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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा सीजेपी, 48 घंटे की मोहलत खत्म होते ही आंदोलन की तैयारीभारत
25 सित॰ 2026, 7:51 am (6 दिन पहले)· 0

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा सीजेपी, 48 घंटे की मोहलत खत्म होते ही आंदोलन की तैयारी

मतदाता सूचियों से करोड़ों नाम हटाने और एकतरफा कार्यप्रणाली के आरोपों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से फौरन पद छोड़ने की मांग की है। संगठन ने तय समयसीमा में कदम न उठाने पर जंतर-मंतर सहित देश भर में व्यापक प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

देश की चुनावी प्रणाली और निर्वाचन आयोग की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। हालिया खुलासों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अपने साथी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों व विचारों को नजरअंदाज कर मनमाने फैसले लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस खुलासे के बाद विपक्षी खेमे में भारी नाराजगी देखी जा रही है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच, पहले नीट पेपर लीक आंदोलन से चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग कर दी है।

सीजेपी का अल्टीमेटम और जंतर-मंतर पर दोबारा धरने की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटने के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी है। संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने पद से त्यागपत्र नहीं दिया, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके बाद दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर दोबारा बड़ा जमावड़ा कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे आयोग की मनमानी के खिलाफ चुप बैठने वाले नहीं हैं।

'इलेक्शन कमीशन ठीक करो' अभियान और तीन प्रमुख शर्तें

इस पूरे मामले को लेकर संगठन ने सह-संयोजक सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका की मौजूदगी में 'इलेक्शन कमीशन ठीक करो' नाम से एक विस्तृत मुहिम शुरू करने का ऐलान किया है। सीजेपी का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में आम नागरिकों के मताधिकार पर कुठाराघात किया जा रहा है। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया बयान के जरिए संगठन ने प्रशासन के सामने तीन बेहद स्पष्ट मांगें रखी हैं।

संगठन की पहली मांग यह है कि ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और उनके खिलाफ विधिवत आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए। दूसरी शर्त के तौर पर संगठन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने तथा जनवरी 2025 की मतदाता सूची को फिर से बहाल करने को कहा है। इसके अलावा, वर्ष 2023 में पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) कानून को पूरी तरह निरस्त कर चुनाव आयोग की स्वायत्तता में बुनियादी सुधार किए जाएं।

मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाने का गंभीर दावा

संगठन ने विभिन्न राज्यों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। सीजेपी का दावा है कि इस कवायद की आड़ में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। संगठन का स्पष्ट कहना है कि किसी भी नागरिक का नाम हटाने का फैसला केवल आयोग के स्तर पर नहीं होना चाहिए, बल्कि नाम हटाने की कानूनी वैधता साबित करने का पूरा दायित्व निर्वाचन आयोग पर होना चाहिए।

अभिजीत दिपके ने राजनीतिक दलों से भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी पार्टियों को वास्तव में लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और धांधली हो रही है, तो उन्हें ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने से परहेज करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी वर्ष 2024 के आम चुनाव और विभिन्न विधानसभा चुनावों में धांधली किए जाने का गंभीर आरोप लगाया था। अब नए घटनाक्रमों ने चुनाव आयोग पर जवाबदेही का भारी दबाव बना दिया है।

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सवाल-जवाब

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त को क्या अल्टीमेटम दिया है?
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने की मांग की है और ऐसा न करने पर देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगे हैं?
उन पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और राय को दरकिनार कर मनमाने ढंग से फैसले लेने के गंभीर आरोप लगे हैं।
सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?
ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा व आपराधिक जांच, एसआईआर प्रक्रिया रोककर जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करना, और 2023 के चुनाव आयुक्त कानून को रद्द करना।
मतदाता सूची से कितने नाम हटाए जाने का दावा किया गया है?
सीजेपी का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।
इस प्रेस वार्ता में सीजेपी के कौन से प्रमुख नेता शामिल थे?
इस दौरान संगठन के संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका मौजूद थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·5 दिन पहले

तेरह करोड़ नाम हटना कोई छोटी बात नहीं है, पर इतनी जल्दी इस्तीफा मांगना थोड़ा ज्यादा लगता है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

पिछली बार जब जंतर-मंतर पर इन युवाओं को नीट के मुद्दे पर प्रदर्शन करते देखा था, तब भी भीड़ अच्छी खासी थी। अगर 13 करोड़ नाम सच में मतदाता सूची से कटे हैं, तो मामला वाकई बड़ा है और अब चुनाव आयोग को चुप बैठने के बजाय सामने आकर जवाब देना चाहिए, वरना बात सच में हाथ से निकल जाएगी।

Rohan Gupta@rohan-gupta·5 दिन पहले

रविकेश भाई, एसआईआर प्रक्रिया और जनवरी 2025 की सूची बहाल करने वाली मांग सच में बहुत तगड़ी है, अगर ये सच है तो आयोग को वाकई जवाब देना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

पिछली बार जब जंतर-मंतर पर नीट के खिलाफ युवाओं का हुजूम देखा था, तब भी ऐसा ही तनाव था। अब चुनाव आयोग पर यह नया बवंडर खड़ा हो गया है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

करण भाई, सही कहा आपने। पिछली बार नीट के समय भी ऐसा ही माहौल था और अब निर्वाचन आयोग पर यह सीधा हमला है, देखना होगा कि 48 घंटे बाद क्या होता है।

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