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ओडिशा में नए पुलिस महानिदेशक के चयन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, यूपीएससी की बैठक टलीभारत
13 अग॰ 2026, 9:02 pm (3 दिन पहले)· 2

ओडिशा में नए पुलिस महानिदेशक के चयन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, यूपीएससी की बैठक टली

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की चयन प्रक्रिया पर 18 अगस्त तक रोक लगा दी है। अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को आदेश दिया है कि वह उम्मीदवार के चयन के लिए बुलाई गई अपनी बैठक को तुरंत टाल दे।

ओडिशा के नए पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी के चयन को लेकर कानूनी विवाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की महत्वपूर्ण बैठक को तत्काल स्थगित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया है कि 18 अगस्त तक राज्य के नए पुलिस प्रमुख के नाम पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। यह आदेश प्रकाश सिंह मामले में तय किए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद जारी किया गया है।

चिदंबरम ने अदालत में उठाई प्रक्रियागत अनियमितता

वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने एक जनहित याचिका का उल्लेख किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकार डीजीपी चयन प्रक्रिया को पूरा करने में स्थापित नियमों को दरकिनार कर रही है। चिदंबरम ने अदालत को सूचित किया कि यूपीएससी उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए आज ही बैठक करने की तैयारी में था, जिस पर तुरंत हस्तक्षेप करना आवश्यक हो गया था।

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अपनी दलीलों में पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया कि याचिका की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले एक अधिकारी को रातोरात पदोन्नति दी गई। उन्होंने दावा किया कि यह जल्दबाजी इसलिए की गई ताकि उस अधिकारी का नाम यूपीएससी को भेजे जाने वाले संभावित दावेदारों के पैनल में शामिल किया जा सके। उनके अनुसार, यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस सुधारों के संदर्भ में दिए गए प्रकाश सिंह फैसले के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।

राज्य सरकार का पक्ष और शुरुआती अदालती टिप्पणी

दूसरी तरफ, ओडिशा सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि चयन की प्रक्रिया में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने सेवा से जुड़े मामलों में जनहित याचिका की स्वीकार्यता पर भी सवाल खड़े किए और तर्क दिया कि ऐसी याचिकाओं के जरिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि इस चयन प्रक्रिया से प्रभावित किसी भी अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया है। इस अवलोकन के बाद एक समय ऐसा लग रहा था कि अदालत तुरंत कोई अंतरिम रोक लगाने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन मामले में आगे आए नए मोड़ ने स्थिति को बदल दिया।

एमिकस क्यूरी के बयान के बाद बदला अदालत का रुख

मामले में नया मोड़ तब आया जब पीठ ने प्रकाश सिंह मामले के न्याय-मित्र यानी एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से राय मांगी। राजू रामचंद्रन ने जनहित याचिका का समर्थन करते हुए अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि ओडिशा में अपनाई जा रही प्रक्रिया में वास्तव में उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। एमिकस क्यूरी के इस रुख ने पूरे मामले की गंभीरता को बढ़ा दिया।

एमिकस क्यूरी की राय को ध्यान में रखते हुए सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने अपना रुख बदला और यूपीएससी के वकील को तुरंत निर्देश जारी किए। अदालत ने आदेश दिया कि आज प्रस्तावित बैठक को स्थगित किया जाए और 18 अगस्त तक चयन की प्रक्रिया पर अंतिम मुहर न लगाई जाए। अब इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 18 अगस्त को विस्तृत सुनवाई करेगा, जिसके बाद ही राज्य के नए डीजीपी के चयन का रास्ता साफ हो सकेगा।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा डीजीपी नियुक्ति मामले में क्या आदेश दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के नए डीजीपी के चयन पर 18 अगस्त तक रोक लगा दी है और संघ लोक सेवा आयोग को अपनी बैठक टालने का निर्देश दिया है।
अदालत के सामने यह मामला किसने उठाया था?
वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने याचिका दायर कर प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया था।
चयन प्रक्रिया पर क्या मुख्य आरोप लगाया गया था?
आरोप था कि सुनवाई से ठीक एक दिन पहले एक अधिकारी को जल्दबाजी में पदोन्नत किया गया ताकि उनका नाम संघ लोक सेवा आयोग के पैनल में शामिल किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा सरकार का पक्ष किसने रखा?
ओडिशा के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने राज्य सरकार की ओर से नियमों के उल्लंघन के आरोपों का खंडन किया।
मामले में एमिकस क्यूरी की क्या भूमिका रही?
प्रकाश सिंह मामले के एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में गाइडलाइंस का उल्लंघन हो रहा है, जिसके बाद अदालत ने रोक का आदेश दिया।
ओडिशा डीजीपी विवाद पर अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर 18 अगस्त को अगली विस्तृत सुनवाई करेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·3 दिन पहले

यह घटनाक्रम प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत अखंडता के बीच के गहरे तनाव को उजागर करता है। जब शीर्ष स्तर की नियुक्तियों में इस तरह की जल्दबाजी और प्रक्रियागत फेरबदल के आरोप लगते हैं, तो यह सीधे तौर पर सार्वजनिक विश्वास और सुशासन की संस्कृति को प्रभावित करता है। न्यायिक हस्तक्षेप से भले ही कुछ समय के लिए ठहराव आ गया हो, लेकिन यह मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमारी प्रशासनिक प्रणालियां अभी भी पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रूप से काम करने में सक्षम हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

यह प्रकरण एक बार फिर राज्यों और न्यायपालिका के बीच पुलिस सुधारों के अनुपालन को लेकर चल रहे अंतर्द्वंद को उजागर करता है। डीजीपी के चयन में 'प्रकाश सिंह' दिशानिर्देशों की अवहेलना के आरोप और रातोरात पदोन्नति जैसी प्रक्रियागत अनियमितताएं शासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। एमिकस क्यूरी की आपत्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट का यह रुख यह संकेत देता है कि 18 अगस्त की अगली सुनवाई में प्रशासनिक नियुक्तियों पर और सख्त दिशानिर्देश आ सकते हैं, जो देश भर की पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करेंगे।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·3 दिन पहले

यह मामला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक स्वायत्तता और न्यायिक निगरानी के बीच के नाजुक संतुलन को रेखांकित करता है। जिस प्रकार रातोरात पदोन्नति देकर पैनल में नाम शामिल करने के आरोप लगे हैं, वे राज्यों में पुलिस नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया में कार्यपालिका के अत्यधिक हस्तक्षेप को दर्शाते हैं। यदि 18 अगस्त को अदालत का रुख कड़ा रहता है, तो यह देश भर के अन्य राज्यों के लिए भी डीजीपी नियुक्तियों में पारदर्शिता और यूपीएससी के निर्देशों के अनिवार्य पालन को लेकर एक कड़ा कानूनी मानक स्थापित करेगा, जिससे राजनीतिक दबाव से मुक्त पुलिस तंत्र की परिकल्पना को बल मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

ओडिशा में डीजीपी चयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की यह रोक 'प्रकाश सिंह मामले' के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों की महत्ता को फिर रेखांकित करती है। वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम की दलीलें और एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन की राय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस सुधारों के मामले में प्रक्रियात्मक पारदर्शिता से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तय करेगी कि राज्य सरकार द्वारा की गई नियुक्तियों और प्रशासनिक जल्दबाजी पर अदालत का रुख कितना कड़ा रहता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह कानूनी गतिरोध केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति का विवाद नहीं है, बल्कि यह सुशासन और संस्थागत पारदर्शिता की कसौटी है। कॉ कॉर्पोरेट और वित्तीय बाजारों की तरह ही, शासन प्रणालियों में भी यदि नियमों से खिलवाड़ हो या अंतिम समय में फेरबदल किए जाएं, तो यह निवेशकों और जनता दोनों के बीच सिस्टम की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। 18 अगस्त के बाद का निर्णय यह तय करेगा कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक નિર્ણयों में अनुपालन और जवाबदेही का स्तर क्या रहना चाहिए, जिसका दूरगामी असर प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा।

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