ऑस्ट्रेलिया की धरती पर आयोजित हो रहे दुनिया के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों में से एक पिच ब्लैक 2026 में भारतीय वायुसेना ने अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया है। रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स की मेजबानी में हो रहे इस बहुराष्ट्रीय सैन्य आयोजन के आगाज पर डार्विन के मशहूर मिंडिल बीच के आसमान में भारतीय राफेल लड़ाकू विमान ने फ्लाईपास्ट कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। आसमान में अपनी क्षमता दिखाने के साथ ही भारतीय वायुसेना के जांबाजों ने वहां आयोजित बहुराष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक पर भी कब्जा जमाया।
युद्धाभ्यास में राफेल और फुटबॉल का जलवा
इस बड़े सैन्य अभ्यास के औपचारिक उद्घाटन के दौरान डार्विन के मिंडिल बीच के ऊपर से गुजरे भारतीय राफेल विमान ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस मौके पर दुनिया भर के विभिन्न देशों के सैन्य विमानों ने भी अपनी कलाबाजी और खूबियां दिखाईं। उद्घाटन समारोह के बाद अब यह युद्धाभ्यास अपने मुख्य उड़ान अभियानों के चरण में कदम रख चुका है, जहां दिन के साथ-साथ रात के समय भी बेहद जटिल हवाई मिशनों को अंजाम देने का अभ्यास किया जा रहा है। खेल के मैदान पर भी भारतीय दल ने बहुराष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट का गोल्ड मेडल जीतकर आपसी सौहार्द और फिटनेस का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया।
वैश्विक सैन्य कूटनीति और पिच ब्लैक का महत्व
रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स द्वारा हर दो साल में आयोजित किया जाने वाला यह प्रमुख हवाई युद्धाभ्यास साल 1981 में शुरू हुआ था। इसका संचालन मुख्य रूप से उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के आरएएएफ बेस डार्विन और आरएएएफ बेस टिंडाल से किया जाता है। इस आयोजन का मुख्य मकसद दुनिया भर की अलग-अलग वायु सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, जिसे तकनीकी भाषा में इंटरऑपरेबिलिटी कहा जाता है, को विकसित करना और आधुनिक युद्ध के मैदान जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटना है। इस बार के संस्करण में 20 से अधिक देशों की वायु सेनाएं पूरी ताकत के साथ भाग ले रही हैं, जिसमें अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, आसमान में ईंधन भरने वाले एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग विमान और भारी सैन्य परिवहन विमान शामिल हैं। रात के वक्त होने वाले उड़ान अभियान इस अभ्यास का सबसे अहम हिस्सा हैं, जो पायलटों को वास्तविक युद्ध की कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार करते हैं।
भारत की बढ़ती रणनीतिक भागीदारी
भारतीय वायुसेना के दल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वे रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स और अन्य बीस देशों की वायु सेनाओं के साथ मिलकर संयुक्त प्रशिक्षण में पूरी सक्रियता से जुटे हुए हैं। भारतीय दल ने अपने संदेश में साथ प्रशिक्षण, बेहतर तालमेल और अधिक मजबूत हवाई शक्ति के संकल्प को दोहराया। भारत इससे पहले भी इस प्रतिष्ठित युद्धाभ्यास में अपनी हिस्सेदारी निभा चुका है, जिसमें पिछले संस्करणों के दौरान सुखोई, इल्यूशिन मिड-एयर रिफ्यूलर और सी-17 ग्लोबमास्टर जैसे दिग्गज प्लेटफॉर्म उतारे गए थे। इस बार राफेल की मौजूदगी ने भारत की सैन्य ताकत को एक नई ऊंचाई दी है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी और गहरे होते आपसी संबंधों को साफ तौर पर दर्शाती है।



















