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संसद के मकर द्वार से निर्वाचन सदन तक विपक्षी दलों का बड़ा प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा इंडिया गठबंधनभारत
6 अक्तू॰ 2026, 8:45 am (1 घंटे पहले)· 0

संसद के मकर द्वार से निर्वाचन सदन तक विपक्षी दलों का बड़ा प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा इंडिया गठबंधन

इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च की योजना बनाई है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतपत्र से मतदान की मांग की जा रही है.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने मोर्चा पूरी तरह खोल दिया है. पिछले हफ्ते से चल रहे गहन विचार-विमर्श और बैठकों के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करने की अंतिम रणनीति तय कर ली है. यह मामला राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार गरमाया हुआ है, जहां युवाओं और विभिन्न जन-समूहों से भी इसे समर्थन हासिल हो रहा है. विपक्षी दलों का रुख साफ है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर पीछे नहीं हटेंगे.

विपक्षी दलों की प्रमुख मांगें और विरोध का आधार

इस बड़े आंदोलन के केंद्र में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कई अहम आपत्तियां शामिल हैं. विपक्षी दलों का गठबंधन सीधे तौर पर तीन प्रमुख मांगें उठा रहा है

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  • ज्ञानेश कुमार का मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से तत्काल इस्तीफा सुनिश्चित किया जाए.
  • विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए.
  • भावी चुनावों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय पारंपरिक मतपत्रों के जरिए संपन्न कराया जाए.

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मौजूदा चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं, जिसके चलते वे सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराने को मजबूर हुए हैं.

मकर द्वार से पैदल मार्च और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

विरोध प्रदर्शन की तय रूपरेखा के अनुसार, गठबंधन के सभी सांसद मंगलवार को संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर एकत्र होंगे. वहां एकजुट होकर सभी सांसद पैदल मार्च निकालते हुए निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग के केंद्रीय मुख्यालय की ओर बढ़ेंगे. सांसदों के इस आक्रामक रुख को देखते हुए राजधानी के प्रशासनिक अमले में भी हलचल तेज हो गई है. संसद भवन से लेकर निर्वाचन सदन तक के पूरे रास्ते पर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर चाक-चौबंद सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली पुलिस सांसदों के इस पैदल मार्च को संसद परिसर से बाहर निकलकर निर्वाचन सदन की ओर कितनी दूर तक जाने की अनुमति देगी.

सपा प्रमुख की मौजूदगी और अन्य दलों का रुख

इस विरोध प्रदर्शन में ताकत दिखाने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचने की संभावना है. लोकसभा में 37 सीटों के साथ कांग्रेस के बाद सपा ही विपक्ष का दूसरा सबसे बड़ा दल है, और उनके कई सांसद पहले से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ, गठबंधन के भीतर सभी दलों की पूर्ण एकजुटता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. कांग्रेस ने इस मार्च में आम आदमी पार्टी और डीएमके की मौजूदगी तय करने के लिए दोनों को औपचारिक न्योता भेजा था. हालांकि, वर्तमान स्थिति यह है कि आम आदमी पार्टी और डीएमके दोनों ही दलों ने इस प्रस्तावित पैदल मार्च से दूरी बना रखी है.

सवाल-जवाब

इंडिया गठबंधन का पैदल मार्च कहां से कहां तक आयोजित किया जा रहा है?
यह पैदल मार्च संसद भवन के मकर द्वार से शुरू होकर चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन तक निकाला जाएगा.
विपक्षी दलों की मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्या मांग है?
विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर प्रक्रिया पर रोक और मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं.
क्या समाजवादी पार्टी इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रही है?
हां, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है और उनकी पार्टी के कई सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं.
लोकसभा में समाजवादी पार्टी की वर्तमान संख्या कितनी है?
लोकसभा में समाजवादी पार्टी के पास 37 सीटें हैं, जिससे वह कांग्रेस के बाद विपक्ष की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है.
किन दो विपक्षी दलों ने इस मार्च में शामिल होने से दूरी बना ली है?
कांग्रेस के निमंत्रण के बावजूद आम आदमी पार्टी और डीएमके ने फिलहाल इस मार्च से किनारा कर लिया है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·14 मिनट पहले

चुनाव आयोग के खिलाफ इस तरह सड़कों पर उतरना और मतपत्रों की मांग करना मुझे थोड़ा अजीब लगता है, खासकर जब आम आदमी पार्टी और डीएमके जैसे बड़े दल ही इस मार्च से दूर हैं। लगता है विपक्ष में अभी भी पूरी एकता नहीं बन पाई है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 मिनट पहले

चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरने की बात तो ठीक है, पर बैलेट पेपर की मांग पर अड़े रहना मौजूदा व्यवस्था में व्यावहारिक नहीं लगता।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·32 मिनट पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है, लेकिन बैलेट पेपर पर लौटना ही तो विपक्ष का सबसे बड़ा राजनीतिक दांव है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·56 मिनट पहले

चुनाव आयोग के खिलाफ इस प्रदर्शन में विपक्ष की पूरी एकता न दिखना सरकार के लिए राहत की बात होगी। आप और डीएमके का मार्च से दूरी बनाना सीधे तौर पर रणनीति में फूट दिखाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·56 मिनट पहले

करण भाई, आप ठीक कह रहे हैं, लेकिन अगर डीएमके और आप ने दूरी बनाई है तो इसका मतलब ये भी है कि विपक्ष में आपसी तालमेल अभी भी कमजोर है।

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