पश्चिम बंगाल की चर्चित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले कानूनी और सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. जेल में बंद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि यदि प्रधान को कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत मिल जाती है, तो उन्हें उपचुनाव लड़ने से रोका न जाए और चुनाव लड़ने दिया जाए.
पुराने मामलों में गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत का ब्योरा
कांग्रेस पार्टी ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए मिलन प्रधान को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, 18 सितंबर को पुलिस ने उन्हें वर्ष 2007 से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले के सिलसिले में हिरासत में ले लिया था. इसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें कई अन्य लंबित मामलों में भी गिरफ्तार दिखाया गया. ये सभी मुकदमे वर्ष 2007 के ऐतिहासिक नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौर से जुड़े बताए गए हैं. इन प्राथमिकियों में हत्या, जानलेवा हमला, अपहरण और उपद्रव भड़काने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं.
वर्तमान में मिलन प्रधान न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं. निचली अदालत के आदेशानुसार एक मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि वर्ष 2007 के ही एक अन्य मामले में उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि 5 अक्टूबर तक निर्धारित की गई है.
अदालत में राज्य सरकार का पक्ष और छह मामलों की स्थिति
गिरफ्तारी और संभावित दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ मिलन प्रधान ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने अपनी रिट याचिका में दर्ज मुकदमों के आधार पर किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने की गुहार लगाई थी. मंगलवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष इस मामले की विस्तृत सुनवाई हुई.
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार के अधिवक्ताओं ने अदालत को सूचित किया कि याचिकाकर्ता ने जिन छह मुकदमों में संरक्षण की मांग की थी, उनमें से पांच मामले पहले ही बंद किए जा चुके हैं. इसके अतिरिक्त सरकारी वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि सूची में शामिल छठे मामले में मिलन प्रधान का नाम बतौर आरोपी दर्ज ही नहीं है. अदालत ने राज्य सरकार के इस आधिकारिक बयान को अपने रिकॉर्ड पर दर्ज कर लिया.
जमानत पर टिकी चुनावी दावेदारी और मतदान की तारीख
राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता को सक्षम अदालत से जमानत प्राप्त होती है, तो उन्हें चुनावी मैदान में उतरने दिया जाना चाहिए. कानूनी जानकारों के मुताबिक अदालत की इस टिप्पणी का सीधा अर्थ यही है कि प्रधान का चुनाव लड़ना पूरी तरह उनकी नियमित जमानत अर्जी के मंजूर होने पर निर्भर करेगा.
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के तहत 6 अक्टूबर 2026 को मतदान कराया जाना है, जबकि नियमों के अनुसार चुनाव प्रचार की समयसीमा 4 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगी. ऐसे में जब उनकी न्यायिक हिरासत की मियाद 3 अक्टूबर और 5 अक्टूबर तक है, तब बिना जमानत मिले उनका बाहर आकर प्रचार कर पाना संभव नहीं होगा. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वह अपने प्रत्याशी के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी संघर्ष जारी रखेगी. वहीं पुलिस महकमे का पक्ष है कि 2007 के मुकदमों में लंबे समय से गैर-जमानती वारंट लंबित थे, जिसके आधार पर नियमानुसार गिरफ्तारी की गई है.























