अक्टूबर के पहले पखवाड़े में देश के विशाल हिस्से से मानसूनी हवाओं की रवानगी शुरू हो चुकी है, मगर वातावरण में नमी और मौसमी हलचलों का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। दक्षिणी तटीय ओडिशा और पश्चिमोत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) ने उत्तर, पूर्व तथा मध्य भारत के विस्तृत भूभाग में मौसमी गतिविधियों को दोबारा सक्रिय कर दिया है। इसी दबाव तंत्र के प्रभाव स्वरूप मैदानी क्षेत्रों से लेकर पहाड़ी ढलानों तक पंद्रह राज्यों में बादलों की गरज, बिजली कड़कने और झमाझम फुहारों की चेतावनी सामने आई है। इस दौरान वायुमंडल में अचानक उठने वाले बवंडर के कारण हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज किए जा सकते हैं, जबकि पर्वतीय भागों में चट्टानें दरकने और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है।
राष्ट्रीय राजधानी और निकटवर्ती क्षेत्रों में बादलों का पहरा
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जनपदों में 9 अक्टूबर के दौरान आकाश में घने बादलों का डेरा रहने तथा अलग-अलग हिस्सों में बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। वातावरण में मौजूद आद्रता और पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त असर से यहां मेघगर्जन के साथ पानी बरसने की पूरी उम्मीद है। दिन चढ़ने के साथ यहां वायु प्रवाह लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर को छू सकता है। तापमान की दृष्टि से देखें तो दिन का उच्चतम पारा 31 डिग्री सेल्सियस तथा भोर अथवा रात का न्यूनतम स्तर 22 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द सिमटने का अनुमान है। यद्यपि वर्षा से वातावरण में हल्की ठंडक महसूस होगी, परंतु बादलों की मौजूदगी और उमस भरी हवाएं दोपहर के वक्त बेचैनी पैदा कर सकती हैं। नोएडा, गाजियाबाद तथा समीपवर्ती उपनगरीय बस्तियों में जलजमाव तथा गीली सड़कों के कारण वाहनों की चाल धीमी पड़ सकती है, जिससे आवागमन में अतिरिक्त समय लग सकता है।
उत्तर प्रदेश के विस्तृत अंचल में 60 किलोमीटर रफ्तार की आंधी
राज्य के पश्चिमी छोर से लेकर पूर्वी सीमा तक मौसम में तेज हलचल दर्ज की जा सकती है। जिन जनपदों में आंधी-तूफान और मूसलाधार पानी का विशेष अलर्ट दिया गया है, उनमें गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, रायबरेली, बस्ती तथा गोरखपुर शामिल हैं। इन इलाकों में वायु की गति यकायक 60 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा तक पहुंच सकती है, जिससे जर्जर छप्परों और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। प्रादेशिक राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने और रात का पारा 22 डिग्री सेल्सियस तक खिसकने का आकलन है। मौसम विशेषज्ञों ने खुले में कृषि कार्य कर रहे किसानों को आगाह किया है कि वे बादलों के रुख और गरज-चमक की तीव्रता को भांपकर ही फसलों की कटाई या सिंचाई संबंधी फैसले लें, ताकि आकाशीय बिजली से सुरक्षित रहा जा सके।
बिहार में मेघगर्जन और तूफानी हवाओं का अलर्ट
गंगा के मैदानी भाग में बसे बिहार के कई जनपदों में 9 अक्टूबर को अचानक मौसमी परिस्थितियां पलटने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। रोहतास, बक्सर, गया, जहानाबाद, दरभंगा, मधुबनी और सहरसा में तीव्र गर्जना के साथ वर्षा का पूर्वानुमान लगाया गया है। इन जिलों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पछुआ व पुरवा हवाओं के झोंके चलने की संभावना है। राज्य की राजधानी पटना में दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम पारा 23 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की गणना की गई है। बादलों के सक्रिय होने के दौरान नागरिकों को खुले मैदानों, जलभराव वाले स्थानों तथा विशाल वृक्षों के नीचे शरण लेने से पूरी तरह बचने का परामर्श दिया गया है, क्योंकि बिजली गिरने की घटनाओं में यह सबसे संवेदनशील स्थान साबित होते हैं।
झारखंड के पठारी भूभाग में आंधी और वर्षा से बढ़ेगी दुश्वारी
पड़ोसी राज्य झारखंड के कई हिस्सों में तेज झंझावात और बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। प्रभावित होने वाले मुख्य जनपदों में धनबाद, देवघर, हजारीबाग, चतरा, बोकारो, सरायकेला, जमशेदपुर, पलामू तथा पूर्वी सिंहभूम को चिह्नित किया गया है। इन भूभागों में वायु वेग 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ सकता है, जिससे अस्थायी निर्माणों और बिजली की तारों पर खतरा मंडराएगा। राजधानी रांची में दिन के समय पारा 26 से 28 डिग्री सेल्सियस तथा रात के समय 18 से 21 डिग्री सेल्सियस के मध्य डोलने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे तेज अंधड़ के वक्त कमजोर वृक्षों, होर्डिंग्स और बिजली के खंभों से सुरक्षित दूरी बनाकर रखें, क्योंकि निचले इलाकों में पानी भरने से नालों के उफनने का खतरा रहेगा।
पश्चिम बंगाल में समुद्री प्रभाव से मूसलाधार बारिश का अंदेशा
तटीय और मैदानी पश्चिम बंगाल में चक्रवाती प्रभाव का सबसे गहरा असर देखने को मिल सकता है। नादिया, हावड़ा, मुर्शिदाबाद, मालदा, पुरुलिया, बीरभूम, दुर्गापुर तथा पर्वतीय दार्जिलिंग में तूफानी हवाओं के साथ भारी बारिश का खतरा जताया गया है। यहां वायुमंडल में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से प्रचंड हवाएं चलने की आशंका है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। महानगर कोलकाता में दिन का पारा 29 से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच तथा रात्रि का तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रहने की संभावना है। लगातार पानी बरसने से महानगरीय क्षेत्रों और ग्रामीण बस्तियों में जलभराव की गंभीर चुनौती सामने आ सकती है।
राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में बादलों की आमद
मरुभूमि से युक्त राजस्थान में सामान्य तौर पर अक्टूबर के दौरान खिली धूप और शुष्क वातावरण की प्रधानता रहती है, परंतु मौजूदा प्रणाली के चलते कुछ जनपदों में फुहारें राहत की फुहार लेकर आ सकती हैं। जिन प्रमुख जिलों में मेघगर्जन और वर्षा का संकेत दिया गया है, उनमें अजमेर, बीकानेर, धौलपुर, भरतपुर और बूंदी प्रमुख हैं। इन भूभागों में लगभग 30 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ठंडी हवाएं चल सकती हैं। राजधानी जयपुर में दिन का अधिकतम पारा 35 डिग्री सेल्सियस तथा रात का न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज होने का अनुमान है। पूरे राज्य में मौसमी तीव्रता एक जैसी नहीं रहेगी, अपितु केवल चिन्हित अंचलों में ही बादलों की मेहरबानी दिखेगी।
मध्य भारत, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में व्यापक असर
चक्रवाती हलचल की परिधि केवल पूर्वी भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भी तेज हवाओं और छिटपुट बारिश के रूप में दिखाई देगा। इसी क्रम में पूर्वोत्तर के असम, मेघालय सहित अन्य राज्यों तथा दक्षिण भारत के चुनिंदा क्षेत्रों में बिजली गिरने और तीव्र फुहारें पड़ने की चेतावनी बनी हुई है। उत्तर के पर्वतीय क्षेत्रों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में अचानक वर्षा के चलते ढलानों पर मिट्टी खिसकने की आशंका बढ़ गई है, जिससे पहाड़ी राजमार्गों पर सफर करने वाले मुसाफिरों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। इसके अतिरिक्त पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में भी बादलों की आवाजाही और हल्की से मध्यम वर्षा के संकेत दिए गए हैं।






















