पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानबिटगेट पर बड़ा साइबर हमला, हॉट वॉलेट से उड़ाए गए 351 मिलियन डॉलरपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से राय
पलामू की अनु दुबे सब्जियों के छिलकों से बना रही हैं जैविक खाद, छह साल से चला रही हैं छत का किचन गार्डनझारखंड
5 सित॰ 2026, 11:04 am (20 दिन पहले)· 2

पलामू की अनु दुबे सब्जियों के छिलकों से बना रही हैं जैविक खाद, छह साल से चला रही हैं छत का किचन गार्डन

पलामू जिले की मेदिनीनगर निवासी अनु दुबे सब्जियों के अवशेष, चावल की भूसी, मिट्टी और बालू से जैविक खाद तैयार कर रही हैं, जिसे वह अपने घर की छत पर बने किचन गार्डन में इस्तेमाल करती हैं।

झारखंड के पलामू जिले की मेदिनीनगर में रहने वाली अनु दुबे रसोई से निकलने वाले सब्जियों के छिलकों और बचे हुए हिस्सों को कचरे में फेंकने के बजाय उनसे जैविक खाद तैयार कर रही हैं। इस खाद को बनाने में वह चावल की भूसी, मिट्टी, सब्जियों के अवशेष और बालू जैसी घर में ही आसानी से मिल जाने वाली चीजों का इस्तेमाल करती हैं, और करीब एक महीने की प्रक्रिया के बाद यह मिश्रण खाद के रूप में तैयार हो जाता है।

छह साल से खेती से जुड़ीं, छत पर बनाया किचन गार्डन

अनु दुबे पिछले करीब छह वर्षों से खेती-बाड़ी से जुड़ी हुई हैं। जमीन की कमी उनके शौक के आड़े नहीं आई, उन्होंने अपने घर की छत को ही सब्जियां और दूसरे पौधे उगाने की जगह बना लिया। इसी छत पर बने किचन गार्डन में वह सब्जियां और पौधे तो उगाती ही हैं, साथ ही उनके लिए जरूरी खाद भी खुद तैयार करती हैं। उनका कहना है कि घर में रोजाना निकलने वाले जैविक कचरे को फेंकने के बजाय उसका सही इस्तेमाल कर खाद बनाई जा सकती है, जिससे कचरा भी कम होता है और पौधों को पोषण भी मिलता है।

ये भी पढ़ें

चार चीजों से तैयार होती है यह जैविक खाद

अनु दुबे के मुताबिक खाद तैयार करने का तरीका काफी आसान है। सबसे पहले सब्जियां काटने के बाद बचे हुए छिलके और अवशेष इकट्ठा किए जाते हैं। इसके बाद इसमें चावल की भूसी, मिट्टी और बालू मिलाई जाती है। इस पूरे मिश्रण को एक जगह रखकर करीब एक महीने तक प्रोसेस होने दिया जाता है। इस दौरान मिश्रण में नमी बनाए रखना जरूरी होता है और समय-समय पर इसे पलटते रहना पड़ता है, ताकि उसमें मौजूद जैविक पदार्थ ठीक से विघटित हो सकें। धीरे-धीरे यही मिश्रण भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदल जाता है।

गमलों और क्यारियों के लिए फायदेमंद

अनु दुबे बताती हैं कि तैयार खाद को गमलों और क्यारियों की मिट्टी में मिलाकर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे रसोई से रोज निकलने वाले जैविक कचरे का बेहतर उपयोग हो जाता है, और घर पर किचन गार्डन तैयार करने वाले लोगों को बाजार से खाद खरीदने की जरूरत भी काफी हद तक कम हो जाती है। यानी एक तरफ कचरा कम होता है, तो दूसरी तरफ पौधों को प्राकृतिक पोषण भी मिलता रहता है।

इन चीजों को खाद में मिलाने से बचें

हालांकि अनु दुबे यह भी सतर्क करती हैं कि खाद बनाते समय हर तरह का कचरा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। प्लास्टिक, कांच, धातु, रासायनिक पदार्थ और तेल-मसाले वाला कचरा इस मिश्रण में कतई नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि इससे खाद की गुणवत्ता खराब हो सकती है और यह पौधों के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।

सवाल-जवाब

अनु दुबे कौन हैं और वह क्या करती हैं?
वह झारखंड के पलामू जिले के मेदिनीनगर की निवासी हैं और अपने घर की छत पर बने किचन गार्डन के लिए जैविक खाद तैयार करती हैं।
खाद बनाने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है?
सब्जियों के कटे हुए अवशेष, चावल की भूसी, मिट्टी और बालू को मिलाकर यह खाद तैयार की जाती है।
खाद तैयार होने में कितना समय लगता है?
मिश्रण को करीब एक महीने तक प्रोसेस किया जाता है, इस दौरान नमी बनाए रखनी होती है और समय-समय पर उसे पलटना पड़ता है।
यह खाद किस काम आती है?
तैयार खाद को गमलों और क्यारियों की मिट्टी में मिलाकर पौधों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
खाद बनाते समय किन चीजों से बचना चाहिए?
प्लास्टिक, कांच, धातु, रासायनिक पदार्थ और तेल-मसाले वाला कचरा खाद में नहीं मिलाना चाहिए।
अनु दुबे कब से खेती कर रही हैं?
वह पिछले करीब छह वर्षों से खेती से जुड़ी हुई हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में कचरा प्रबंधन और सतत जीवनशैली कैसे व्यक्तिगत स्तर पर संभव है। अनु दुबे का यह मॉडल बताता है कि अगर नगर निकाय जैविक कचरे के स्रोत पर ही उसके पृथक्करण और खाद निर्माण को बढ़ावा दें, तो लैंडफिल पर बोझ काफी कम हो सकता है। आने वाले समय में इस तरह की पहलें सामुदायिक स्तर पर अपनाई जाएं, तो पर्यावरण संरक्षण में बड़ा बदलाव आ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

यह खबर पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार अनु दुबे बिना किसी बाहरी मदद के जैविक कचरे का प्रबंधन कर रही हैं, यदि इसे कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर आवासीय सोसायटियों और स्थानीय निकायों के लिए अनिवार्य बना दिया जाए, तो कचरा प्रबंधन से जुड़े विवादों और अवैध डंपिंग मामलों में भारी कमी आ सकती है। इस तरह के व्यक्तिगत प्रयास दीर्घकालिक रूप से सार्वजनिक स्वच्छता और नगरीय व्यवस्था को सुदृढ़ करने में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp