गुरबाज की तूफानी पारी से गयाना अमेजन वॉरियर्स ने रचा इतिहास, सीजन में लगातार 5वीं जीत के साथ बनी अजेयरविवार को सिद्धि योग और आर्द्रा नक्षत्र का महासंयोग, इन अचूक उपायों से जीवन के कष्ट होंगे दूर50 लाख जीतकर बीच में रुके सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार यादव, बताया जंगल में सर्वाइवल के लिए जवानों को सांप तक खाना पड़ता हैदिल्ली के एसआरसीसी में पीएम मोदी ने बदलाव के विरोधियों को दिया 'नाराज़ फूफा' का तंजऐप्पल के सितंबर इवेंट में नहीं आएगा बेस मॉडल आईफोन 18उत्तराखंड के विकास उनियाल की प्रेरणादायक कहानी, मां को खोने के बाद शुरू किया केमिकल-मुक्त अगरबत्ती का कारोबारमानसून में फल छेदक तितली से अनार की फसल को खतरा, कृषि विशेषज्ञ ने बताए बचाव के उपाययूएस ओपन में ब्रिटिश चुनौती समाप्त, क्या इस निराशाजनक दौर के बीच भी कोई सकारात्मक संकेत मौजूद हैंबिना कानों के कैसे सुनती हैं तंबाकू हॉर्नवर्म की इल्लियां, वैज्ञानिकों ने खोली अनोखी पहेलीथ्रेडिंग के तुरंत बाद अगर चेहरा लाल हो जाए तो अपनाएं ये 5 घरेलू तरीके
कोरबा पहुंचा दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक, ट्रक में सफर करते देख हैरान रह गए लोगछत्तीसगढ़
5 सित॰ 2026, 8:56 pm (2 घंटे पहले)· 2

कोरबा पहुंचा दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक, ट्रक में सफर करते देख हैरान रह गए लोग

कोरबा में एक चलते ट्रक पर सवार दुर्लभ फ्लाइंग स्नेक दिखने से भीड़ जमा हो गई, सर्पमित्र अविनाश यादव ने मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया।

छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक दौड़ते हुए ट्रक पर अचानक एक दुर्लभ सांप दिखाई देने से सड़क पर मौजूद लोगों की धड़कनें तेज हो गईं। यह कोई मामूली सांप नहीं बल्कि फ्लाइंग स्नेक यानी उड़ने वाला सांप निकला, जो धरमजयगढ़ के रास्ते होते हुए ट्रक पर सवार होकर कोरबा तक जा पहुंचा था।

कैसे ट्रक तक पहुंचा यह मेहमान

अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह सांप सफर के दौरान कहीं बीच रास्ते में चुपचाप ट्रक पर चढ़ गया होगा और उतरने का मौका न मिलने से वहीं टिका रहकर पूरी दूरी तय कर गया। जब ट्रक कोरबा पहुंचा और लोगों की नजर इस अनजान यात्री पर पड़ी, तो देखते ही देखते वहां भीड़ जमा हो गई। हर कोई इस अजीबोगरीब सांप को करीब से देखने के लिए बेताब नजर आया।

ये भी पढ़ें

सर्पमित्र ने संभाला मोर्चा

भीड़ बढ़ती देख मामले की जानकारी सर्पमित्र अविनाश यादव को दी गई। उन्होंने मौके पर पहुंचकर सांप को बिना किसी नुकसान के पकड़ने का काम शुरू किया। अविनाश यादव के मुताबिक यह सांप कुदरत की सबसे निराली प्रजातियों में से एक माना जाता है।

नाम उड़ने वाले सांप का, हुनर ग्लाइडिंग का

दिलचस्प बात यह है कि इसका नाम भले ही उड़ने वाला सांप है, मगर यह पक्षियों जैसा उड़ान नहीं भरता। असल में यह ऊंचे पेड़ की डाल से जोरदार छलांग लगाता है और फिर हवा में तैरते हुए दूरी तय कर लेता है। हवा में पहुंचते ही यह अपने पूरे बदन को सपाट और फैला हुआ रूप दे देता है, जिससे उसे उड़ान के लिए जरूरी लिफ्ट मिल जाती है। इसके बाद शरीर को लहरिया अंदाज में हिलाते हुए यह अपनी दिशा और गति दोनों को नियंत्रित रखता है।

पेड़ों पर ही बीतती है ज्यादातर जिंदगी

यह प्रजाति अपना ज्यादातर समय पेड़ों की डालियों पर ही गुजारती है। यही ग्लाइडिंग तकनीक इसे एक पेड़ छोड़कर दूसरे पेड़ की ओर बढ़ने में मदद करती है। यही खासियत इसे दुनिया के सबसे निराले पेड़ पर रहने वाले सांपों में गिनती दिलाती है। कोरबा में मिला यह सांप धरमजयगढ़ इलाके से यहां तक पहुंचने वाला अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है, यही वजह है कि इसे देखने के लिए लोगों में इतनी उत्सुकता देखी गई।

सवाल-जवाब

यह दुर्लभ सांप कहां पाया गया?
यह सांप कोरबा में एक चलते ट्रक पर पाया गया, जो धरमजयगढ़ के रास्ते वहां पहुंचा था।
सांप को किसने रेस्क्यू किया?
सर्पमित्र अविनाश यादव ने मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया।
क्या फ्लाइंग स्नेक वाकई हवा में उड़ता है?
नहीं, यह पक्षियों की तरह नहीं उड़ता, बल्कि ऊंचे पेड़ों से छलांग लगाकर हवा में ग्लाइड करता है।
सांप ट्रक पर कैसे पहुंचा होगा?
माना जा रहा है कि यह रास्ते में कहीं चुपके से ट्रक पर चढ़ गया होगा और पूरा सफर उसी पर तय कर लिया।
फ्लाइंग स्नेक अपना ज्यादातर समय कहां बिताता है?
यह ज्यादातर समय पेड़ों पर ही बिताता है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक ग्लाइडिंग के जरिए पहुंचता है।
क्या कोरबा में इससे पहले भी ऐसा सांप दिखा था?
बताया जा रहा है कि धरमजयगढ़ से इस तरह कोरबा पहुंचने वाला यह अपनी तरह का पहला मामला है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

कोरबा की यह घटना वन्यजीवों के अनजाने विस्थापन और परिवहन के दौरान सुरक्षा जोखिमों पर एक गंभीर सवाल उठाती है। ट्रकों और भारी वाहनों पर इस तरह वन्यजीवों का छिपकर सफर करना न केवल जीवों के लिए घातक है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और वन अधिनियमों के तहत एक अनदेखा पहलू भी है। ऐसे मामलों में वन विभाग को औद्योगिक और मालवाहक वाहनों की आवाजाही के दौरान कड़ी निगरानी रखनी चाहिए ताकि वन्यजीवों का मानवीय बस्तियों में इस प्रकार का असुरक्षित प्रवेश रोका जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि छत्तीसगढ़ जैसे वन-आच्छादित और औद्योगिक रूप से सक्रिय राज्य में मालवाहक वाहनों के जरिए वन्यजीवों का बस्तियों तक पहुंचना पारिस्थितिकीय असंतुलन की चेतावनी है। जब ट्रक और भारी वाहन जंगलों के बीच से गुजरते हैं, तो इस प्रकार की घटनाओं से न सिर्फ वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ती है। वन विभाग और परिवहन निगम को मिलकर औद्योगिक मार्गों पर वाहन चालकों के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान चलाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे अनजाने विस्थापन को रोका जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR