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नेशनल कॉन्फ्रेंस के बदलते रुख से केंद्र और कश्मीर के बीच अविश्वास पैदा हुआ, महबूबा मुफ्ती का बड़ा हमलाभारत
2 नव॰ 2026, 5:28 pm (4 दिन पहले)· 3

नेशनल कॉन्फ्रेंस के बदलते रुख से केंद्र और कश्मीर के बीच अविश्वास पैदा हुआ, महबूबा मुफ्ती का बड़ा हमला

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर जम्मू-कश्मीर और केंद्र के बीच दूरी बढ़ाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर मामले का स्थायी हल बल प्रयोग के बजाय केवल सार्थक संवाद से ही संभव है।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बयानों का दौर तेज हो गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं के एक बड़े सम्मेलन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के आवाम के बीच जो अविश्वास बना हुआ है, उसकी असली जिम्मेदार नेशनल कॉन्फ्रेंस ही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का यह सबसे पुराना राजनीतिक दल हमेशा से अपने राजनीतिक नफे-नुकसान के अनुसार कश्मीर मसले पर अपना रुख बदलता रहा है।

ऐतिहासिक विलय और जनमत संग्रह की मांग पर सवाल

सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने इतिहास के पन्नों का हवाला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आज जो संदेह और दूरी का माहौल दिखाई देता है, उसकी नींव किसने रखी थी। उन्होंने कहा कि 79 साल पहले जब भारत को आजादी मिली थी, उसी दौर में 79 साल पहले जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था। उस ऐतिहासिक विलय दस्तावेज पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने हस्ताक्षर किए थे। मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी उन्होंने पूरे होशोहवास में भारत के साथ जुड़ने का रास्ता चुना था।

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महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा कि इस बड़े फैसले के महज कुछ ही वर्षों के भीतर नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने वादे से पलट गई। पार्टी ने अचानक अपना पुराना रुख त्यागकर जनमत संग्रह की मांग उठानी शुरू कर दी। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अविश्वास और संशय का यह बीज नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ही लोगों के दिलों में बोया। पूरे 22 वर्षों तक पाकिस्तान में जनमत संग्रह कराने का राग अलापा गया और फिर 1975 में अचानक सब कुछ भुलाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली गई। उन्होंने 1975 के इंदिरा गांधी और शेख अब्दुल्ला समझौते का स्पष्ट जिक्र किया, जिसके जरिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक बिना किसी विधायक के राज्य के मुख्यमंत्री बन गए थे।

सत्ता की खातिर रुख बदलने और विशेष दर्जे का जिक्र

पीडीपी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पाने की लालसा में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आम जनता की भावनाओं से समझौता किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही कुर्सी मिली, लोगों से जनमत संग्रह की मांग भूलने को कह दिया गया। महबूबा के अनुसार, भारत के शीर्ष नेताओं चाहे वे जवाहरलाल नेहरू हों या डॉ. बी.आर. आंबेडकर, सभी ने जम्मू-कश्मीर को एक विशेष दर्जा और अलग संविधान सौंपा था। लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस की अवसरवादी नीतियों ने न केवल यहां के नेताओं बल्कि पूरे कश्मीर के आवाम को लेकर दिल्ली के मन में एक गहरा शक पैदा कर दिया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस दल की राजनीति ने हमेशा जम्मू-कश्मीर के मूल हितों को भारी नुकसान पहुंचाया है। जब तक यह दल सत्ता में रहेगा, तब तक इलाके में स्थायी शांति कायम होना बेहद मुश्किल है।

भाजपा गठबंधन और शांति के लिए बातचीत की वकालत

कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वर्ष 2014 में सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ किए गए गठबंधन को लेकर पीडीपी कार्यकर्ताओं को किसी भी तरह से संकोच या शर्म महसूस करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जब भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोग उस गठबंधन पर तंज कसें, तो उन्हें तुरंत याद दिलाएं कि किस तरह उनके अपने नेताओं के बार-बार बदलते रुख ने कश्मीर के लोगों को दशकों तक भारी मुसीबतों में झोंका है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मौजूदा अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का नाम लिए बिना उन्होंने आरोप लगाया कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके नेता यह दावा करके लोगों को भड़का रहे हैं कि पाकिस्तान कश्मीर की हिफाजत कर रहा है। महबूबा ने कहा कि यह असल में दिल्ली के हुक्मरानों को यह जताने का एक संकेत है कि कश्मीरी पाकिस्तान के पाले में खड़े हैं। अंत में उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए साफ किया कि जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान किसी तरह के दबाव या जबरदस्ती के उपायों से नहीं निकल सकता, बल्कि इसके लिए केवल ईमानदार बातचीत का रास्ता ही एकमात्र विकल्प है।

सवाल-जवाब

महबूबा मुफ्ती ने केंद्र और कश्मीर के बीच अविश्वास के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि इस पार्टी ने समय-समय पर कश्मीर मुद्दे पर अपना रुख बदला है।
महबूबा मुफ्ती ने भारत में विलय के इतिहास को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 79 साल पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।
1975 के समझौते को लेकर महबूबा ने क्या आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि 22 साल तक जनमत संग्रह की मांग करने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सत्ता पाने के लिए 1975 में मुख्यमंत्री पद स्वीकार कर लिया और मांग छोड़ दी।
महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए क्या उपाय सुझाया?
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर मुद्दे को किसी भी तरह के दबाव या जबरदस्ती से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।
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टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·3 दिन पहले

राजनीति में अपनी कुर्सी बचाने के लिए बार-बार रंग बदलना पुराना खेल है। इतिहास गवाह है कि वादों से मुकरने वालों ने हमेशा आम जनता को ही ठगा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

कश्मीर के ये पुराने सियासी दांव-पेच देखकर श्रीनगर में बिताया वो वक्त याद आ गया जब हर चौराहे पर बस यही चर्चा होती थी कि कौन कब पाला बदलेगा। महबूबा जी जो कह रही हैं, सचमुच आम आदमी को आज भी उलझन में डाल देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर महबूबा जी के इन आरोपों के बाद क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस इस पर कोई जवाब देगी या बात आई-गई हो जाएगी?

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

महबूबा जी अब पुरानी बातें निकालकर नेशनल कॉन्फ्रेंस को घेर रही हैं, पर क्या महज़ अतीत के फैसलों से आज के अविश्वास को पूरी तरह समझाया जा सकता है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

रोहन भाई, अतीत की बात सही है, पर क्या इससे दिल्ली और कश्मीर के बीच का आज का अविश्वास सचमुच खत्म हो जाएगा?

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