आजीविका की तलाश में विदेश गए तेलंगाना के चार भारतीय नागरिक रूस में एक गंभीर संकट में घिर गए हैं। निजामाबाद और कामारेड्डी जिलों से ताल्लुक रखने वाले इन कामगारों को सामान्य नागरिक काम का झांसा देकर कथित तौर पर रूसी सेना के शिविर में ले जाया गया, जहां अब उन्हें जबरन सैन्य अभ्यास कराया जा रहा है। पीड़ित युवकों ने अपने परिवारों को भेजे वीडियो संदेशों और फोन कॉल के माध्यम से अपनी जान को गंभीर खतरा बताते हुए केंद्र सरकार और तेलंगाना प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप कर सुरक्षित वतन वापसी कराने की भावुक अपील की है।
हेल्पर की नौकरी से लेकर रूसी कैंप तक का सफर
पीड़ितों के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, करीब छह महीने पूर्व निजामाबाद जिले के भुक्या रविंदर, अशोक और मेगावत प्रकाश के साथ कामारेड्डी जिले के निवासी मोहम्मद अफजल खान विदेश में बेहतर आमदनी की उम्मीद लेकर रवाना हुए थे। इन सभी ने एक भर्ती एजेंट को प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपये का भुगतान किया था और हेल्पर के पद पर काम करने के लिए मॉस्को पहुंचे थे। वहां लगभग छह महीने तक काम करने के उपरांत उनकी नौकरी की मियाद समाप्त हो गई और उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया।
नया काम तलाशने के दौरान युवकों की नजर एक सार्वजनिक वॉल पोस्टर पर पड़ी। इस विज्ञापन में रूसी सेना के एक कैंप में गार्डन क्लीनर यानी बगीचे की साफ-सफाई के काम के लिए प्रति माह 2 लाख रुपये के आकर्षक वेतन का प्रस्ताव दिया गया था। बेरोजगार हो चुके चारों युवकों ने पोस्टर पर दर्ज संपर्क नंबर पर बात की, जहां मौजूद एजेंट ने सैन्य शिविर में सफाईकर्मी के पद की पुष्टि करते हुए उन्हें वहां जाने का भरोसा दिलाया।
12 घंटे का सफर और जंगल के बीच सैन्य शिविर
एजेंट के निर्देशों पर भरोसा करके जब यह चारों युवक बताए गए स्थान पर पहुंचे, तो हालात पूरी तरह बदल गए। कामगारों का कहना है कि सैन्य वाहनों में बैठाकर उन्हें लगभग 12 घंटे तक घुमाया गया और अंततः एक घने जंगली इलाके में स्थित कैंप में ले जाकर छोड़ दिया गया। वहां उन्हें बुनियादी भोजन तक ठीक से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था और कुछ ही समय बाद उन्हें साफ-सफाई के काम के बजाय हथियार थमा दिए गए।
जब इन भारतीय युवकों ने वहां के अधिकारियों के समक्ष कड़ा ऐतराज जताया और स्पष्ट किया कि उनका अनुबंध केवल बगीचे की सफाई के लिए था न कि युद्ध अथवा सेना में सेवा देने के लिए, तो उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ मारपीट की गई। शारीरिक प्रताड़ना देकर उन्हें जबरन हथियारों का संचालन और कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग लेने पर मजबूर किया गया।
यूक्रेन मोर्चे पर तैनाती की आशंका और परिजनों की गुहार
रूसी कैंप से भेजे गए फोन कॉल और रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेशों में इन युवकों ने बेहद डरावनी स्थिति बयां की है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण सत्र पूरा होते ही उन्हें यूक्रेन सीमा के अग्रिम मोर्चे पर भेजने की तैयारी की जा रही है। युवकों ने आशंका जताई है कि युद्ध क्षेत्र में धकेले जाने पर उनकी जान जा सकती है, जिसके चलते वे बेहद डरे हुए हैं और उन्होंने तत्काल राजनयिक मदद मांगी है।
इस दर्दनाक खुलासे के बाद भारत में उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित अफजल खान के पिता अब्बास खान, उनकी पत्नी और बेटे ने भारत सरकार तथा तेलंगाना के शीर्ष अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से आगे आकर रूसी प्रशासन से संपर्क साधने की मार्मिक अपील की है। वहीं रूस के शिविर में फंसे अशोक की ओर से भी लगातार सहायता की पुकार भेजी जा रही है। यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष के बीच कई अन्य भारतीयों को भी झूठे वादों के सहारे अग्रिम मोर्चे पर झोंके जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, जिससे इन चारों परिवारों की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं।
















