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झारखंड के साहिबगंज में 1.20 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी का पर्दाफाश, पश्चिम बंगाल से 3 आरोपी गिरफ्तारझारखंड
9 सित॰ 2026, 4:19 pm (1 घंटे पहले)· 2

झारखंड के साहिबगंज में 1.20 करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी का पर्दाफाश, पश्चिम बंगाल से 3 आरोपी गिरफ्तार

साहिबगंज में सीबीआई अधिकारी बनकर एक नागरिक को व्हाट्सऐप कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर 1.20 करोड़ रुपये ठगने वाले गिरोह के 3 सदस्यों को पुलिस ने दुर्गापुर से गिरफ्तार किया है।

झारखंड के साहिबगंज जिले में साइबर अपराधियों द्वारा एक व्यक्ति को मानसिक दबाव में लेकर 1 करोड़ 20 लाख रुपये ऐंठने के एक बड़े मामले का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बरहरवा थाना क्षेत्र के निवासी गौतम दास को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए कथित रूप से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया और उनसे करोड़ों रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के तीन आरोपियों को पश्चिम बंगाल से दबोच लिया है। इस कार्रवाई से साइबर ठगों के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है।

सीबीआई अधिकारी बनकर दिया डिजिटल अरेस्ट का झांसा

साइबर अपराध के इस सनसनीखेज मामले में जालसाजों ने पीड़ित गौतम दास से व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क साधा था। फोन करने वालों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई का वरिष्ठ अधिकारी बताया और पीड़ित पर गंभीर कानूनी कार्रवाई का आरोप लगाकर दबाव बनाया। आरोपियों ने पीड़ित को यह विश्वास दिला दिया कि वह किसी गंभीर जांच के दायरे में है और उसे तुरंत डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। फर्जी अदालती मुकदमों और गिरफ्तारी की लगातार धमकी देकर पीड़ित को मानसिक रूप से बेबस कर दिया गया। इसी डर का फायदा उठाकर ठगों ने पीड़ित को अलग-अलग बैंक खातों की जानकारी दी और उनसे 1.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

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साहिबगंज पुलिस ने गठित की विशेष जांच टीम

जब पीड़ित को अपने साथ हुई बड़ी ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस प्रशासन का दरवाजा खटखटाया। पीड़ित की शिकायत के आधार पर 31 अगस्त 2026 को साहिबगंज जिले के बरहरवा थाने में साइबर धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इतनी बड़ी रकम की ठगी को देखते हुए साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक ने मामले में तुरंत कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक सह साइबर सेल के नोडल अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने पीड़ित के बैंक स्टेटमेंट और कॉल डिटेल्स का विश्लेषण शुरू किया और तकनीकी शाखा की मदद से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को खंगाला।

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में छापेमारी कर 3 आरोपी दबोचे गए

तकनीकी जांच के दौरान एसआईटी को साइबर अपराधियों के लोकेशन के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिले। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर में छापेमारी की। वहां से पुलिस ने रंजीत बख्शी और असित महतो नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने गिरोह के अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी दी। दोनों आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनके तीसरे साथी धीरज हारी को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को साहिबगंज लाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

4 हजार से अधिक बैंक खातों तक पहुंची ठगी की रकम

पुलिस की शुरुआती जांच में इस साइबर सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क का जो खाका सामने आया है, वह बेहद चौंकाने वाला है। जांच टीम ने पाया कि पीड़ित से ठगे गए 1.20 करोड़ रुपये किसी एक या दो खातों में नहीं, बल्कि 4 हजार से भी अधिक बैंक खातों के विशाल नेटवर्क में भेजे गए थे। आरोपियों ने पैसे का सुराग मिटाने के लिए कई स्तरों पर लेनदेन किया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दर्जनों संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करा दिया है। अब पुलिस तकनीकी साक्ष्यों की मदद से इन सभी खातों के तार जोड़ने और पैसे के अंतिम पड़ाव तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

बिहार, यूपी और बंगाल तक जुड़े हैं गिरोह के तार

साहिबगंज पुलिस का मानना है कि यह केवल कुछ लोगों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह काम कर रहा है। साहिबगंज के डीएसपी मुख्यालय रविकांत साव ने बताया कि एसआईटी मामले की हर पहलू से गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क की जड़ें पश्चिम बंगाल के अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश तक फैली हुई हैं। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर गिरोह में शामिल अन्य मास्टरमाइंडों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

साहिबगंज में डिजिटल अरेस्ट के जरिए कितने रुपये की ठगी हुई?
साइबर अपराधियों ने पीड़ित से 1 करोड़ 20 लाख रुपये (1.20 करोड़ रुपये) की ठगी की।
ठगी का शिकार हुए पीड़ित का नाम क्या है और वह कहां के निवासी हैं?
पीड़ित का नाम गौतम दास है, जो झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।
पुलिस ने इस मामले में कहां से और कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस की एसआईटी ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से रंजीत बख्शी और असित महतो को गिरफ्तार किया, और उनकी निशानदेही पर तीसरे आरोपी धीरज हारी को पकड़ा।
साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को कितने बैंक खातों में ट्रांसफर किया था?
पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी के पैसे का लेनदेन 4 हजार से अधिक बैंक खातों के नेटवर्क में हुआ था।
इस मामले में पुलिस में शिकायत कब दर्ज कराई गई थी?
पीड़ित की शिकायत के आधार पर 31 अगस्त 2026 को साहिबगंज के बरहरवा थाने में मामला दर्ज किया गया था।
साइबर ठगों ने पीड़ित को डराने के लिए किस एजेंसी का अधिकारी बताया था?
ठगों ने खुद को सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया था।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·43 मिनट पहले

यह मामला डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते अंतरराज्यीय नेटवर्क और तकनीकी निगरानी की अनिवार्यता को उजागर करता है। झारखंड से पश्चिम बंगाल तक फैला यह सिंडिकेट इस बात का प्रमाण है कि साइबर अपराधी अब सुनियोजित तरीके से सीमावर्ती राज्यों को अपना सेफ हाॅवन बना रहे हैं। भविष्य में ऐसी वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए वित्तीय संस्थानों और राज्यों की पुलिस के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग बेहद जरूरी होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस मामले में 4 हजार से अधिक संदिग्ध बैंक खातों का सामने आना यह बताता है कि यह केवल कुछ ठगों का गिरोह नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी का ढांचा है। जब तक मनी ट्रेल की गहराई से जाँच कर इन म्यूटेंट खातों को तुरंत फ्रीज नहीं किया जाएगा और फर्जी सिम कार्ड तथा दस्तावेजों के स्रोतों पर प्रहार नहीं होगा, तब तक इस तरह के अंतरराज्यीय सिंडिकेट्स का पूरी तरह से सफाया होना कठिन रहेगा।

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