झारखंड के साहिबगंज जिले में साइबर अपराधियों द्वारा एक व्यक्ति को मानसिक दबाव में लेकर 1 करोड़ 20 लाख रुपये ऐंठने के एक बड़े मामले का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बरहरवा थाना क्षेत्र के निवासी गौतम दास को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए कथित रूप से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया और उनसे करोड़ों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के तीन आरोपियों को पश्चिम बंगाल से दबोच लिया है। इस कार्रवाई से साइबर ठगों के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है।
सीबीआई अधिकारी बनकर दिया डिजिटल अरेस्ट का झांसा
साइबर अपराध के इस सनसनीखेज मामले में जालसाजों ने पीड़ित गौतम दास से व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क साधा था। फोन करने वालों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया और पीड़ित पर गंभीर कानूनी कार्रवाई का आरोप लगाकर दबाव बनाया। आरोपियों ने पीड़ित को यह विश्वास दिला दिया कि वह किसी गंभीर जांच के दायरे में है और उसे तुरंत डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। फर्जी अदालती मुकदमों और गिरफ्तारी की लगातार धमकी देकर पीड़ित को मानसिक रूप से बेबस कर दिया गया। इसी डर का फायदा उठाकर ठगों ने पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी दी और उनसे 1.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
साहिबगंज पुलिस ने गठित की विशेष जांच टीम
जब पीड़ित को अपने साथ हुई बड़ी ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित की शिकायत के आधार पर 31 अगस्त 2026 को साहिबगंज जिले के बरहरवा थाने में साइबर धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इतनी बड़ी रकम की ठगी को देखते हुए साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक ने मामले में तुरंत कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर सेल के नोडल अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने पीड़ित के बैंक स्टेटमेंट और कॉल डिटेल्स का विश्लेषण शुरू किया और तकनीकी शाखा की मदद से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाला।
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में छापेमारी कर 3 आरोपी दबोचे गए
तकनीकी जांच के दौरान एसआईटी को साइबर अपराधियों के लोकेशन के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिले। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर में छापेमारी की। वहां से पुलिस ने रंजीत बख्शी और असित महतो नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने गिरोह के अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी दी। दोनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके तीसरे साथी धीरज हारी को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को साहिबगंज लाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
4 हजार से अधिक बैंक खातों तक पहुंची ठगी की रकम
पुलिस की शुरुआती जांच में इस साइबर सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क का जो खाका सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। जांच टीम ने पाया कि पीड़ित से ठगे गए 1.20 करोड़ रुपये किसी एक या दो खातों में नहीं, बल्कि 4 हजार से भी अधिक बैंक खातों के विशाल नेटवर्क में भेजे गए थे। आरोपियों ने पैसे का सुराग मिटाने के लिए कई स्तरों पर लेनदेन किया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दर्जनों संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करा दिया है। अब पुलिस तकनीकी साक्ष्यों की मदद से इन सभी खातों के तार जोड़ने और पैसे के अंतिम पड़ाव तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
बिहार, यूपी और बंगाल तक जुड़े हैं गिरोह के तार
साहिबगंज पुलिस का मानना है कि यह केवल कुछ लोगों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह काम कर रहा है। साहिबगंज के डीएसपी मुख्यालय रविकांत साव ने बताया कि एसआईटी मामले की हर पहलू से गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क की जड़ें पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश तक फैली हुई हैं। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह में शामिल अन्य मास्टरमाइंडों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।





















