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पिलानी की प्रोफेसर से डिजिटल अरेस्ट कर 7.67 करोड़ ठगे, सीबीआई ने पकड़े पांच और आरोपीभारत
7 सित॰ 2026, 11:00 pm (4 दिन पहले)· 3

पिलानी की प्रोफेसर से डिजिटल अरेस्ट कर 7.67 करोड़ ठगे, सीबीआई ने पकड़े पांच और आरोपी

झुंझुनूं के पिलानी में महिला प्रोफेसर को तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 7.67 करोड़ रुपये ठगने के मामले में सीबीआई ने पांच नए आरोपियों को दबोच लिया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने देशव्यापी साइबर अपराध के खिलाफ अपनी मुहिम तेज करते हुए डिजिटल अरेस्ट के एक बड़े मामले में पांच और लोगों को धर दबोचा है। यह पूरा प्रकरण झुंझुनूं जिले के पिलानी स्थित प्रतिष्ठित संस्थान बिट्स की एक महिला प्रोफेसर श्रीजाता डे के साथ हुई भारी-भरकम धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। अपराधियों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए प्रोफेसर को मानसिक रूप से इस कदर डराया कि वह लगभग तीन महीने तक उनके डिजिटल शिकंजे में कैद रहीं। इस दौरान डरा-धमकाकर जालसाजों ने उनसे कुल 7.67 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम ऐंठ ली।

महिला प्रोफेसर को वीडियो कॉल पर रखा निगरानी में

जांच एजेंसी के अनुसार, इस शातिर गिरोह ने प्रोफेसर को कानूनी उलझनों और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया था। उन्हें लगातार वीडियो कॉल और विभिन्न डिजिटल माध्यमों से जोड़ा गया ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें। अपराधियों ने विभिन्न बैंक खातों के जरिए यह पूरी रकम ट्रांसफर कराई। इस सुनियोजित ठगी का दायरा केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देश के कई हिस्सों से जुड़े हुए थे।

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देशभर में चलाए गए थे बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान

इस बड़े साइबर सिंडिकेट की गहराई तक पहुंचने के लिए केंद्रीय एजेंसी ने हाल ही में देश के 20 राज्यों में कुल 89 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। ऑपरेशन चक्र-VI के अंतर्गत की गई इस कार्रवाई में पिलानी के अलावा गुजरात और कर्नाटक से जुड़े अन्य मामले भी शामिल थे। इस राष्ट्रव्यापी अभियान से पहले एजेंसी ने इस मामले में आकाश, राजा करमाकर और ज्योति रानी को गिरफ्तार किया था। अब इस कड़ी में पांच और नए नाम जुड़ गए हैं।

हाल ही में हुई गिरफ्तारियों का विवरण

ताजा कार्रवाई के तहत केंद्रीय एजेंसी ने मध्य प्रदेश के इटारसी निवासी संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े को दबोचा है। इसके अलावा तीन अन्य आरोपियों में आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और शशांक सिंह उर्फ रवि शामिल हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए इन नए आरोपियों का काम ठगी की रकम को ठिकाने लगाना और उसे वैध रूप देना था।

बैंक खातों की व्यवस्था और पैसों की लेयरिंग का खेल

प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि संकेत बस्तवार और पंकज दमाड़े ने अवैध रकम को प्राप्त करने के लिए बैंक खाते मुहैया कराए थे और पैसों की आवाजाही को छिपाने में मदद की थी। वहीं दूसरी तरफ, आरिफ, हरीश यादव और शशांक सिंह फर्जी खातों की व्यवस्था करने और उनमें आने वाले पैसों की लेयरिंग करने का काम संभाल रहे थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने खाताधारकों के मोबाइल फोनों में एपीके फाइलें डाउनलोड करवाई थीं। इन मैलवेयर फाइलों के जरिए बैंक से आने वाले एसएमएस अलर्ट को बीच में ही रोक लिया जाता था, जिससे खातों का संचालन दूर बैठे साइबर अपराधी आसानी से कर पाते थे। अब एजेंसी इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि प्रोफेसर से लूटी गई पूरी राशि को किन-किन अंतिम खातों में भेजा गया और इस पूरे सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

सवाल-जवाब

इस मामले में कुल कितने रुपये की ठगी हुई थी?
पिलानी की महिला प्रोफेसर से कुल 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी।
सीबीआई ने हाल ही में कितने नए आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने इस मामले में पांच और नए आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी प्रोफेसर को किस तरह डराते थे?
आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाते थे।
ताजा गिरफ्तारियां किन जगहों से जुड़ी हैं?
ताजा गिरफ्तारियों में इटारसी निवासी संदिग्ध भी शामिल हैं।
अपराधी बैंक खातों का संचालन कैसे करते थे?
अपराधी मोबाइल फोन में एपीके फाइलें इंस्टॉल कर बैंक एसएमएस अलर्ट को इंटरसेप्ट करते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·3 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे तकनीक और डर का इस्तेमाल कर बड़े अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। डिजिटल अरेस्ट जैसे मामले न सिर्फ साइबर सुरक्षा पर सवाल उठाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि इस तरह के मामलों की परतें कितनी गहरी हैं। अपराधियों द्वारा मैलवेयर और एपीके फाइलों के जरिए बैंक खातों को नियंत्रित करने का तरीका यह संकेत देता है कि डिजिटल माध्यमों की निगरानी और कड़े कानूनों की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

पिलानी की प्रोफेसर से जुड़े इस प्रकरण में सीबीआई द्वारा ऑपरेशन चक्र-VI के तहत की गई गिरफ्तारियां यह दर्शाती हैं कि वित्तीय धोखाधड़ी अब संगठित कॉर्पोरेट सिंडिकेट की तरह काम कर रही है। जिस तरह से मैलवेयर से लैस एपीके फाइलों और फर्जी बैंक खातों के जरिए पैसों की लेयरिंग की गई, वह डिजिटल एसेट्स और पारंपरिक वित्तीय तंत्र दोनों के लिए एक गंभीर चुनौती है। आगे की जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस अवैध नेटवर्क की पहुंच क्रिप्टोकरेंसी या अन्य डिजिटल माध्यमों तक कितनी गहरी है, ताकि ऐसी आर्थिक वारदातों पर प्रभावी लगाम लगाई जा सके।

Aisha Khan@aisha-khan·3 दिन पहले

यह गंभीर मामला मनोरंजन जगत और पॉप कल्चर के लिए भी एक चेतावनी है कि कैसे तेजी से बढ़ती डिजिटल निर्भरता का फायदा उठाकर संगठित अपराधी आम से लेकर खास लोगों को निशाना बना रहे हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और साइबर थ्रिलर फिल्मों में दिखाई जाने वाली 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी तकनीकें अब हमारे समाज की कठोर और खौफनाक सच्चाई बन चुकी हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

वरिष्ठ संवाददाता रोहन वर्मा का विश्लेषण: यह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ तकनीकी तरीकों जैसे मैलवेयर और एपीके फाइलों का उपयोग करके मनी लॉन्ड्रिंग और लेयरिंग को बेहद संगठित रूप से अंजाम दे रहे हैं। 'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत केंद्रीय एजेंसी की यह राष्ट्रव्यापी कार्रवाई महत्वपूर्ण है, लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों से बैंक खाते मुहैया कराने वाले और लेयरिंग करने वाले सिंडिकेट्स की जड़ें काफी गहरी हैं। आगे की जांच में इस बात पर ध्यान देना होगा कि इन अंतरराष्ट्रीय या अंतर-राज्यीय गिरोहों के मास्टरमाइंड तक कैसे पहुंचा जाए और पीड़ितों की ठगी गई राशि की शत-प्रतिशत रिकवरी कैसे सुनिश्चित हो।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

अर्जुन मेहता का विश्लेषण: इस मामले में एपीके फाइलों और मैलवेयर के जरिए एसएमएस इंटरसेप्ट करने की तकनीक यह साबित करती है कि साइबर अपराधी अब तकनीकी रूप से बेहद सक्षम हो चुके हैं। केवल मोहरों की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि भुगतान एग्रीगेटर्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स की खामियों को दूर करने के लिए संसद और सरकारी नीति स्तर पर सख्त नियामक ढांचा बनाना होगा, ताकि सीमा पार और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट्स की रीढ़ तोड़ी जा सके।

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