उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले सहित पूरे राज्य में आलू उत्पादक किसानों को कोल्ड स्टोरेज की किल्लत और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। यदि किसानों को सरकारी कोल्ड स्टोरेज में अपनी उपज रखने के लिए जगह नहीं मिलती है, तो वे बिना किसी परेशानी के अपनी फसल को निजी कोल्ड स्टोरेज में रख सकते हैं। राज्य सरकार की भामाशाह भाव स्थिरता योजना वर्ष 2026-27 के तहत ऐसे किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य बाजार में आलू की दरें गिरने पर किसानों को वित्तीय नुकसान से बचाना और उन्हें उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाना है।
पात्रता के मानदंड और उत्पादन का मानक
इस कल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए कृषि विभाग और उद्यान विभाग द्वारा स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं। जिला उद्यान अधिकारी राम अकबाल के अनुसार जिले के सभी पात्र किसान इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। पट्टे पर जमीन लेकर आलू की खेती करने वाले किसान भी इस योजना का लाभ पाने के हकदार बनाए गए हैं। योजना के नियमों के अनुसार एक किसान अधिकतम दो हेक्टेयर आलू बोए गए क्षेत्रफल के लिए ही अनुदान का दावा कर सकता है। प्रति हेक्टेयर 240 कुंतल का मानक उत्पादन निर्धारित किया गया है, हालांकि किसी भी स्थिति में एक किसान को अधिकतम 200 कुंतल आलू पर ही अनुदान की राशि दी जाएगी।
अनुदान राशि की गणना और बिक्री की अनिवार्यता
योजना के तहत केवल एफएक्यू (FAQ) गुणवत्ता वाले आलू पर ही वित्तीय सहायता देय होगी, जिसका आकार 30 मिलीमीटर से 80 मिलीमीटर के बीच होना चाहिए। सरकार द्वारा देय अनुदान की गणना दो आधारों पर की जाएगी। किसान को उत्पादन लागत का 25 प्रतिशत या फिर उत्पादन लागत और वास्तविक बिक्री दर के बीच का अंतर, इन दोनों में से जो भी राशि कम होगी, वही अनुदान के रूप में मिलेगी। यह सहायता राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के जरिए हस्तांतरित की जाएगी। अनुदान पाने के लिए बिक्री का लेनदेन बैंकिंग चैनल से होना अनिवार्य है। किसान अपनी उपज को राज्य की पंजीकृत मंडियों, उपमंडियों, निजी कोल्ड स्टोरेज परिसरों या अपने खेत से ही पंजीकृत व्यापारियों को बेच सकते हैं। खेत पर बिक्री करने की स्थिति में बिक्री स्थल की जियोटैग लोकेशन दर्ज करना अनिवार्य रहेगा।
आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया
योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे। किसानों को आधार कार्ड या कृषक आईडी के जरिए ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके साथ ही बैंक passbook या रद्द किए गए चेक की प्रति जमा करनी होगी जिसमें खाताधारक का नाम, खाता संख्या और IFSC कोड स्पष्ट रूप से दर्ज हो। जमीन और बोए गए रकबे के सत्यापन के लिए अद्यतन खसरा-खतौनी की प्रति तथा किसान व व्यापारी के बीच हुए क्रय-विक्रय समझौते का प्रपत्र भी जरूरी है। इन सभी दस्तावेजों की स्वप्रमाणित छायाप्रतियां संबंधित जिले के उद्यान अधिकारी कार्यालय में जांच के लिए जमा करनी होंगी। योजना से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश देखने और ऑनलाइन आवेदन दर्ज करने के लिए किसान उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग का आधिकारिक पोर्टल पर जा सकते हैं।



















