पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया प्रतिष्ठान में गहरा खौफ पैदा कर दिया है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों के सटीक और विनाशकारी प्रहारों से घबराया पाकिस्तान अब भारतीय धरती पर सीधे तौर पर अपनी जमीन या स्थानीय नागरिकों का इस्तेमाल करने से कतरा रहा है। इस्लामाबाद को डर है कि यदि कोई भी नया हमला सीधे तौर पर उसकी सरजमीं से जुड़ता है, तो भारत की ओर से होने वाली जवाबी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर से भी अधिक भयावह और तबाही मचाने वाली होगी। इसी रणनीतिक डर के कारण पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत के खिलाफ अपनी दशकों पुरानी कार्यप्रणाली में आमूल-चूल बदलाव किया है।
परंपरागत आतंकी संगठनों को पृष्ठभूमि में धकेलने की योजना
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई ने अब लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे स्थापित आतंकवादी संगठनों को अग्रिम मोर्चे से हटाकर पर्दे के पीछे कर दिया है। इन पारंपरिक समूहों की कार्यप्रणाली और टेरर मैनुअल भारतीय जांच एजेंसियों के पास पहले से मौजूद हैं। ऐसे में इन संगठनों का उपयोग करने पर जांच का सीधा सुराग पाकिस्तान में बैठे आकाओं तक पहुंच जाता है। इस कूटनीतिक और सैन्य जोखिम से बचने के लिए आईएसआई अब अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संजालों का सहारा ले रही है, ताकि भारत में हमले होने की स्थिति में इस्लामाबाद अपनी संलिप्तता से साफ इनकार कर सके।
सीरिया और इराक से डिजिटल हैंडलिंग और लोन-वुल्फ मॉडल
पाकिस्तान का नया पैंतरा किसी भी हमले के पीछे अपनी सीधी भूमिका के सबूत मिटाने पर केंद्रित है। पहले इस्लामाबाद, कराची या रावलपिंडी में बैठे हैंडलर सीधे भारतीय आतंकी मॉड्यूलों को दिशा-निर्देश जारी करते थे। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए आईएसआई ने अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के नेटवर्क के जरिए ऐसे हैंडलर्स तैयार किए हैं जो सीरिया और इराक जैसे देशों से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इसके साथ ही, 'लोन-वुल्फ' यानी एकल हमलावर रणनीति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे हमलों में किसी बड़े नेटवर्क, भारी फंडिंग या जटिल योजना की आवश्यकता नहीं होती। विदेशों में बैठे आका सोशल मीडिया पर भारतीय युवाओं को लक्षित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर ढकेलते हैं, जिससे किसी औपचारिक संगठन से जुड़े बिना ही हमले की साजिश रची जा सके।
अनुच्छेद 370 के बाद की पृष्ठभूमि और भारत का कड़ा रुख
इस रणनीतिक बदलाव की नींव जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पड़ी थी, जब इस्लामाबाद स्थित आईएसआई ने 'कश्मीर स्टडी ग्रुप' का गठन किया था। इस समूह की सिफारिशों के आधार पर भारत-विरोधी रणनीति को नए सिरे से गढ़ा गया, जिसे पिछले साल मई में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर ने और तेज कर दिया। इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों का मानना है कि भारत के इस कठोर सैन्य अभियान ने पाकिस्तान के परमाणु हमले की खोखली धमकियों का पर्दाफाश कर दिया और उसके आतंकी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचाया। इसके अतिरिक्त, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की सख्त निगरानी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव ने भी पाकिस्तान को अपने तौर-तरीके बदलने पर मजबूर किया है। भारत ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भविष्य में किसी भी आतंकी हमले को केवल सीमापार घुसपैठ नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ युद्ध की घोषणा माना जाएगा।



















