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नवीन चौधरी कौन हैं? बिहार के दरभंगा से ताल्लुक रखने वाले और जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल पाने वाले पहले गैर-स्थानीय IAS अधिकारी की कहानीभारत
7 सित॰ 2026, 9:45 pm (14 दिन पहले)· 2

नवीन चौधरी कौन हैं? बिहार के दरभंगा से ताल्लुक रखने वाले और जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल पाने वाले पहले गैर-स्थानीय IAS अधिकारी की कहानी

बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले 1994 बैच के IAS अधिकारी नवीन कुमार चौधरी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद वहां का डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल करने वाले पहले वरिष्ठ गैर-स्थानीय अधिकारी बन गए हैं।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के गलियारों में कुछ ऐसी कहानियां होती हैं जो खास प्रशासनिक बदलावों के साथ हमेशा के लिए दर्ज हो जाती हैं। ऐसा ही एक नाम नवीन कुमार चौधरी का है, जिन्होंने केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में एक नया इतिहास रचा। बिहार के दरभंगा जिले के एक छोटे से इलाके से निकलकर प्रशासनिक महकमे की शीर्ष सीढ़ियां चढ़ने वाले नवीन चौधरी ने वहां की प्रशासनिक व्यवस्था में एक अहम मुकाम हासिल किया है। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव के बाद सामने आए नए नियमों के तहत उन्हें वहां का आधिकारिक निवासी माना गया, जिससे वह इस तरह का दर्जा पाने वाले देश के पहले वरिष्ठ गैर-स्थानीय सिविल सेवा अधिकारी बन गए।

बिहार के दरभंगा से दिल्ली और फिर जम्मू-कश्मीर तक की लंबी प्रशासनिक यात्रा

नवीन चौधरी की शुरुआती जिंदगी और पढ़ाई-लिखाई बिहार के दरभंगा जिले में ही गुजरी। हायाघाट प्रखंड के अंतर्गत आने वाले मझौलिया गांव के परिवेश में पले-बढ़े नवीन ने अपनी शुरुआती शिक्षा स्थानीय स्तर पर ही पूरी की। इसके बाद उन्होंने आगे की स्कूली पढ़ाई ललितेश्वर मधुसूदन हाई स्कूल से संपन्न की और उच्च शिक्षा के लिए पटना का रुख किया, जहां उन्होंने अर्थशास्त्र विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए वह देश की राजधानी दिल्ली चले गए। अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने वर्ष 1994 में सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की और IAS अधिकारी बने।

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जम्मू-कश्मीर कैडर और ढाई दशकों से अधिक का प्रशासनिक सफर

सिविल सेवा की परीक्षा पास करने के बाद नवीन चौधरी को जम्मू-कश्मीर कैडर आवंटित किया गया, जिसके बाद उनका अधिकांश प्रशासनिक जीवन इसी क्षेत्र को समर्पित रहा। वह करीब छब्बीस वर्षों से अधिक समय से इस क्षेत्र में अपनी प्रशासनिक सेवाएं दे रहे थे। इस लंबी अवधि के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभागों की कमान संभाली। उन्होंने वित्त विभाग के साथ-साथ पर्यटन विभाग जैसे अहम महकमों में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के प्रधान सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं, जो उनके प्रशासनिक करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदला प्रशासनिक परिदृश्य

वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद इस पूरे क्षेत्र के प्रशासनिक और कानूनी ढांचे में कई बड़े बदलाव किए गए। इन्हीं बदलावों के तहत वहां निवास से जुड़े नए नियम लागू किए गए, जिनके अंतर्गत निर्धारित अवधि तक रहने वाले या विशिष्ट श्रेणियों में आने वाले व्यक्तियों को डोमिसाइल प्रमाणपत्र दिए जाने का प्रावधान किया गया था। जून 2020 में जब ये नए नियम प्रभावी हुए, तो प्रशासनिक तंत्र के भीतर इसकी प्रक्रिया तेजी से शुरू हुई। इसी प्रक्रिया के तहत नवीन चौधरी को भी आधिकारिक तौर पर वहां का निवासी घोषित किया गया।

जून 2020 की वह तारीख जब जारी हुआ पहला डोमिसाइल प्रमाणपत्र

जम्मू जिले की बाहू तहसील के तत्कालीन तहसीलदार रोहित शर्मा द्वारा 24 जून 2020 को नवीन चौधरी को आधिकारिक तौर पर डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी किया गया था। उस समय वह कृषि उत्पादन विभाग में प्रधान सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस प्रमाणपत्र के मिलते ही वह नए नियमों के दायरे में आकर यह विशिष्ट दर्जा प्राप्त करने वाले पहले वरिष्ठ गैर-स्थानीय सिविल सेवक बन गए। इस व्यवस्था के तहत उन लोगों को पात्रता दी गई थी जो या तो लंबे समय से वहां निवास कर रहे थे या नियमों के अन्य निर्धारित मानदंडों को पूरा करते थे।

मझौलिया गांव में आज भी गूंजती है इस उपलब्धि की चर्चा

बिहार के दरभंगा जिले का मझौलिया गांव आज भी अपने इस होनहार बेटे की इस विशिष्ट उपलब्धि पर गर्व महसूस करता है। गांव के स्थानीय निवासी और नवीन चौधरी के पड़ोसी कमलेंदु झा के अनुसार, ग्रामीण परिवेश से निकलकर देश के एक संवेदनशील और दूरदराज के क्षेत्र में इतने लंबे समय तक उत्कृष्ट प्रशासनिक सेवाएं देना और वहां कानूनी रूप से डोमिसाइल हासिल करना पूरे इलाके के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इस पूरे घटनाक्रम और वहां संपत्ति खरीदने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समय-समय पर कई रिपोर्टों में भी उल्लेख किया गया है, जो इस प्रशासनिक बदलाव के प्रभावों को रेखांकित करती हैं।

सवाल-जवाब

नवीन चौधरी कौन हैं?
नवीन चौधरी 1994 बैच के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं जो मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं।
उन्हें डोमिसाइल प्रमाणपत्र कब मिला?
उन्हें 24 जून 2020 को जम्मू जिले की बाहू तहसील के तत्कालीन तहसीलदार द्वारा डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी किया गया था।
वह किस पद पर कार्यरत थे जब उन्हें यह प्रमाणपत्र मिला?
प्रमाणपत्र मिलने के समय वह कृषि उत्पादन विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे।
नवीन चौधरी का संबंध बिहार के किस गांव से है?
उनका संबंध बिहार के दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के मझौलिया गांव से है।
यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण मानी गई?
अनुच्छेद 370 हटने के बाद नए नियम लागू होने के बाद वह जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल पाने वाले पहले वरिष्ठ गैर-स्थानीय IAS अधिकारी बने।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

अनुच्छेद 370 हटने के बाद नवीन चौधरी का डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल करना कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से एक बड़ा मील का पत्थर है। यह मामला दिखाता है कि कैसे नए कानूनी प्रावधानों के तहत लंबे समय से सेवारत अधिकारियों के लिए स्थानीय निवास की शर्तें पूरी हुईं। भविष्य में यह नीतिगत बदलाव अन्य अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए भी स्थानीय प्रशासनिक और कानूनी ढांचे में एक नया कानूनी दृष्टांत बनेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

नवीन चौधरी द्वारा जम्मू-कश्मीर का डोमिसाइल प्रमाणपत्र हासिल करना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद वहां के प्रशासनिक और कानूनी ढांचे में बुनियादी बदलाव आए। ढाई दशकों से अधिक की सेवा के बाद किसी अखिल भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारी का यह दर्जा पाना यह संकेत देता है कि अब उन लोक सेवकों के लिए स्थानीय अधिकार और पहचान के नए द्वार खुल गए हैं जो सुदूर राज्यों से आकर दशकों तक इस संवेदनशील क्षेत्र के विकास और शासन व्यवस्था में अपनी सेवाएं देते रहे हैं।

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