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मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली छावनी में तब्दील, 50 हजार लोगों के जुटने की आशंका के बीच हजारों जवान तैनातभारत
9 अक्तू॰ 2026, 7:49 am (1 घंटे पहले)· 0

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली छावनी में तब्दील, 50 हजार लोगों के जुटने की आशंका के बीच हजारों जवान तैनात

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में सप्ताहांत पर 50,000 प्रदर्शनकारियों के जुटने की आशंका है, जिसे देखते हुए सुरक्षा बलों के 26,000 जवानों को तैनात किया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी में शनिवार और रविवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी के बीच सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। विभिन्न राज्यों और नजदीकी शहरों से करीब 50,000 प्रदर्शनकारियों के दिल्ली पहुंचने की खुफिया सूचनाओं के मद्देनजर नई दिल्ली और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा का व्यापक घेरा तैयार किया गया है। जंतर-मंतर और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों के हजारों जवानों को तैनात किया गया है।

विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान

विपक्षी दलों ने साफ किया है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) सक्रिय हैं, जिन्होंने शनिवार को जंतर-मंतर पर विशाल धरने की घोषणा की है। इस पूरे जमावड़े में कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के भी शामिल होने के पूरे आसार हैं।

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बीएनएसएस की धारा 163 लागू, सभाओं पर पूर्ण प्रतिबंध

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से नई दिल्ली इलाके में किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन या धरने की प्रशासनिक मंजूरी नहीं दी गई है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के अंतर्गत निषेधात्मक आदेश प्रभावी किए गए हैं, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। छात्रों और अन्य समूहों को पहले ही सतर्क किया जा चुका है कि 10 अक्टूबर को नई दिल्ली जिले में किसी भी तरह का जमावड़ा पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था में अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती

दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कंपनियों को विशेष तौर पर बुलाया गया है। केंद्रीय बलों के 23,000 अतिरिक्त जवानों को महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों, संसद मार्ग और केंद्रीय दिल्ली के संवेदनशील प्रतिष्ठानों की चौकसी के लिए लगाया गया है। आने वाले दिनों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों की कुल संख्या 26,000 तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा नई दिल्ली जिले में वर्तमान में 5,000 स्थानीय पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिनकी संख्या आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाकर 15,000 तक की जा सकती है।

महिला प्रदर्शनकारियों की भागीदारी को देखते हुए विशेष प्रबंध

आंदोलन में बड़ी तादाद में महिलाओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा पंक्ति में पांच महिला अर्धसैनिक कंपनियां शामिल की गई हैं। इनमें लगभग 450 से 500 अतिरिक्त महिला सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों के आयोजनों में महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति रही थी, जिसको ध्यान में रखते हुए 10 अक्टूबर के लिए यह विशेष महिला दस्ता तैयार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ जंतर-मंतर या प्रतिबंधित इलाकों में प्रवेश न कर सके।

बैरिकेडिंग, सीमाओं पर पहरा और व्यावसायिक पाबंदियां

जंतर-मंतर, राजघाट और संसद भवन की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर कई परतों वाली भारी बैरिकेडिंग लगा दी गई है। राजघाट क्षेत्र में भी निषेधाज्ञा लागू की गई है। दिल्ली की सभी सीमा चौकियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि सामूहिक रूप से आने वाले जत्थों को शहर में घुसने से रोका जा सके। इसके साथ ही आबकारी विभाग से शुक्रवार और शनिवार को शराब की दुकानें बंद रखने का आग्रह किया गया है, जबकि मध्य दिल्ली के होटलों से भी कमरों की बुकिंग पर पाबंदी बरतने को कहा गया है ताकि किसी भी संभावित अव्यवस्था को टाला जा सके।

सवाल-जवाब

दिल्ली में इतने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल क्यों तैनात किए गए हैं?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 50,000 प्रदर्शनकारियों के जुटने की आशंका के चलते सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य जमावड़ा किस जगह प्रस्तावित है?
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और कॉकरोच जनता पार्टी सहित विपक्षी दलों ने जंतर-मंतर पर धरने का आह्वान किया है।
प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के खिलाफ कौन से कानूनी प्रावधान लागू किए हैं?
पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है।
सुरक्षा व्यवस्था में कुल कितने केंद्रीय जवान शामिल किए गए हैं?
सीआरपीएफ सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के 26,000 जवान तैनात किए जा रहे हैं, जिनमें 450 से 500 महिला कर्मी शामिल हैं।
क्या दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को अनुमति दी है?
नहीं, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर या नई दिल्ली इलाके में किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है।
होटलों और शराब की दुकानों को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं?
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आबकारी विभाग से शराब की दुकानें बंद रखने और मध्य दिल्ली के होटलों से कमरे बुक न करने को कहा गया है।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 मिनट पहले

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर दिल्ली में माहौल बहुत गरमा गया है। वीकेंड पर पचास हजार लोगों के जुटने की बात सुनकर ही चिंता होने लगती है, ऊपर से इतनी भारी सुरक्षा और धारा 163 लगा दी गई है। पता नहीं शनिवार को क्या हालात बनेंगे।

Rohan Gupta@rohan-gupta·20 मिनट पहले

अरे अर्जुन, बात तो सही है तुम्हारी। पर ये समझ नहीं आ रहा कि जब धारा 163 लगी है और इजाजत भी नहीं मिली, तो क्या ये 50 हज़ार लोग सच में सड़कों पर उतरेंगे?

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

पचास हजार लोगों के जुटने की आशंका और छब्बीस हजार जवानों की तैनाती, सुनकर ही अंदाजा लग रहा है कि इस वीकेंड दिल्ली में हालात कितने तनावपूर्ण रहने वाले हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·42 मिनट पहले

करण, सही कहा आपने! पर क्या आपको नहीं लगता कि इतनी भारी सुरक्षा के बावजूद जंतर-मंतर पर भीड़ को काबू करना प्रशासन के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी?

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