के लिए कौन से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं?
सीकर जिले के पशुपालक 9829531178 और 9460836035 नंबरों पर संपर्क करके बीमार गोवंश की सूचना दे सकते हैं।
राज्य सरकार ने लंपी की रोकथाम के लिए कितना बजट जारी किया है?
राजस्थान सरकार ने राज्य स्तर पर 2.50 करोड़ रुपये और प्रत्येक जिले के लिए 5 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है।
गोवंश में लंपी बीमारी के मुख्य लक्षण क्या हैं?
शरीर पर गांठें बनना, तेज बुखार आना और नाक से पानी बहना लंपी स्किन डिजीज के मुख्य लक्षण हैं।
पशुपालकों को गोवंश की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए किन चीजों के सेवन की सलाह दी गई है?
पशुपालन विभाग ने गोवंश की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हल्दी, गिलोय, काली मिर्च और आंवला का उपयोग करने की सलाह दी है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

पशु मेलों पर रोक और अंतरराज्यीय परिवहन प्रतिबंध का प्रशासनिक फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन पुलिस और स्थानीय प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती होगा। सीमावर्ती जिलों, विशेषकर पंजाब और हरियाणा से सटे इलाकों में अवैध पशु परिवहन और तस्करी को रोकने के लिए पुलिस नाकेबंदी और गश्त बढ़ानी होगी। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई और सख्त कानूनी प्रवर्तन जरूरी है, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·3 घंटे पहले

करण की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के प्रतिबंधों का असर पड़ोसी राज्यों पर भी पड़ता है। राजस्थान से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी हाई अलर्ट और कसी हुई निगरानी की जरूरत है। पशु तस्कर अक्सर मुख्य रास्तों के बजाय ग्रामीण और कच्चे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा दोगुना हो जाता है। ऐसे में केवल पुलिस नाकेबंदी ही नहीं, बल्कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिला प्रशासनों के बीच त्वरित तालमेल और खुफिया इनपुट साझा करना बेहद जरूरी है। इसके बिना संक्रमण को रोकने की यह कोशिश अधूरी रह जाएगी।

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