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पलामू में टपक सिंचाई का कमाल, कम पानी में बंपर पैदावार और सरकार दे रही 90 प्रतिशत तक भारी अनुदानझारखंड
1 सित॰ 2026, 8:38 am (24 दिन पहले)· 4

पलामू में टपक सिंचाई का कमाल, कम पानी में बंपर पैदावार और सरकार दे रही 90 प्रतिशत तक भारी अनुदान

पलामू क्षेत्र में आधुनिक टपक सिंचाई और स्प्रिंकलर तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे कम पानी में बेहतर फसल उत्पादन के साथ-साथ खाद की बचत भी होती है। सरकार इस प्रणाली को अपनाने के लिए किसानों को 90 प्रतिशत तक का आकर्षक अनुदान दे रही है।

पलामू में कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है क्योंकि आज के समय में पानी की बढ़ती कमी और सिंचाई के पारंपरिक तरीकों की सीमाओं के बीच ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली किसानों के लिए एक बहुत ही कारगर और फायदेमंद विकल्प बनकर उभरी है। खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान अब बेहद सीमित मात्रा में उपलब्ध पानी के जरिए भी अपनी फसलों का बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं। इस आधुनिक कृषि पद्धति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिंचाई के साथ-साथ फर्टिलाइजर यानी उर्वरक देने की भी सुविधा मिलती है, जिससे पौधों को नमी के साथ-साथ जरूरी पोषक तत्व भी एक ही समय में और सीधे तौर पर मिल जाते हैं, जिससे उनकी सेहत और बढ़वार काफी अच्छी होती है।

सीधे जड़ों तक पहुंचता है पानी और पोषण

कृषि वैज्ञानिक विनोद पांडे ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसान अनुदान प्राप्त करके इन आधुनिक प्रणालियों का पूरा लाभ उठा सकते हैं। किसान इस योजना के तहत स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम दोनों को अपने खेतों में लगवा सकते हैं। ड्रिप सिंचाई में एक विशेष नेटवर्क तैयार किया जाता है, जिसके जरिए पानी में घुलनशील उर्वरकों को मिलाकर सीधे पौधों तक पहुंचाया जाता है। विशेष तौर पर जो किसान सब्जियों और बागवानी फसलों की खेती से जुड़े हैं, उनके लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक बेहद उपयोगी साबित होती है। इस सिस्टम की मदद से पानी सीधे पौधों की जड़ों के पास टपकता है, जिससे पानी की बर्बादी लगभग न के बराबर होती है और मिट्टी के अंदर लंबे समय तक जरूरी नमी बरकरार रहती है।

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फर्टिगेशन तकनीक से होता है खाद का सही इस्तेमाल

इसी विशेष सेटअप के जरिए फर्टिगेशन यानी सिंचाई के पानी के साथ ही उर्वरक देने की पूरी व्यवस्था आसानी से की जा सकती है। इस वैज्ञानिक तरीके से खाद का बिल्कुल सटीक और सही उपयोग होता है, जिससे पौधों को उनकी जरूरत के हिसाब से ही पोषक तत्व मिलते हैं। आज भी हमारे देश में बहुत से किसान पारंपरिक फ्लड इरिगेशन यानी पूरे खेत में बाढ़ की तरह अत्यधिक मात्रा में पानी भरकर सिंचाई करने के पुराने तरीके का ही उपयोग करते हैं। हालांकि, यह बात ध्यान देने योग्य है कि हर फसल को इतनी अधिक मात्रा में पानी की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती है। जरूरत से ज्यादा और अनियंत्रित तरीके से सिंचाई करने से न केवल पानी की भारी बर्बादी होती है, बल्कि पौधों की संवेदनशील जड़ें भी कमजोर होकर सड़ने लगती हैं और कई अन्य गंभीर कृषि समस्याएं भी पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके ठीक विपरीत, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकें पानी को पूरी तरह नियंत्रित और नपे-तुले तरीके से सीधे फसल तक पहुंचाती हैं।

खरपतवार की समस्या से मिलती है बड़ी राहत

टपक सिंचाई प्रणाली का एक और बहुत बड़ा फायदा यह भी देखने को मिलता है कि इससे खेतों में खरपतवार की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है। चूंकि पानी पूरे खेत की मिट्टी में फैलने के बजाय केवल और केवल पौधों की जड़ों के आसपास ही पहुंचता है, इसलिए खाली जमीन सूखी रहती है और वहां घास-फूस या अवांछित पौधे नहीं पनप पाते। इससे मुख्य फसलों को पर्याप्त नमी और पोषण मिलता है और उनकी ग्रोथ बिना किसी रुकावट के बेहतरीन तरीके से होती है। खासकर सब्जी और बागवानी फसलों के मामले में यह आधुनिक तकनीक किसानों के लिए कुल उत्पादन को बढ़ाने और खेती की लागत को न्यूनतम स्तर पर लाने में बेहद मददगार साबित हो सकती है, जिससे किसानों का मुनाफा बढ़ जाता है।

सरकार दे रही है भारी-भरकम अनुदान का लाभ

देशभर में सूक्ष्म सिंचाई को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत किसानों को आर्थिक सहायता और अनुदान की सुविधा प्रदान की जाती है। निर्धारित पात्रता रखने वाले किसानों को सरकारी नियमों और योजना की सभी शर्तों के दायरे में रहते हुए स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई सिस्टम की स्थापना पर पूरे 90 प्रतिशत तक का भारी अनुदान मिल सकता है। ऐसी स्थिति में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी क्षेत्र के कृषि विभाग या उद्यान विभाग से संपर्क करके इस पूरी योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें और समय पर इसके लिए आवेदन करें। आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर पलामू और आसपास के किसान कम पानी में भी उन्नत खेती कर सकते हैं और अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और मजबूत कदम उठा सकते हैं।

सवाल-जवाब

ड्रिप सिंचाई प्रणाली क्या है?
ड्रिप सिंचाई एक आधुनिक तकनीक है जिसके माध्यम से पानी और घुलनशील उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों के पास टपकाए जाते हैं।
किसानों को कितना अनुदान मिल सकता है?
पात्र किसानों को नियमों और शर्तों के अनुसार स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम पर 90 प्रतिशत तक का अनुदान मिल सकता है।
फर्टिगेशन किसे कहते हैं?
सिंचाई के पानी के साथ उर्वरक मिलाकर सीधे पौधों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को फर्टिगेशन कहा जाता है।
यह तकनीक किन फसलों के लिए सबसे उपयोगी है?
यह तकनीक सब्जियों और बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।
योजना की जानकारी के लिए कहां संपर्क करें?
किसान अपने क्षेत्र के कृषि या उद्यान विभाग से संपर्क करके इस योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

पलामू क्षेत्र में जल संकट और भू-जल स्तर की गिरावट के बीच कृषि अनुदान योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुरक्षा और संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ा एक सकारात्मक कदम है। यदि 90 प्रतिशत तक के इस वित्तीय अनुदान का दुरुपयोग रोकने के लिए पारदर्शी प्रशासनिक निगरानी और भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ भविष्य के जल विवादों को भी टाल सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

पलामू क्षेत्र में भू-जल संकट और पारंपरिक सिंचाई की सीमाएं लंबे समय से कृषि विकास में बड़ी बाधा रही हैं। ड्रिप तकनीक और नब्बे प्रतिशत अनुदान जैसी सरकारी योजनाओं का यह सकारात्मक असर तभी स्थायी होगा जब धरातल पर बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो। प्रशासनिक निगरानी और फर्टिगेशन जैसी वैज्ञानिक विधियों का यह मेल इस क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और फसल सुरक्षा को एक नई दिशा दे सकता है।

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