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पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में लगाए आधुनिक LHB कोचअसम
23 अग॰ 2026, 1:21 pm (39 दिन पहले)· 2

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, सभी लंबी दूरी की ट्रेनों में लगाए आधुनिक LHB कोच

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने अपने नेटवर्क में चलने वाली सभी 103 लंबी दूरी की ट्रेनों को आधुनिक LHB कोचों में बदल दिया है, जिससे यात्री सुरक्षा और सुविधा में बढ़ोतरी होगी।

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने अपने अधिकार क्षेत्र में चलने वाली सभी लंबी दूरी की यात्री ट्रेन सेवाओं को पुराने इंटीग्रल कोच फैक्टरी डिब्बों से आधुनिक लिंके हॉफमैन बुश डिब्बों में पूरी तरह तब्दील करने का महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल कर लिया है। शनिवार को रेल अधिकारियों ने इस बात की घोषणा करते हुए बताया कि भारतीय रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण अभियान के तहत यह बदलाव पूरा किया गया है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और ट्रेनों के परिचालन में काफी सुधार होगा।

ट्रेनों का ब्योरा और नेटवर्क पर संचालन की स्थिति

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में संचालित होने वाली सभी लंबी दूरी की ट्रेनें अब पूरी तरह LHB डिब्बों से लैस हो चुकी हैं। इस बदलाव के बाद अब कुल 103 लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएं LHB डिब्बों के साथ पटरी पर दौड़ रही हैं। इन 103 सेवाओं में से 55 ट्रेन सेवाएं सीधे पूर्वोत्तर सीमा रेलवे की अपनी हैं, जबकि 48 ट्रेन सेवाएं अन्य रेलवे जोनों द्वारा संचालित की जाती हैं लेकिन पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के नेटवर्क के भीतर चलती हैं।

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पारंपरिक ICF कोचों की तुलना में जर्मनी की तकनीक पर आधारित LHB कोच अधिक सुरक्षित माने जाते हैं। इनमें एंटी-क्लाइंबिंग विशेषताएं होती हैं जो दुर्घटना की स्थिति में डिब्बों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने से रोकती हैं। साथ ही ये कोच अधिक गति पर चलने में सक्षम हैं और यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर का अनुभव प्रदान करते हैं।

हाई-टेक अग्निशमन प्रणाली और सुरक्षा तकनीक

यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नए LHB कोचों में आधुनिक आग पहचान और बचाव प्रणालियां स्थापित की गई हैं। रेलवे के अनुसार, 1,226 LHB वातानुकूलित (AC) कोचों में फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं जो कोच के भीतर धुएं और आग की निरंतर निगरानी करते हैं।

इसके अलावा, 155 पावर कारों और 79 पैंट्री कारों को फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम से लैस किया गया है, जो आग लगने पर स्वतः ही उसे बुझाने में सक्षम हैं। साथ ही, 3,436 AC कोचों में एयरोसोल आधारित फायर डिटेक्शन तकनीक स्थापित की गई है। ये सभी प्रणालियां ट्रेन के भीतर संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी करती हैं और किसी भी आपात स्थिति में रेलवे कर्मचारियों को तुरंत अलर्ट भेजती हैं, जिससे बड़े नुकसान को समय रहते रोका जा सके।

सुरक्षा ऑडिट और रेलवे क्षेत्र का विस्तार

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे अपने पावर कारों, पैंट्री कारों और AC डिब्बों में चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण लगाने का काम जारी रख रही है। इसके साथ ही, रखरखाव और परिचालन प्रक्रियाओं में किसी भी कमी को दूर करने के लिए नियमित निरीक्षण, सुरक्षा अभियान और तकनीकी ऑडिट आयोजित किए जाते हैं।

गुवाहाटी के मालीगांव में मुख्यालय वाली पूर्वोत्तर सीमा रेलवे भारत के इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी की रीढ़ है। यह रेलवे जोन सभी पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल के सात जिलों और उत्तरी बिहार के पांच जिलों में रेल सेवाएं प्रदान करता है।

सवाल-जवाब

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने किस बड़ी उपलब्धि की घोषणा की है?
पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने अपने अधिकार क्षेत्र में चलने वाली सभी लंबी दूरी की ट्रेनों के आईसीएफ डिब्बों को आधुनिक एलएचबी कोचों में पूरी तरह बदल दिया है।
पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के नेटवर्क में कुल कितनी लंबी दूरी की ट्रेनें एलएचबी डिब्बों से चल रही हैं?
कुल 103 लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएं एलएचबी डिब्बों के साथ संचालित हो रही हैं, जिनमें 55 एनएफआर की अपनी ट्रेनें हैं और 48 अन्य रेलवे जोनों की हैं।
नए एलएचबी कोचों में कौन सी फायर सेफ्टी तकनीक इस्तेमाल की गई है?
इनमें फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम, ऑटोमेटेड फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम और एयरोसोल आधारित फायर डिटेक्शन तकनीक शामिल है।
पूर्वोत्तर सीमा रेलवे का मुख्यालय कहां स्थित है और यह किन क्षेत्रों को सेवा प्रदान करता है?
इसका मुख्यालय गुवाहाटी के मालीगांव में स्थित है। यह सभी पूर्वोत्तर राज्यों, पश्चिम बंगाल के 7 जिलों और उत्तरी बिहार के 5 जिलों में सेवाएं देता है।
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