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पाली में चचेरी बहन ने पेश की अनोखी मिसाल, 13 घंटे चले मैराथन ऑपरेशन में भाई को दिया नया जीवनराजस्थान
30 अग॰ 2026, 10:28 pm (25 दिन पहले)· 2

पाली में चचेरी बहन ने पेश की अनोखी मिसाल, 13 घंटे चले मैराथन ऑपरेशन में भाई को दिया नया जीवन

राजस्थान के पाली जिले के खिवाड़ा गांव में चचेरी बहन हितेशी राठौड़ ने अपने बीमार भाई गजराज सिंह को लीवर डोनेट कर एक मिसाल कायम की है। अहमदाबाद के एक अस्पताल में साढ़े तेरह घंटे चले जटिल ऑपरेशन के बाद दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

राजस्थान के पाली जिले के अंतर्गत आने वाले सुमेरपुर उपखंड के खिवाड़ा गांव से भाई और बहन के बीच के अगाध स्नेह का एक अनूठा उदाहरण प्रकाश में आया है। यहां के निवासी गजराज सिंह की तबियत अचानक बहुत अधिक बिगड़ गई, जिसके बाद चिकित्सकों ने उनके स्वास्थ्य की गहन जांच की। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उनका लीवर पूरी तरह खराब हो चुका है और उनकी जान बचाने के लिए फौरन लीवर ट्रांसप्लांट करवाना ही एकमात्र विकल्प बचा है। इस गंभीर खुलासे से पूरे परिवार में गहरी चिंता और संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

जब इस विकट परिस्थिति और लीवर प्रत्यारोपण की अनिवार्य आवश्यकता की जानकारी गजराज सिंह की चचेरी बहन हितेशी राठौड़ को मिली, तो उन्होंने बिल्कुल भी संकोच नहीं किया। उन्होंने अपने भाई की जिंदगी बचाने के लिए अपने शरीर का एक हिस्सा यानी लीवर दान करने का अत्यंत साहसिक निर्णय लिया। एक संयुक्त परिवार में निवास करने वाली हितेशी ने अभी तक विवाह नहीं किया है और उनके कुल पांच भाई-बहन हैं। वहीं दूसरी ओर, गजराज सिंह की इकलौती सगी बहन का विवाह पहले ही हो चुका है। हितेशी के इस selfless कदम ने निराशा के माहौल में पूरे परिवार के सामने उम्मीद की एक नई किरण जगा दी थी।

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इस अत्यंत संवेदनशील और जटिल मेडिकल प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए गुजरात के अहमदाबाद स्थित शैल्बी हॉस्पिटल का चयन किया गया। चिकित्सा विशेषज्ञों की एक कुशल टीम ने 27 मार्च 2026 को इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। लगभग साढ़े तेरह घंटे तक चली इस लंबी और मैराथन सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने बेहद सावधानी बरतते हुए हितेशी के लीवर का निर्धारित हिस्सा निकालकर गजराज सिंह के शरीर में सफलतापूर्व प्रत्यारोपित कर दिया। दोनों भाई और बहन की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ-साथ चिकित्सा दल के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप यह जोखिम भरा ऑपरेशन पूरी तरह सफल साबित हुआ।

अपनी फिटनेस के प्रति अत्यधिक सजग रहने वाली हितेशी अपने जीवनकाल में कई मैराथन प्रतियोगिताओं में भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभा चुकी हैं। उनकी इसी बेहतरीन और सेहतमंद जीवनशैली के कारण उनका शरीर इस प्रकार की बड़ी और कठिन सर्जरी के शारीरिक प्रभावों का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम बन पाया था। हालांकि, शल्य चिकित्सा के पश्चात लीवर में किसी भी प्रकार के संक्रमण के खतरे को टालने के लिए हितेशी चिकित्सकों के कड़े दिशा-निर्देशों का पालन कर रही हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस प्रकार के बड़े प्रत्यारोपण के बाद लगभग एक वर्ष तक विशेष स्वास्थ्य सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक होता है।

इस सफल शल्य चिकित्सा को संपन्न हुए लगभग पांच महीने बीत चुके हैं और वर्तमान में ये दोनों भाई-बहन पूर्ण रूप से स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। भाई और बहन का यह पावन रिश्ता केवल रक्षाबंधन के दिन कलाई पर राखी बांधने या उपहारों के लेन-देन तक ही सीमित नहीं रहता है। हितेशी ने अपने शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग दान करके इस पवित्र रिश्ते की ऐसी अद्भुत मिसाल पेश की है, जिसमें पारंपरिक राखी के कच्चे धागे से कहीं अधिक मजबूत प्रेम, त्याग और समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है।

सवाल-जवाब

यह घटना राजस्थान के किस जिले से जुड़ी है?
यह घटना राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर उपखंड के खिवाड़ा गांव से जुड़ी है।
गजराज सिंह को किस गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा था?
जांच के दौरान पता चला था कि गजराज सिंह का लीवर पूरी तरह खराब हो चुका था।
गजराज सिंह की जान बचाने के लिए किसने अपना लीवर डोनेट किया?
गजराज सिंह की चचेरी बहन हितेशी राठौड़ ने अपने लीवर का हिस्सा डोनेट किया।
यह जटिल ऑपरेशन किस अस्पताल में किया गया?
यह जटिल ऑपरेशन अहमदाबाद के शैल्बी हॉस्पिटल में किया गया।
यह सफल सर्जरी किस तारीख को हुई थी?
यह सर्जरी 27 मार्च 2026 को डॉक्टर की टीम द्वारा शुरू की गई थी।
यह ऑपरेशन कितने लंबे समय तक चला था?
यह लंबी और मैराथन सर्जरी करीब साढ़े 13 घंटे तक चली थी।
हितेशी राठौड़ शारीरिक रूप से इतनी बड़ी सर्जरी के लिए कैसे तैयार थीं?
हितेशी फिटनेस को लेकर जागरूक थीं और कई मैराथन में हिस्सा ले चुकी थीं, जिससे वे शारीरिक रूप से तैयार थीं।
ऑपरेशन के कितने समय बाद दोनों भाई-बहन स्वस्थ हैं?
ऑपरेशन के करीब पांच महीने बीत जाने के बाद दोनों भाई-बहन पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे बेहतर शारीरिक फिटनेस और जीवनशैली अंग दान जैसे जटिल चिकित्सा निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हितेशी का मैराथन धावक होना उनके शरीर को इतनी बड़ी सर्जरी के शारीरिक दबाव और रिकवरी के लिए सक्षम बना सका। मेडिकल डेटा बताते हैं कि डोनर की फिटनेस ट्रांसप्लांट के बाद की सफलता और रिकवरी की गति को सीधे तौर पर प्रभावित करती है, जो इस मामले में स्पष्ट रूप से साबित हुई है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि इस प्रकार के जटिल और लंबे अंग प्रत्यारोपण मामलों में डोनर की उत्कृष्ट शारीरिक फिटनेस न केवल सर्जिकल जोखिमों को कम करती है, बल्कि यह कानूनी, नैतिक और चिकित्सीय रूप से भी प्रत्यारोपण की सफलता दर को मजबूत करती है। हालांकि, इतने बड़े ऑपरेशन के बाद डोनर की लंबी अवधि की रिकवरी और स्वास्थ्य निगरानी कानूनी और सार्वजनिक स्वास्थ्य के दायरे में एक अत्यंत संवेदनशील और विचारणीय विषय है, जिस पर समाज और चिकित्सा जगत दोनों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में अंग दाताओं के स्वास्थ्य अधिकारों की सुरक्षा और भी पुख्ता हो सके।

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