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फरीदाबाद के किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ एक एकड़ में लगाया आंवले का बाग, दोहरी फसल से कमा रहे मुनाफाहरियाणा
14 सित॰ 2026, 7:55 pm (8 दिन पहले)· 1

फरीदाबाद के किसान ने पारंपरिक खेती छोड़ एक एकड़ में लगाया आंवले का बाग, दोहरी फसल से कमा रहे मुनाफा

फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव के एक किसान मुकेश ने मौसम के जोखिम वाली धान-गेहूं की खेती छोड़कर एक एकड़ में आंवले का बाग लगाया है। उन्होंने इसके साथ ही शादी-ब्याह में सजने वाले पौधों की खेती कर अपनी कमाई को दोगुना कर लिया है।

हरियाणा के कृषि क्षेत्र में पारंपरिक फसलों से हटकर बागवानी की तरफ किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। फरीदाबाद जिले के फतेहपुर बिल्लौच गांव के एक प्रगतिशील किसान मुकेश ने अपनी एक एकड़ जमीन का इस्तेमाल पारंपरिक गेहूं और धान की खेती के बजाय आंवले का बाग तैयार करने में किया है। यह बदलाव स्थानीय किसानों के लिए एक नई राह दिखा रहा है, जो अक्सर मौसम की मार के कारण पारंपरिक फसलों में होने वाले भारी नुकसान से परेशान रहते हैं।

मौसम की मार से बचने के लिए बागवानी का रुख

फतेहपुर बिल्लौच गांव को क्षेत्र में फूलों की खेती के एक प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है, जहां रजनीगंधा जैसे सुगंधित फूलों की पैदावार बड़े पैमाने पर होती है। इस गांव में मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा और मौसमी सब्जियों की खेती की जाती है। हालांकि, पारंपरिक खेती करने वाले किसानों को हमेशा मौसम की बेरुखी का सामना करना पड़ता है। बेमौसम बारिश या अचानक बदलते तापमान के कारण सब्जियां और फसलें अक्सर खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। इसी जोखिम को देखते हुए मुकेश ने पांच साल पहले अपनी कृषि पद्धति में बदलाव करने का साहसिक निर्णय लिया था।

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कम लागत और टिकाऊ आय का शानदार मॉडल

मुकेश ने लगभग पांच साल पहले कर्नाटक के बेंगलुरु से आंवले के पौधे मंगवाए थे और अपनी एक एकड़ भूमि में लगभग 90 पेड़ लगाए थे। उन्होंने आंवले की 'फर्स्टटेड' वैरायटी का चुनाव किया, जो बेहतरीन गुणवत्ता वाली मानी जाती है। आंवले की इस खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शुरुआत में बहुत ही कम खर्च आता है। मुकेश के मुताबिक, इसके पौधे मात्र 200 से 300 रुपये प्रति पेड़ की दर से मिल जाते हैं। एक बार जब ये पेड़ पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं, तो इनसे होने वाली आय धान और गेहूं की तुलना में काफी स्थिर और अधिक होती है। वर्तमान में बाजार में आंवले की कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल जाती है, जो बाजार के रुख के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है।

सह-फसल पद्धति से दोगुनी हुई कमाई

एक सीजन में मुकेश को अपने इस एक एकड़ के बाग से लगभग 1 से डेढ़ क्विंटल तक आंवले की उपज प्राप्त हो जाती है। अपनी जमीन के हर हिस्से का सही उपयोग करने के लिए उन्होंने आंवले के पेड़ों के नीचे खाली पड़ी जगह पर 'फ्राई कश' नामक सजावटी पौधा भी उगाया है। यह एक सह-फसल तकनीक है, जो बिना किसी अतिरिक्त जमीन के दूसरी कमाई का जरिया बनती है। इस सजावटी हरी पत्ती की मांग शादियों और अन्य आयोजनों में सजावट के लिए बहुत अधिक होती है। मुकेश इस सजावटी उपज को दिल्ली की प्रसिद्ध गाजीपुर मंडी में भेजते हैं, जिससे उन्हें पूरे साल नियमित रूप से अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलता रहता है।

सवाल-जवाब

किसान मुकेश ने आंवले का बाग कहां स्थापित किया है?
मुकेश ने हरियाणा के फरीदाबाद जिले के फतेहपुर बिल्लौच गांव में अपना आंवले का बाग लगाया है।
उनके एक एकड़ के खेत में आंवले के कितने पेड़ हैं और वे किस किस्म के हैं?
उनके एक एकड़ के खेत में 'फर्स्टटेड' वैरायटी के लगभग 90 आंवले के पेड़ लगे हुए हैं।
मुकेश ने आंवले के पौधे कहां से मंगवाए थे और उनकी कीमत क्या थी?
उन्होंने ये पौधे बेंगलुरु से मंगवाए थे, जिनकी कीमत लगभग 200 से 300 रुपये प्रति पेड़ थी।
उनके बाग से आंवले की प्रति सीजन कितनी पैदावार होती है और बाजार में क्या भाव मिलता है?
उनके बाग से प्रति सीजन लगभग 1 से डेढ़ क्विंटल आंवले की पैदावार होती है, जो बाजार में 50 से 60 रुपये प्रति किलो के भाव बिकता है।
'फ्राई कश' क्या है और मुकेश इससे अतिरिक्त कमाई कैसे करते हैं?
'फ्राई कश' शादियों में सजावट के काम आने वाला एक सजावटी पौधा है, जिसे मुकेश आंवले के पेड़ों के नीचे सह-फसल के रूप में उगाते हैं और दिल्ली की गाजीपुर मंडी में बेचते हैं।
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