आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खोज से हिला कंप्यूटर साइंस, एक्सपोनेंशियल टाइम हाइपोथिसिस पर उठे सवाललाइव: चक्रवात अर्णब का ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी तांडव, 55 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्टहजारों साल पुराना है कंडोम का इतिहास, कभी भेड़ की आंत और कछुए के खोल से तैयार होते थे ये कवरपेरेंट्स की ये 5 गलतियां घर में बढ़ाती हैं भाई-बहनों के बीच मनमुटाव, ताउम्र रिश्तों में आ जाती है कड़वाहटरिवाइव हुआ समझौता: वोक्सवैगन ग्रुप के साथ एआई असिस्टेंट साझा करेगी रिवियनडोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कैसे बढ़ी ट्रांसजेंडर बच्चों के माता-पिता की मानसिक चिंता?स्पेन ट्रेन हादसा: 69 लोगों की मौत, युवा एथलीट और पूर्व मंत्री भी शामिलनीट-यूजी और नेट विवादों के साये में एनटीए का कायापलट, सीआईएसएफ को सौंपी गई सुरक्षा और हटाए गए 600 विशेषज्ञद डेविल्स रिव्यू (2026): कैसे आधी सदी पुराना कल्ट क्लासिक इस हेलोवीन सीजन का सबसे बड़ा सिनेमाई धमाका बन गयादिल्ली का जहरीला प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ दिमाग को भी बना रहा है गंभीर रूप से बीमार, स्ट्रोक का खतरा बेहद तेज
नई दिल्ली में जंतर मंतर समेत पार्लियामेंट स्ट्रीट इलाके में निषेधाज्ञा जारी, धरने और नारों पर पूरी पाबंदीदिल्ली
2 अक्तू॰ 2026, 9:41 am (28 दिन पहले)· 3

नई दिल्ली में जंतर मंतर समेत पार्लियामेंट स्ट्रीट इलाके में निषेधाज्ञा जारी, धरने और नारों पर पूरी पाबंदी

दिल्ली पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट अनुभाग में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी है। 21 अक्टूबर तक बिना लिखित स्वीकृति के पांच या अधिक लोगों के जुटने, जुलूस निकालने और हथियार या बैनर लाने पर पाबंदी रहेगी।

राजधानी की सड़कों पर विभिन्न मांगों को लेकर बढ़ रही हलचल के बीच सुरक्षा प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव आयोग के संदर्भ में कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से प्रदर्शन का आह्वान और महिला सुरक्षा के सवाल पर छात्राओं द्वारा दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलग-अलग परिसरों में किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस बल सतर्क हो गया है। विभिन्न संगठनों की तरफ से इंटरनेट पर जंतर मंतर पर जुटने की अपील की जा रही थी, जिसे देखते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से कड़े प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए हैं। पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने के दायरे में आने वाले किसी भी स्थल पर बिना पूर्व अनुमति के कोई भी विरोध सभा आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

नई दिल्ली क्षेत्र में शांति और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की कवायद

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई दिल्ली जिले के अत्यंत व्यस्त मार्गों और पैदल चलने वालों के भारी आवागमन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। अनियंत्रित रैलियों या मजमों की वजह से न सिर्फ जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है, बल्कि आम नागरिकों की जान-माल की हिफाजत और कानून व्यवस्था के लिए भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसी वजह से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 163 का सहारा लेकर व्यापक प्रतिबंध प्रभावी कर दिए गए हैं। इसका प्राथमिक उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर वाहनों की सुगम आवाजाही बनाए रखना और किसी भी प्रकार की अशांति को पनपने से रोकना है।

ये भी पढ़ें

प्रतिबंध के तहत किन गतिविधियों पर लगी है रोक

जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, चिह्नित दायरे में बिना आधिकारिक मंजूरी के किसी भी गतिविधि को गैरकानूनी माना जाएगा। प्रतिबंधों का मुख्य ब्योरा इस प्रकार है

  • पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक जगह जमा होने पर पूरी रोक रहेगी।
  • सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी किस्म का भाषण देने, नारेबाजी करने, जुलूस निकालने, धरने पर बैठने या प्रदर्शन करने की मनाही है।
  • लाठी, डंडे, तलवार, भाले, ईंट, पत्थर, नुकीले अस्त्र-शस्त्र, बैनर और तख्तियां साथ लेकर चलने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा।
  • संबंधित नक्शे और शेड्यूल में निर्धारित सार्वजनिक स्थलों पर बिना लिखित स्वीकृति के किसी भी प्रकार का जमावड़ा प्रतिबंधित रहेगा।

मजिस्ट्रियल शक्तियों का प्रयोग और कानूनी प्रावधान

केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस एक्ट, 1978 (1978 का 34) की धारा 70 की उपधारा (1) के खंड (बी) के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पुलिस महकमे को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के अधिकार और जिम्मेदारियां सौंप रखी हैं। यह पूरी व्यवस्था दिल्ली पुलिस कमिश्नर के सामान्य नियंत्रण के तहत कार्य करती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार की 09.09.2010 की अधिसूचना संख्या U-11036/1/2010-UTL के तहत यह अधिकार दिया गया है। वर्तमान में यह दायित्व नई दिल्ली जिले के सब-डिवीजन पार्लियामेंट स्ट्रीट के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर अजय शर्मा के पास सुरक्षित है।

अनुमति की शर्तें, समय सीमा और उल्लंघन पर सजा

निषेधाज्ञा के दायरे में पार्लियामेंट स्ट्रीट सब-डिवीजन का समूचा क्षेत्र शामिल किया गया है। हालांकि, आदेश के साथ संलग्न नक्शे में दर्शाए गए जंतर मंतर रोड के विशेष छूट वाले हिस्से को कुछ मामलों में राहत दी गई है। यदि किसी आयोजन के लिए पूर्व में लिखित इजाजत हासिल की गई हो, तब भी उस कार्यक्रम को किसी भी सूरत में शाम 05 बजे के बाद आगे जारी रखने की अनुमति नहीं होगी।

यह प्रशासनिक आदेश 23.08.2026 से प्रभावी हुआ है और पूरे 60 दिनों की अवधि के लिए यानी 21.10.2026 तक (दोनों तिथियों सहित) लागू रहेगा, बशर्ते इसे समय से पूर्व निरस्त न किया जाए। चूंकि हर नागरिक को व्यक्तिगत रूप से ऐसा नोटिस थमाना संभव नहीं है, इसलिए इसे एकतरफा तौर पर पारित कर जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है और संबंधित जिला अतिरिक्त कार्यालयों के सूचना पट्टों पर इसकी प्रतियां चस्पा की गई हैं। अधिकारियों ने साफ ताकीद की है कि इस व्यवस्था की अवहेलना करने वाले किसी भी शख्स के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

सवाल-जवाब

जंतर मंतर इलाके में कौन सी कानूनी धारा लागू की गई है?
इस पूरे क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है।
यह प्रतिबंधात्मक आदेश कब से कब तक प्रभावी रहेगा?
यह आदेश 23 अगस्त 2026 से प्रभावी हुआ है और 21 अक्टूबर 2026 तक पूरे 60 दिनों के लिए लागू रहेगा।
क्या अनुमति लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जा सकता है?
हां, जंतर मंतर रोड के निर्धारित छूट वाले हिस्से में पूर्व लिखित अनुमति से कार्यक्रम हो सकता है, लेकिन वह किसी भी हाल में शाम 05 बजे के बाद जारी नहीं रहेगा।
निषेधाज्ञा के तहत किन चीजों पर मुख्य रूप से पाबंदी है?
पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने, नारेबाजी करने, लाठी, तलवार, पत्थर जैसे हथियार या बैनर-तख्तियां लाने पर पाबंदी है।
आदेश का उल्लंघन करने वालों पर किस कानून के तहत कार्रवाई होगी?
आदेश की अवहेलना करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·27 दिन पहले

जंतर-मंतर पर ऐसा सन्नाटा तब भी देखा था जब पिछली बार धारा लगी थी, तब मेरा खुद का माइक टूट गया था भीड़ में।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

चुनाव और प्रदर्शनों के बीच जंतर मंतर पर पाबंदी लगना आम बात है, पर इससे आवाज़ दबाने के सवाल फिर खड़े होते हैं।

Sophie Laurent@sophie-laurent·27 दिन पहले

अर्जुन, आवाज़ दबाना तो गलत है, पर वीवीआईपी इलाके में जाम और सुरक्षा भी तो बड़ा मुद्दा है।

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

राजधानी में बार-बार धारा 163 लगानी पड़ रही है, तो क्या आम आदमी के लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात कहने का हक धीरे-धीरे छिनता जा रहा है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

रोहन भाई, कॉकरोच जनता पार्टी नाम सच में अजीब है, कभी चुनाव आयोग के बाहर प्रदर्शन तो कभी जंतर-मंतर पर।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp