अजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामकिसान के बेटे डॉ. भागचंद बधाल का RAS से IAS कैडर में हुआ प्रमोशन, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ था सफरगंगा किनारे बेहतरीन नजारों और शांत माहौल का अनुभव देने वाले ऋषिकेश के खास कैफेझारखंड के 22 वर्षीय अजय कुमार विश्वकर्मा ने स्केट्स पर तय किया 21 हजार किमी का सफर, 20 राज्यों में फैलाया नशामुक्ति का संदेशसिंह राशिफल 1 अक्टूबर 2026: कर्म क्षेत्र में चमक और कागजी मामलों में बरतें खास सतर्कताबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकातुला राशिफल 1 अक्टूबर 2026: जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचें, वित्तीय और कार्यक्षेत्र के फैसलों में रखें सजगताकन्या राशिफल 1 अक्टूबर 2026: आत्मविश्वास से बनेंगे काम, रिश्तों में संवाद और आराम पर दें ध्यान
फिरोजाबाद की बोहरान गली कैसे बनी कांच की चूड़ियों का विश्व प्रसिद्ध बाजार, सादी बनावट से शुरू हुआ था सफरभारत
20 सित॰ 2026, 7:35 am (11 दिन पहले)· 0

फिरोजाबाद की बोहरान गली कैसे बनी कांच की चूड़ियों का विश्व प्रसिद्ध बाजार, सादी बनावट से शुरू हुआ था सफर

कांच नगरी फिरोजाबाद के घंटाघर के समीप स्थित 150 से 200 साल पुरानी बोहरान गली का बाजार आज देश-दुनिया में कांच की चूड़ियों और कंगन के लिए विशेष पहचान रखता है।

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद को पूरे विश्व में कांच की नगरी के रूप में पहचाना जाता है। महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली कांच की चूड़ियों का निर्माण इस शहर की सबसे बड़ी पहचान है। शहर में तैयार होने वाली विविध प्रकार की चूड़ियों की बिक्री के लिए एक विशाल बाजार सजता है, जहां खरीदारी के सिलसिले में भारत के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी खरीदार पहुंचते हैं। आज भले ही यह बाजार बेहद विशाल और आधुनिक डिजाइनों से गुलजार दिखता हो, लेकिन इसकी शुरुआत दशकों पहले बेहद सादे स्तर पर हुई थी, जब स्थानीय कारोबारी सिर्फ बिना सजावट वाली सादी चूड़ियां बनाकर बेचा करते थे। उस दौर में गिनी-चुनी दुकानें हुआ करती थीं और लोग अपने रिहाइशी मकानों के निचले हिस्से में चूड़ियां रखकर कारोबार चलाते थे।

150 से 200 साल पुराना इतिहास और कारीगरी की शुरुआत

फिरोजाबाद में चूड़ियों के कारोबार से जुड़े बी.एस. गुप्ता के अनुसार, मशहूर चूड़ी बाजार गली बोहरान का इतिहास शहर में चूड़ी निर्माण की शुरुआत के साथ ही जुड़ा हुआ है। लगभग 150 से 200 वर्ष पहले स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों ने इस हुनर और व्यापार की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में कारीगर त्रिकोणीय आकार के एक छोटे से बेलन का सहारा लेकर अलग-अलग नाप और साइज की चूड़ियां तैयार करते थे। समय बीतने के साथ यह घरेलू हुनर एक व्यवस्थित रूप लेने लगा और कांच के छोटे-छोटे उद्योग स्थापित होने लगे।

ये भी पढ़ें

इसी विकास क्रम के दौरान फिरोजाबाद के घंटाघर के नजदीक स्थित गली बोहरान में चूड़ियों की दुकानें सजनी शुरू हुईं। उस समय घंटाघर के पास से गुजरने वाला मार्ग ही आगरा जाने का मुख्य रास्ता हुआ करता था, जिससे वहां आवाजाही हमेशा बनी रहती थी। इसी रणनीतिक स्थान का लाभ उठाते हुए स्थानीय निवासियों ने बोहरान गली में अपने घरों के नीचे दुकानें स्थापित कीं और साथ ही चूड़ियों के गोदाम भी तैयार कर लिए। यहां से अन्य शहरों के व्यापारियों को माल भेजा जाने लगा और धीरे-धीरे यह गली थोक और खुदरा व्यापार का केंद्र बन गई।

सादी चूड़ियों से सुनहरी बर्क और हिल्ल डिजाइन तक का सफर

प्रारंभिक दौर में बोहरान गली की दुकानों पर सिर्फ सादी चूड़ियां बिकती थीं, जिनमें किसी प्रकार की अतिरिक्त सजावट या नक्काशी नहीं होती थी। वक्त के साथ कारीगरों ने अपने काम में नए प्रयोग शुरू किए। चूड़ियों की कटिंग की कला विकसित हुई और बाद में कुशल कारीगरों ने सोने की बर्क लगाकर विशेष प्रकार की हिल्ल चूड़ियों का निर्माण करना शुरू किया। इन नवाचारों ने फिरोजाबाद की चूड़ियों को एक विशिष्ट आकर्षण दिया, जिससे बोहरान गली का बाजार समय के साथ सबसे प्राचीन और विख्यात चूड़ी केंद्र में तब्दील हो गया।

हजारों दुकानों में फैली विस्तृत वैरायटी और खरीदारों का भरोसा

वर्तमान समय में बोहरान गली का बाजार फैंसी चूड़ियों और खूबसूरत कंगनों के विशाल संग्रह के लिए प्रसिद्ध है। लखनऊ के निवासी और फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉ. अमित यादव ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गली बोहरान में खरीदारी करने पहुंचे हैं। उनका कहना है कि यह बाजार अत्यंत विशाल और सुंदर है, जहां हजारों की संख्या में चूड़ियों की दुकानें मौजूद हैं और एक से बढ़कर एक अनूठे डिजाइन उपलब्ध हैं।

वहीं खरीदारी के लिए पहुंचीं डॉ. कल्पना यादव ने बताया कि बोहरान गली के बाजार में अत्यधिक गुणवत्तापूर्ण और सही चूड़ियां मिलती हैं। यहां चूड़ियों के दाम काफी किफायती और वाजिब रहते हैं, जिसके चलते लोग दूर-दराज से विशेष रूप से इसी बाजार में खरीदारी करने के लिए आते हैं।

सवाल-जवाब

फिरोजाबाद की बोहरान गली मार्केट कितने साल पुरानी है?
यह प्रसिद्ध बाजार लगभग 150 से 200 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत फिरोजाबाद में चूड़ियों के निर्माण के साथ ही हुई थी।
शुरुआती दौर में बोहरान गली में किस तरह की चूड़ियां बेची जाती थीं?
शुरुआत में इस बाजार में बिना किसी सजावट वाली केवल सादी कांच की चूड़ियां ही बनाकर बेची जाती थीं।
बोहरान गली में चूड़ियों के व्यापार की शुरुआत किसने की थी?
बी.एस. गुप्ता के अनुसार, लगभग 150 से 200 साल पहले स्थानीय मुस्लिम समाज के लोगों ने त्रिकोणीय बेलन से चूड़ियां बनाकर इस व्यापार को शुरू किया था।
बोहरान गली बाजार घंटाघर के पास क्यों फला-फूला?
घंटाघर के पास का रास्ता उस समय आगरा जाने का मुख्य मार्ग था, जिसके चलते लोगों ने वहां अपने घरों के नीचे दुकानें और गोदाम बना लिए।
सादी चूड़ियों के बाद बाजार में कौन से नए डिजाइन शामिल हुए?
कारीगरों ने चूड़ियों की कटिंग शुरू की और सोने की बर्क लगाकर विशेष हिल्ल चूड़ियां तैयार करना आरंभ किया।
वर्तमान में ग्राहक बोहरान गली में खरीदारी के लिए क्यों आते हैं?
यहां हजारों दुकानों में चूड़ियों और फैंसी कंगनों के अनगिनत डिजाइन मिलते हैं और उनकी कीमतें भी काफी वाजिब व सस्ती रहती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·10 दिन पहले

यह ऐतिहासिक रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक कारीगरी और रणनीतिक व्यापारिक अवस्थिति ने स्थानीय बाजार को वैश्विक पहचान दिलाई। फिरोजाबाद की बोहरान गली का यह सफर सूक्ष्म उद्योगों के आर्थिक विस्तार और पारंपरिक कला के वैश्विक प्रभाव का एक जीवंत उदाहरण है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

बोहरान गली का यह सफर पारंपरिक कुटीर उद्योगों से आधुनिक ग्लोबल वैल्यू चेन तक के आर्थिक विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। यदि इस पारंपरिक क्लस्टर को आधुनिक डिजिटल मार्केटिंग, ब्लॉकचेन-आधारित सप्लाई चेन ट्रेसएबिलिटी और आसान एमएसएमई फाइनेंसिंग से जोड़ा जाए, तो फिरोजाबाद के कांच उद्योग का वैश्विक निर्यात कई गुना बढ़ सकता है। स्थानीय कारीगरों की यह कला न केवल सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि रोजगार सृजन का एक बड़ा आर्थिक इंजन भी है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·10 दिन पहले

बोहरान गली की यह ऐतिहासिक विरासत इस बात का प्रमाण है कि कैसे स्थानीय शिल्प और पारंपरिक कला को यदि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और ओटीटी या डॉक्यूमेंट्री जैसे माध्यमों से वैश्विक दर्शकों के सामने लाया जाए, तो यह न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। इस पारंपरिक उद्योग की कारीगरी को डिजिटल मीडिया के जरिए दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

यह ऐतिहासिक रिपोर्ट फिरोजाबाद के व्यापारिक गौरव को उजागर करती है, लेकिन एक क्राइम रिपोर्टर के नजरिए से हमें यह भी देखना होगा कि तेजी से बढ़ते इस वैश्विक बाजार में श्रम कानूनों, बाल श्रम की रोकथाम और कारीगरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का पालन किस हद तक हो रहा है, क्योंकि कांच उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों का कल्याण सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़ा हुआ है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

यह रिपोर्ट फिरोजाबाद की ऐतिहासिक पहचान को सामने लाती है, लेकिन भू-राजनीतिक और आर्थिक नीतियों के दृष्टिकोण से हमें यह भी देखना होगा कि इस पारंपरिक कुटीर उद्योग को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में टिके रहने के लिए किन सरकारी नीतियों और वित्तीय मदद की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मौजूदा दौर में सूक्ष्म और लघु उद्योगों को आधुनिक तकनीक और निर्यात प्रोत्साहन के जरिए ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिल सकती है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp