दिल्ली के निवासियों के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर वे थोड़ी राहत की सांस ले सकते हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह चिंतामुक्त नहीं हुई है। हर साल नवंबर के जहरीले दौर से पहले राजधानी दिल्ली की जो फजीहत सबसे प्रदूषित शहर के रूप में होती थी, वह ताज अब देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सिर पर सज चुका है। अमेरिकी एजेंसी आईक्यूएयर की लेटेस्ट रैंकिंग के अनुसार, मुंबई ने दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए भारत में सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की है और वह दुनिया भर के शहरों में पांचवें पायदान पर पहुंच गई है।
राष्ट्रीय राजधानी की स्थिति और वैश्विक आंकड़े
भले ही मुंबई ने इस मामले में दिल्ली को पछाड़ दिया हो, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि दिल्ली की आबोहवा में कोई बड़ा सुधार आ गया है। इस ताजा सूची में दिल्ली की पोजीशन बहुत ज्यादा संतोषजनक नहीं कही जा सकती है, क्योंकि वह मुंबई से ठीक एक पायदान नीचे यानी दुनिया भर के शहरों में छठे स्थान पर मजबूती से काबिज है। आईक्यूएयर की इस ग्लोबल लिस्ट में कुल 122 शहरों को शामिल किया गया था, जिनमें भारत के कई महानगरों की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
इस रैंकिंग के टॉप 10 शहरों में अकेले भारत के 3 शहर अपनी जगह बनाए हुए हैं। इस फेरबलिस्त में जहां मुंबई पांचवें और दिल्ली छठे स्थान पर है, वहीं देश का एक और प्रमुख महानगर कोलकाता इस सूची में दसवें पायदान पर खड़ा है। कोलकाता का एक्यूआई 124 दर्ज किया गया है। इस तरह से देखा जाए तो मुंबई ने इस बार भारतीय शहरों में सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा दर्ज करने के मामले में सबको पीछे छोड़ दिया है और वह देश का नंबर एक प्रदूषित शहर बन गया है।
खराब हवा और ग्राउंड-लेवल ओजोन की समस्या
मुंबई में हवा के इस स्तर तक गिरने की मुख्य वजह उसका एयर क्वालिटी इंडेक्स है जो लगातार अनहेल्दी या खराब श्रेणी में बना हुआ है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई का एक्यूआई 152 तक पहुंच गया है, जिसे स्वास्थ्य के लिहाज से अस्वास्थ्यकर माना गया है। वहीं दिल्ली के प्रदूषण से मुंबई की एक बात बिल्कुल अलग है। दिल्ली में जहां आमतौर पर मुख्य प्रदूषक पीएम 2.5 या पीएम 10 होते हैं, वहीं मुंबई में मुख्य प्रदूषक कणों के रूप में ग्राउंड-लेवल ओजोन सामने आ रहा है।
मौसम में बदलाव और मानसून की बेरुखी ने मुंबई की फिजाओं को और ज्यादा जहरीला बना दिया है। इस साल मानसून के दौरान बारिश काफी कम हुई और जो बारिश हुई वह भी समय से पहले ही खत्म हो गई। इसके अलावा शहर में लगातार गर्मी का प्रकोप और उमस भरी नमी बनी हुई है। इन तमाम मौसमी परिस्थितियों ने मिलकर प्रदूषण के स्तर को खतरनाक रूप से बढ़ाने का काम किया है। इस पूरे महीने मुंबई ने पिछले कम से कम एक दशक के तीन सबसे गर्म दिन देखे हैं, जहां अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है।
एल नीनो और वैज्ञानिक कारण
इस पूरी स्थिति के पीछे वैज्ञानिकों ने कुछ खास जलवायु पैटर्न्स को जिम्मेदार ठहराया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (एनआईएएस) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) से जुड़े वायुमंडलीय वैज्ञानिक गुफरान बेग ने इस गंभीर स्थिति को एल नीनो जैसे जलवायु पैटर्न, ऊंचे तापमान और हवा की रफ्तार में आई भारी गिरावट से जोड़ा है। उन्होंने विस्तार से समझाया कि कमजोर हवाएं और गर्म तथा नम मौसम मिलकर हवा के प्राकृतिक संचार को पूरी तरह रोक रहे हैं।
नतीजतन, हवा का बहाव न होने के कारण प्रदूषण फैलाने वाले हानिकारक कण ऊपर आसमान में नहीं उड़ पा रहे हैं और जमीन की सतह के बेहद करीब ही लगातार जमा होते जा रहे हैं। एल नीनो की स्थिति प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्री पानी के तापमान में होने वाली बढ़ोतरी को कहा जाता है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। वहीं ग्राउंड-लेवल ओजोन ऊपरी वायुमंडल की ओजोन परत से बिल्कुल अलग होती है। ऊपरी परत जहां हमें सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचाती है, वहीं जमीन के पास यह ओजोन नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के सूरज की रोशनी में आपस में मिलने से बनती है, जो गर्म और धूप वाले मौसम में बहुत तेजी से सक्रिय होती है।
सरकारी आंकड़ों में अंतर और स्थानीय स्थिति
आईक्यूएयर द्वारा जारी किए गए ये आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के डाटा से काफी अलग नजर आते हैं। सीपीसीबी के आधिकारिक डैशबोर्ड के अनुसार मुंबई का शहर-स्तरीय एक्यूआई 98 दिखाया गया है, जिसे संतोषजनक श्रेणी में गिना जाता है, जबकि वहां दिल्ली का एक्यूआई इससे ज्यादा है। हालांकि सीपीसीबी के ही स्टेशन-स्तर के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं और यह बताते हैं कि मुंबई के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क है।
मुंबई शहर के कुल 23 सक्रिय निगरानी स्टेशनों में से 12 जगहों पर हवा की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई है, लेकिन कुछ खास इलाके ऐसे हैं जहां हालात बेहद खराब हैं। देवनार में एक्यूआई 156, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स यानी बीकेसी में 145 और भांडुप के खिंडीपाड़ा इलाके में यह 129 दर्ज किया गया है। इन विशिष्ट स्थानों पर मुख्य प्रदूषक के रूप में पीएम 2.5 और पीएम 10 ही सामने आए हैं। इन दोनों प्लेटफॉर्म्स के आंकड़ों में यह अंतर इसलिए देखने को मिलता है क्योंकि दोनों की निगरानी प्रणालियां, गणना करने के तरीके, औसत निकालने की समय-अवधि और उपयोग किए जाने वाले डेटा के स्रोत बिल्कुल अलग होते हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और कचरा जलाने का असर
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी एमपीसीबी के एक अधिकारी ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी जगह पर कचरा या प्लास्टिक जलाने से पैदा होने वाला प्रदूषण सिर्फ उसी खास बिंदु तक सीमित नहीं रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर देवनार जैसी जगहों पर कचरा जलाया जाता है, तो वहां उठने वाला धुआं और प्रदूषण आसपास के तमाम इलाकों में भी तेजी से फैल जाता है। चेम्बूर और कुर्ला जैसे आसपास के इलाकों में भी लगातार अस्वास्थ्यकर एक्यूआई दर्ज किया जा रहा है, जो यह साबित करता है कि कचरा और प्लास्टिक जलाने का यह खतरनाक असर पास की रिहायशी और कमर्शियल जगहों को भी अपनी चपेट में ले रहा है।
बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शहर के सभी 26 वार्डों में प्रदूषण के हॉटस्पॉट की गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। नगर प्रशासन अब प्रदूषण के इन तमाम मुख्य स्रोतों की सटीक पहचान करके उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पूरी तैयारी कर रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का यह साफ तौर पर कहना है कि गर्मी का बढ़ना, बारिश का कम होना और हवा की रफ्तार का मंद पड़ना, इन सबका मेल ही मुंबई की हवा को तेजी से जहरीला बना रहा है। ऐसे में आम नागरिकों को भी यह सलाह दी गई है कि वे लगातार हवा की गुणवत्ता पर नजर रखें और घर से बाहर निकलते वक्त जरूरी एहतियात व सावधानियां जरूर बरतें।


















