केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए वरिष्ठ अधिकारी अनुराग जैन को नीति आयोग का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है. भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1989 बैच के यह होनहार अधिकारी तुरंत प्रभाव से अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे. केंद्र में यह महत्वपूर्ण पद बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम का कार्यकाल समाप्त होने की वजह से रिक्त हुआ था. आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, नव नियुक्त प्रमुख का इस पद पर कार्यकाल दो साल का होगा, या फिर सरकार द्वारा कोई अगला आदेश जारी होने तक वह इस जिम्मेदारी को निभाते रहेंगे.
राज्य प्रशासन से केंद्र का सफर
इस बड़े राष्ट्रीय पद पर आने से ठीक पहले तक यह दिग्गज अधिकारी मध्य प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे. उन्होंने राज्य के सबसे बड़े नौकरशाह की कुर्सी 3 अक्टूबर 2024 को संभाली थी. पिछले साल दिल्ली में राष्ट्रीय नेतृत्व और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच लंबी बातचीत हुई थी. उस चर्चा के परिणामस्वरूप, साल 2025 में सरकार ने उन्हें सीधा एक वर्ष का सेवा विस्तार प्रदान किया था. उस आदेश के आधार पर उनका मौजूदा कार्यकाल 31 अगस्त 2026 तक के लिए निर्धारित हो चुका था. लेकिन अब नीति आयोग में उनकी नई नियुक्ति ने उनके करियर को एक अलग दिशा दे दी है.
शानदार शिक्षा और खेल जगत में उपलब्धियां
नीति आयोग के नए प्रमुख का शैक्षणिक इतिहास बहुत ही प्रभावशाली है. उनका जन्म मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर में हुआ था. अपनी उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने देश के जाने माने संस्थान आईआईटी खड़गपुर का रुख किया. साल 1986 में उन्होंने वहां से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की पढ़ाई पूरी की. उस दौरान उन्होंने अपने बैच में दूसरा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था. प्रशासन की गहरी समझ विकसित करने के लिए वह बाद में अमेरिका गए. वहां उन्होंने सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी के मैक्सवेल स्कूल में दाखिला लिया और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की.
किताबी ज्ञान और प्रशासनिक कामकाज के अलावा उनका खेलों से भी गहरा नाता रहा है. इतने बड़े पद पर बैठे किसी अधिकारी के लिए खेलों में ऐसी उपलब्धि होना बहुत खास बात है. उन्होंने अपने जीवन में टेनिस खेलते हुए 11 राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार अपने नाम किए हैं. सिर्फ टेनिस ही नहीं, क्रिकेट के मैदान पर भी उन्होंने अपना जलवा दिखाया है और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में मध्य प्रदेश की टीम का प्रतिनिधित्व किया है.
दशकों का गहरा प्रशासनिक अनुभव
अपने इतने लंबे करियर के दौरान इस 1989 बैच के अधिकारी ने राज्य और केंद्र दोनों ही स्तरों पर कई नाजुक जिम्मेदारियां उठाई हैं. अगर मध्य प्रदेश की बात करें, तो वह भोपाल शहर के कलेक्टर रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने वित्त विभाग में अपर मुख्य सचिव का पद भी संभाला है. वह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सचिव के रूप में भी एक अहम भूमिका निभा चुके हैं. राष्ट्रीय स्तर पर भी उनका काम बहुत शानदार रहा है. उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी निभाई है. साथ ही, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव के तौर पर भी उन्होंने बेहतरीन काम किया. उनके इसी गहरे अनुभव की वजह से अतीत में कई सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने के काम में बहुत तेजी देखी गई थी.
मध्य प्रदेश में नए विकल्प की तलाश
दिल्ली में हुई इस बड़ी नियुक्ति का सीधा असर मध्य प्रदेश की नौकरशाही पर पड़ा है. वर्तमान मुख्य सचिव के दिल्ली जाने से राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद पर अब जगह खाली हो जाएगी. इसलिए अब राज्य सरकार को अपने स्थानीय प्रशासन का नेतृत्व करने के लिए एक नए और काबिल अधिकारी की तलाश करनी होगी. इस बड़े पद को हासिल करने की दौड़ अभी से शुरू हो चुकी है. राज्य सचिवालय में इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए तीन बड़े नाम सबसे आगे चल रहे हैं. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश कुमार राजौरा, मनोज गोविल और पंकज अग्रवाल को इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है.


















