मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने मोर्चा पूरी तरह खोल दिया है. पिछले हफ्ते से चल रहे गहन विचार-विमर्श और बैठकों के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करने की अंतिम रणनीति तय कर ली है. यह मामला राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लगातार गरमाया हुआ है, जहां युवाओं और विभिन्न जन-समूहों से भी इसे समर्थन हासिल हो रहा है. विपक्षी दलों का रुख साफ है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर पीछे नहीं हटेंगे.
विपक्षी दलों की प्रमुख मांगें और विरोध का आधार
इस बड़े आंदोलन के केंद्र में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कई अहम आपत्तियां शामिल हैं. विपक्षी दलों का गठबंधन सीधे तौर पर तीन प्रमुख मांगें उठा रहा है
- ज्ञानेश कुमार का मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से तत्काल इस्तीफा सुनिश्चित किया जाए.
- विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए.
- भावी चुनावों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय पारंपरिक मतपत्रों के जरिए संपन्न कराया जाए.
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मौजूदा चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं, जिसके चलते वे सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराने को मजबूर हुए हैं.
मकर द्वार से पैदल मार्च और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विरोध प्रदर्शन की तय रूपरेखा के अनुसार, गठबंधन के सभी सांसद मंगलवार को संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर एकत्र होंगे. वहां एकजुट होकर सभी सांसद पैदल मार्च निकालते हुए निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग के केंद्रीय मुख्यालय की ओर बढ़ेंगे. सांसदों के इस आक्रामक रुख को देखते हुए राजधानी के प्रशासनिक अमले में भी हलचल तेज हो गई है. संसद भवन से लेकर निर्वाचन सदन तक के पूरे रास्ते पर दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर चाक-चौबंद सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली पुलिस सांसदों के इस पैदल मार्च को संसद परिसर से बाहर निकलकर निर्वाचन सदन की ओर कितनी दूर तक जाने की अनुमति देगी.
सपा प्रमुख की मौजूदगी और अन्य दलों का रुख
इस विरोध प्रदर्शन में ताकत दिखाने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचने की संभावना है. लोकसभा में 37 सीटों के साथ कांग्रेस के बाद सपा ही विपक्ष का दूसरा सबसे बड़ा दल है, और उनके कई सांसद पहले से ही दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ, गठबंधन के भीतर सभी दलों की पूर्ण एकजुटता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. कांग्रेस ने इस मार्च में आम आदमी पार्टी और डीएमके की मौजूदगी तय करने के लिए दोनों को औपचारिक न्योता भेजा था. हालांकि, वर्तमान स्थिति यह है कि आम आदमी पार्टी और डीएमके दोनों ही दलों ने इस प्रस्तावित पैदल मार्च से दूरी बना रखी है.






















